कॉलेज में पन्द्रह दिवसीय ‘आत्मरक्षा प्रशिक्षण पखवाड़ा’ का समापन समारोह में वरिष्ठ शिक्षक ने दिये अपने तर्क !

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दरभंगा से वरुण ठाकुर की रिपोर्ट-

सी एम साइंस कॉलेज, दरभंगा में छात्राओं के लिए दिनांक 16 अगस्त 2018 से 30 अगस्त 2018 तक आयोजित किए गये पन्द्रह दिवसीय ‘आत्मरक्षा प्रशिक्षण पखवाड़ा’ का समापन समारोह शनिवार दिनांक 22 सितम्बर 2018 को महाविद्यालय के कामेश्वर भवन में आयोजित किया गया। महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक एवं जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ आर पी सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में ल0 ना0 मिथिला विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष डॉ भोला चौरसिया के कर-कमलों से प्रशिक्षित सभी 50 प्रतिभागी छात्राओं के बीच प्रमाण-पत्र वितरित किए गये।

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समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार रखते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के छात्र कल्याण अध्यक्ष डॉ भोला चौरसिया ने कहा कि आज की भागमभाग जिंदगी एवं पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के कारण नारी के लिए आत्मरक्षा का विषय अत्यंत संवेदनशील हो गया है और ऐसे में महाविद्यालय की छात्रसंघ इकाई द्वारा छात्राओं के लिए इस तरह के प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाना काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रशिक्षण शिविर में सीखे गए गुर का सकारात्मक इस्तेमाल करने एवं परिवार व समाज की महिलाओं को भी इस हुनर से परिचित कराने का प्रतिभागियों से आह्वान किया। कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ संध्या झा ने नारी सुरक्षा के मसले पर गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि एक नारी के शिक्षित होने से जहां पूरा परिवार शिक्षित होता है वही एक नारी की सुरक्षा से पूरा परिवार और समाज सुरक्षित होता है। अपने संबोधन में उन्होंने छात्राओं को संस्कारवान बनने एवं अपने आत्मविश्वास को जगाने की सीख दी।
महाविद्यालय के आय-व्यय परिष्कर्ता डॉ योगेंद्र झा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज अधिकतर युवा पाश्चात्य संस्कृति की आभासी दुनिया के चंगुल में फंसे हैं, जिस कारण वे वास्तविक दुनिया से कट कर अपनी सभ्यता और संस्कृति से विलग हो रहे हैं। उन्होंने एक सभ्य व सुसंस्कृत समाज की अवधारणा को स्थापित करने के लिए छात्र-छात्राओं की कक्षाओं में नियमित उपस्थिति को महत्वपूर्ण बताया।

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वहीं छात्र संघ सचिव अदित कुमार झा ने कहा की आज कल लड़कियों सब पर आये दीन हो रहे अत्याचार , लड़की है र‍ात को बाहर नहीं निकल सकती ये सब से निजात के लिए लड़की को सेल्फ डिफेंस होना चाहिए। इसके लिए हमलोगों ने ऐक अच्छी पहल की है हम विश्वविद्यालय से मांग करेंगे जो बोक्सिंग को भी खेल विभाग में शामिल किया जाय । जिससे आने वाले समय में लड़कियों सब को खेल के प्रति जो प्रतिभा है उसको निखार सके
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ आरपी सिंह ने मौजूदा दौर में मानसिक एवं शारीरिक रूप से सबल होने को समय की मांग बताते हुए गलत आचरण करने वाले विक्षिप्त किस्म के लोगों को माकूल जवाब देने के लिए आत्मरक्षा के गुर सीखने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने संबोधन में यह जानकारी भी दी की छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वाला विश्वविद्यालय स्तर का यह पहला कार्यक्रम है और विश्वविद्यालय ने इसे संज्ञान में लेते हुये महाविद्यालय और छात्रसंघ के पदाधिकारियों को इस आयोजन के लिए सम्मानित करने की योजना बना रहा है।

 

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पल्लवी के संचालन में आयोजित समापन समारोह में छात्र संघ के महाविद्यालय इकाई की अध्यक्ष जया सिंह ने पूरे पन्द्रह दिनों तक आयोजित किए गए आत्मरक्षा प्रशिक्षण पखवाड़ा के लिए विशेष रूप से छात्र कल्याण अध्यक्ष डॉ भोला चौरसिया का धन्यवाद करते हुए कहा कि बिना उनकी इजाजत के इस शिविर का आयोजन संभव ही नहीं था। सुश्री सिंह ने महाविद्यालय प्रशासन खासतौर पर महाविद्यालय की क्रीड़ा अध्यक्ष से अपील की कि छात्र संघ की पहल पर आयोजित किए गए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को आगे भी बरकरार रखा जाए। अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर होने वाले आयोजनों में महिला बॉक्सिंग खेल को भी शामिल किए जाने की मंच से मांग की। इस अवसर पर गणित विभागाध्यक्ष डाॅ हरिश्चंद्र चंद्र झा, वनस्पति विज्ञान के शिक्षक डॉ दिलीप कुमार झा, एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सत्येंद्र कुमार झा, एनसीसी पदाधिकारी डॉ सुजीत कुमार चौधरी, आइक्यूएसी सहायक प्रवीण कुमार झा आदि ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के आयोजन में संघ के पदाधिकारी आदित्य झा, विकास कुमार, उत्सव पराशर, अनूप आनंद, प्रभाकर झा एवं नीरज कुमार सहित अनेक छात्र छात्राओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।