कैथी एवं मिथिलाक्षर प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रिय कार्यशाला का हुआ उद्घाटन

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आज रविवार से दरभंगा के एमएमटीएम कॉलेज में सीआइआइएल, मैथिली साहित्य संस्थान,पटना एवं इंटेक दरभंगा चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में कैथी एवं मिथिलाक्षर की लिपि के प्रशिक्षण के लिए आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उदघाटन हुआ।

इस मौके पर भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के निदेशक प्रो. डीजी राव ने कहा कि कैथी और मिथिलाक्षर लिपि के लिए सीआइआइएल, मैसूर की ओर से सर्टिफिकेट कोर्स आरंभ करने पर विचार किया जाएगा। कहा कि मातृभाषा और लिपि का ज्ञान जरूरी है। सरकार को मातृभाषा के संवर्धन और संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए। प्रो। राव ने आगे कहा कि सीआइआइएल भाषा और लिपि के विकास में सहायता के लिए सदा अग्रसर रहेगा।

अध्यक्ष प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि संस्कृति और भाषा को बचाने के लिए लिपि का ज्ञान बहुत आवश्यक है। उन्होंने मिथिला संस्कृति और इतिहास के विभिन्न आयामों की चर्चा करते हुए कहा कि मिथिलाक्षर एवं कैथी लिपि सीखकर मिथिला ही नहीं महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में रखी हुई मिथिलाक्षर की पांडुलिपि को पढ़ सकेंगे।

मुख्य वक्ता भैरव लाल दास ने कैथी एवं मिथिलाक्षर के एक हजार साल के इतिहास को पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया। कहा कि कैथी और मिथिलाक्षर को स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम को निदेशक डॉ। नारायण चौधरी और डॉ। बैजनाथ चौधरी बैजू ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन मैथिली साहित्य संस्थान पटना के डॉ। शिव कुमार मिश्र ने किया। संचालन प्रो। एनके अग्रवाल ने किया।

ज्ञात हो कि यह राष्ट्रीय कार्यशाला 27 जुलाई 2018 तक चलेगी। इसमें कई विदेशी प्रतिभागी भी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के अंत मे प्रो। प्रफुल्ल कुमार ¨सह मौन के आकस्मिक निधन पर 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।