BIG BREAKING: क्या राधामोहन सिंह की निष्क्रियता से BJP का टेंशन बढ़ा!

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वो भी एक दौर था, जब बिहार के लोग प्रार्थना करते थे कि हमारे बिहार का कोई नेता रेलमंत्री बन जाए। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व में जब हमारे राधामोहन सिंह को कृषि मंत्रालय मिला तो हम सब बहुत प्रसन्न हुए। मैं मोतिहारी का रहने वाला हूं और जब राधामोहन सिंह जी को कृषि मंत्रालय मिलने के बारे में सुना तो खुशी से झूम उठा ।

मैं ये मानकर बैठ रहा था कि हमारे रैयाम के चीनी मिल का अब कायापलट होने ही वाला है। झूठ नहीं कहूंगा स्वार्थवश मैं ये यही मानकर चल रहा था कि रेल मंत्री कोई हमारे बिहार का होता तो दो-चार रेल चला देता लेकिन अब तो कृषि मंत्रालय मिल चुका है तो हमारे बिहार का एक-एक चीनी मिल खुल जाएगा।

10 अप्रैल और राधामोहन सिंह

10 अप्रैल की तारीख को राधामोहन सिंह शायद अपनी जिंदगी में कभी भूल नहीं पाएंगे। भारत के इतिहास में ये एक कलंक के दिन के रूप में सदा के लिए याद किया जाएगा क्योंकि केंद्रीय कृषि मंत्री के खुद के संसदीय क्षेत्र में किसानों ने आत्मदाह कर लिया। दुर्भाग्य की बात है कि राधामोहन सिंह ने इस मामले पर चुप्पी साध ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब साल 2014 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोतिहारी गए थे तो उन्होने राधामोहन सिंह के समर्थन में जनता से पूर्ण समर्थन मांगा था और मोतिहारी की जनता ने नरेंद्र मोदी के विश्वास में आकर राधामोहन सिंह को संपूर्ण विश्वास सौंप दिया। लेकिन जब एक केंद्रीय मंत्री एक चीनी मिल के मुद्दे को और उसके मजदूरों के मुद्दे को सुलझाने में अक्षम साबित हो जाए तो इसको नाकामी नहीं तो और क्या कहेंगे खास कर जबकि उस केंद्रीय कृषि मंत्री के ये खुद के लोकसभा क्षेत्र का मामला हो।

हीं मोह पाए हैं अपने लोकसभावासियों का दिल

आत्मदाह कोई जान बूझकर तो करता नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भरोसे के साथ राधामोहन सिंह को कृषि मंत्रालय सौंपा लेकिन उस उम्मीद पर कितने खरे उतरे राधा मोहन सिंह। राधा मोहन सिंह के खुद के क्षेत्र में चीनी मिल के मजदूर आत्मदाह करने पर उतारू हो गए और इनके कठोर दिल से संवादना के दो शब्द नहीं निकले। इसको धिक्कार नहीं तो और क्या कहेंगे।

वर्तमान में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह देश के नौंवी, ग्यारहवीं, तेरहवीं के बाद पंद्रहवीं एवं सोलहवीं लोकसभा के सांसद निर्वाचित हुए हैं। उनकी इस अप्रत्याशित जीत का फल भी उन्हें केंद्र में मंत्री पद के रूप में मिला. लेकिन मंत्री होंने केके बाद भी राधामोहन सिंह देश के किसानों के हित मे तो छोड़िए अपने संसदीय क्षेत्र के किसानों के लिए कुछ नहीं कर सके हैं। मोतिहारी के चीनी मिल का मुद्दा हो या फिर किसानों की आत्महत्या, राधामोहन सिंह की कई बार मीडिया में किरिकिरी भी हुई हैं,

न पीएम मोदी खुश न मोतिहारी की जनता

वहीं सूत्रों की माने तो नरेंद्र मोदी की सरकार में सबसे नाकारा मंत्रियों की लिस्ट में इनका नाम शामिल है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राधामोहन सिंह के कामकाज से खुश नहीं हैं। ऐसे में अंदरखाने से ये भी खबरें आ रही हैं कि वरिष्ठता के नाम पर ढोना और कामकाज में ढीला होना 2019 में राधामोहन के लिए नाकारात्मक साबित हो सकता है। जिसके कारण 2019  में bjp राधा मोहन सिंह का टिकट काट सकती है. वहीं ये भी हो सकता है कि मोतिहारी की सीट बीजेपी अपने सहयोगी जदयू को दे दे.

 

हालांकि राधा मोहन सिंह अपने टिकट को लेकर आश्वस्त दिख रहे हैं, लेकिन जनता के बीच उनके खिलाफ माहौल बना हुआ है. शायद इस बात का अंदाज़ा राधा मोहन को भी है. तभी तो वे अब अपने प्रतिद्वंदीयों के चरित्र हनन करने और उन्हें अपना मोहरा  बताने की कोशिश कर रहे हैं.सूत्रों की माने तो वे मीडिया के माध्यम से यहां से महागठबंधन के संभावित उम्मीदवार  को अपना मोहरा बताने की कोशिश में लगे हैं.

राधा मोहन कुछ मीडिया संस्थानों से मिलकर अपने आप को चंपारण का नरेंद्र मोदी साबित करने की कवायद में जुट गए हैं, ताकि जनता के पास इस बार भी उन्हें चुनने के अलावा कोई और ऑप्शन न बचे और आलाकमान भी उन्हें इसी रूप में देखे. जैसी खबरे हैं अगर वैसा हीं है तो बात साफ है कि राधा मोहन सिंह भी इस बार मोतिहारी से चुनाव लड़ने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नही हैं, यानी आलाकमान जो पहले से उनके काम से नाखुश है, वो बहुत हद तक मुमकिन है कि उनका टिकट काट सकता है.