सो रहा कानून, एक और जेडीयू नेता की हत्या! गुस्साये लोगों ने …

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बिहार में एनडीए की सरकार के आने के बाद भी सूबे में हर तरफ लूट-पाट, मर्डर की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सूबे का हाल यह है की आम तो आम खास इंसान भी दिन ब दिन बढ़ती अापाराधिक घटनाओं से खौफ मे हैं। ताजा मामला सूबे के नालंदा जिले का है जहां एक जदयू नेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है की बिहार शरीफ में जदयू नेता को अज्ञात बदमाशों ने गोली मारी है।

सूचना के अनुसार कल शाम नगर नौसा थानाक्षेत्र के अंतर्गत बडीहा मार्ग पर अपराधियों ने जदयू नेता और गोराइपुर पंचायत के पैक्स अध्यक्ष सुबोध प्रसाद को गोलियों से छलनी कर दिया। वहीं इस हमले के दौरान उनके साथ मौजूद उनके व्यवसायी दोस्त उदय प्रसाद बाल-बाल बच गए। वहीं पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रत्येक दिन की तरह सुबोध प्रसाद बाइक से दोस्त के साथ गांव लौट रहे थे। उसी दौरान पूर्व से घात लगाए बदमाशों ने काठी पुल के समीप हथियार का भय दिखाकर उनकी बाइक रोक दी और बिना कुछ कहे उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। पैक्स अध्यक्ष को बदमाशों ने सिर, कान और छाती में गोलियां मारी हैं। जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। फायरिंग कि अवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उनको अस्पताल ले गए जहां से उन्हें पटना रेफर कर दिया गया। पटना ले जाने के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उधर परिजनों ने आरोप लगाया है की पंचायत चुनाव की रंजिश में इनकी हत्या की गई है। इस मामले में पुलिस ने सुपासंग पंचायत के मुखिया के पति समेत तीन को गिरफ्तार किया है।

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वहीं जेडीयू नेता की हत्या के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने चंडी-बिहार शरीफ मार्ग को जाम कर दिया है। जाम की वजह से गाड़ियों की लंबी कतार लग गई है। बताया जा रहा है की लोगों का गुस्सा पुलिस की कार्यशैली पर फूटा है। हंगामा कर रहे लोगों का कहना है कि पुलिस के सोते रहने के कारण ही शहर में रोज-रोज अपराधिक घटनाएं हो रही हैं। अपराधी दिनदहाड़े मर्डर जैसी खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो जाते हैं और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है। आक्रोशित लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द हत्यारों की गिरफ्तारी की जाए।

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गौरतलब है की सूबे में नेताओ को टारगेट करने के अपराधिक मामले बढ़ते जा रहे हैं। पिछले 6 दिनों के दौरान नालंदा जिले में दो जदयू नेताओं को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके अलावा राजद नेताओ की भी इसी प्रकार गोली मारकर हत्या कर दी गई भी। ऐसे में सीधा सवाल सुशासन सरकार के कानून के राज के दावे पर उठता है, कि अगर प्रदेश में जब नेता ही सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी अपने आप को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे।

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