RTI में पता चला बनकर तैयार है सवा करोड़ का जलमीनार, ग्रामिणो ने शुरू किया सर्च अभियान!

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पटना /छपरा। बिहार में स्वच्छ जल हर गांव कस्बे तक पहुचाने के लिए सरकार ने 2020 तक का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकार हर गांव में जल मिनारो का निर्माण कर रही है, ताकि हर घर तक पीने का पानी नल के जरिए पहुचाया जा सके। लेकिन ये जलमीन बनने के बाद अचानक गायब हो चले है। जी हां गायब और गांव के लों इन जल मीनारो की खेज में लगे है।

ऐसा मामला छपरा से आया जहां लोंगो ने जल मीनार को खेजने वालो को उचित इनाम देने की बात कही है। दरअसल यहां साल 2006 में सरकार ने जल मीनार बनाने के लिए मंजूरी दी थी जलमीनार बन भी गया लेकिन अब लापता है। इस जलमीनार को इस गांव के लोग खोज रहे हैं और जानकारी देने वालों को आकर्षक इनाम देने की घोषणा की है।

ये मामला कस्बा मकेर गांव से साामने आया है। सवा करोड़ में बना ये जलमीनार कागजों पर तो पूर्ण हो गया लेकिन जिस जगह जलमीनार बनाने का दावा किया गया वहां से वह लापता है। बता दे कि छपरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर मकेर प्रखंड का कस्बा मकेर गांव की आबादी लगभग चार हजार की है।

जानकारी के अनुसार साल 2006 में इस आबादी को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने को लेकर एक जलमीनार बनाने की घोषणा की गई थी, जिस पर लगभग एक करोड़ 26 लाख रुपए का खर्च आया। लोग अभी इस जलमीनार का इंतजार ही कर रहे थे तभी आरटीआई से प्राप्त हुई जानकारी में पता चला कि उनका जलमीनार तो बन गया है! इतना हीं नहीं आरटीआई में पता चला कि इस जलमीनार से लोंगो को 2009 से उही पीने का पानी मिल रहा है। इस बात से अनजान लोंगो को जब यह जानकारी मिली तो लोंग जलमीनार की खेज में खोजने खुद ही निकल पड़े। इतना हीं नहीं लोंगो ने जलमीनार को खोजने वाले शख्स को इनाम देने की भी घोषणा की है।

यहां के स्थानीय लोगों की अगर माने तो सरकार के सवा करोड़ खर्च के बावजूद ग्रामीणों को किसी भी जल मीनार से पानी नहंी मिल रहा है। वे आज भी कुएं का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।ऐसे में अगर जलमीनार मिल जाता है तो उनके गांव की पेयजल की बड़ी समस्या दूर हो सकती है। गांववालो ने कहा की जबतक गांव में बना जलमीनार नहीं मिल जाता उसका सर्च आॅपरेशन चलता रहेंगा।

गौरतलब है कि कस्बा मकेर गांव आर्सेनिक प्रभावित गांव में शामिल है, जहां का पानी आम लोगों के लिए खतरनाक है। ऐसे में सरकार ने यहां जलमीनार बनाने की घोषणा कर लोगों को साफ पानी देने की कोशिश की थी लेकिन यह जलमीनार कागज पर ही बन गया और उसकी रिपोर्ट सरकार के वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई। वहीं, मामले की जानकारी मिलने के बाद मकेर प्रखंड के बीडीओ अविनाश कुमार ने मामले को गंभीर बताया है और इसकी जांच का भरोसा दिलाया है।

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