मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जबाव

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बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में नाबालिग लड़कियों के साथ हुए रेप के मामले में रोज एक नया टर्न आ रहा है। इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्‍य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरत हुई तो इस मामले की जांच की मॉनिटरिंग के लिए भी वो तैयार है।

जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने अपने निर्देश में राज्य सरकार और केंद्र सरकार को तीन हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो दिखाने पर गंभीर आपत्ति जताई और साफ किया कि पहचान छिपाने की कोशिश करते हुए संपादित तस्वीर या वीडियो किसी भी हाल में नहीं दिखाया जा सकता। साफ कहा गया है कि इलेक्‍ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया रेप पीड़ि‍त बच्चियों की मॉर्फ्ड तस्वीरें भी नहीं चलाएगा।

इसके साथ ही ‘नेशनल कमीशन फॉर द प्रोटेक्‍शन ऑफ चाइल्‍ड राइट्स’ को भी नोटिस भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि छोटी बच्चियों का कोई इंटरव्‍यू नहीं कराया जाएगा। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील अपर्णा भट्ट को कोर्ट ने एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है जिन्हें इस मामले से जुड़े सारे पक्ष रिपोर्ट करेंगे।

आपको बता दें कि बालिका गृह में यौन-उत्पीड़न की घटना के बाद से बिहार में सियासत तेज है। भारी दबाव के बाद बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 32 लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी थी। बालिका गृह का संचालक व मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर जेल में है। इस मामले में बाल कल्याण समिति के सदस्य विकास कुमार, बाल संरक्षण पदाधिकारी रवि रोशन व ब्रजेश की संस्था में काम करने वाली सात महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में एक आरोपित बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष दिलीप वर्मा फरार है।