एक बार दरभंगा आ जाओ ‘गब्बर’ क्योंकि पारस अस्पताल के पेशेंट को तुम्हारी जरूरत है

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दरभंगा से वरुण ठाकुर की रिपोर्ट

दरभंगा को एक गब्बर की जरूरत है। अब आप सोच रहे होंगे कि हमने ऐसा क्यों लिखा। हम शोले के गब्बर की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि अक्षय कुमार के फिल्म गब्बर इज बैक की बात कर रहे हैं। इस फिल्म में आपने देखा कैसे एक प्राइवेट अस्पताल में डेड बॉडी को आईसीयू मे रखकर इलाज के नाम पर लाखों की वसूली का भंडाफोड़ किया गया। इसी से मिलता जुलता मामला सामने आया है दरभंगा के पारस अस्पताल में। गुरुवार को पारस अस्पताल के सामने गुस्साई भीड़ ने जमकर हंगामा किया। अब हम आपको पूरा मामला बताते हैं विस्तार से…

बुधवार को बस कि ठोकर से बाइक सवार समस्तीपुर जिला निवासी किशोर ठाकुर के पुत्र राज कुमार ठाकुर और लहेरियासराय सराय मोहल्ला निवासी जितेन्द्र ठाकुर की नाक बेनीपुर रोड में देकुली चट्टी चौक पर बस की चपेट में आ जाने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए। उपचार के लिए जितेन्द्र ठाकुर को दरभंगा मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया !

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लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण दरभंगा के पारस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिजनों का कहना है कि रास्ते में ही जितेन्द्र ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पारस के अंदर 3 घंटा शव को रख कर उपचार के नाम पर 72 हजार का परिजनों से मांग किया गया । यहीं नहीं परिजनों से कहा गया कि 8 यूनिट खून की जरूरत है इसके बाद आनन-फानन में उनलोगों ने 8 यूनिट खून दिया गया। परिजन बता रहे थे की वो भी खुद अस्पताल के कर्मचारी के द्वारा बेच दिया गया । मौत के बाद परिजनों ने दरभंगा लहेरियासराय मुख्य सड़क को कई घंटे तक जाम रखा। इससे पहले भी पारस अस्पताल के खिलाफ इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।