भारत के लिए परेशानी बन सकती है चीन की ये आर्टिफिशियल चिड़िया’, जानिए

birds
birds
Advertisement

बीजिंग/नई दिल्ली। तकनीक के मामले में चीन का भी कोई जवाब नही। चीन नई तकनीक डेवलप करनेवाले देशो की कतार में हमेंशा अव्वल खड़ा रहता है। वही भारत में भी इसके तकनीति का बजार सबसे बड़ा है।लेकिन अब चीन ने एक ऐसी तकनीक डेवलप की है जीससे वह भारतीयों पर नज़र ररखने का प्लान बना रहा है।

यू तो आज कल दुनिया के अनेक देशों के द्वारा ड्रोन का प्रयोंग किया जा रहा है। ज्यादातर देश इसका इस्तेमाल अपने दुश्मनों पर नजर रखने को लेकर करते है। लेकिन चीन इससे अलग है, चीन इसका इस्तेमाल अपने ही नागरिकों की निगरानी के लिए करी रहा है। फिलहाल इस तकनीक का इस्तेमाल पांच प्रांत में ही किया जा रहा है।

china-bird-drone
china-bird-drone

लेकिन चीन की ये हरकत भारत के लिए भी परेशानी का सबब बन सकती है। रिपोर्ट की माने तो चीन के ये ड्रोन्स पक्षियों की उड़ान की 90 प्रतिशत तक नकल कर लेते हैं। आपको बता दे कि चीन ने इन पक्षीयों की नकल करनेवाले ड्रोंस को शिनजियांग प्रांत के उइघर स्वायत्त क्षेत्र में तैनात किया गया है। इस क्षेत्र से चीन की सीमा पाकिस्तान, रूस और भारत समेत 8 अलग-अलग देशों से जुड़ती है। शिनजियांग प्रांत में ही भारत और चीन के बीच विवादित अक्साई चिन का इलाका भी है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि चीन इलाके में ड्रोन्स का इस्तेमाल कर सकता हैं।

ये हैं खुबिंयांः-

90 प्रतिशत तक पक्षियों की नकल कर लेते हैं ड्रोन्सः- रिपोर्ट के अनुसार ड्रोन्स के पंखों को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि इसे देखकर कोई भी आम आदमी असली चिड़िा और इस ड्रोंन में फर्क नही कर सकता है। जमीन से देखने पर ये ड्रोंन चिड़िया की तरह ही दिखता है। पंख हिलते तो ऐसा लगता है कि कोई चिड़िया उड़ रही है। सबसे खास बात तो यह है कि ये ड्रोंन्स 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा में उड़ सकते हैं। इस वजह से इन पर किसी को शक भी नही होंगा।

drone-bird
drone-bird

रडार की पकड़ से परे:- इन पक्षीयों की तरह दिखनेवाले इन ड्रांेन्स की सबसे बड़ी खाशियत यह है कि ये रडार से भी बच निकलते हैं। आकार छोटा होने की वजह से ये रडार के दायरे में नही आ पाते। बता दे कि इन ड्रोंन्स का वनज करीब 200 ग्राम है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, जीपीएस, आधुनिक कैमरे और सैटेलाइट डेटा लिंक की भी सुविधा है।

इस तकनीक से यह हर वक्त लोगों पर नजर रखने में सक्षम रहते हैं। आपको बता दे कि हालांकि अभी पूरे चीन में इन ड्रोन्स का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। लेकिन टेस्टिंग के दौरान इन्हें सैन्य इस्तेमाल के लिए बेहतरीन माना गया हैए जो भारत के लिए भी चेतने का एक संकेत हो सकता है। इस प्रोग्राम की टीम के सदस्य और चीन की नार्थवेस्ट पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यांग वेंकिंग ने बताया कि अभी ऐसे ड्रोन्स कम ही बने हैं, लेकिन आने वाले वक्त में इन्हें और ज्यादा तैयार किया जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here