भारतीय संस्कृति को दूषित कर रही है ये फ़िल्म! बिल्कुल ना देखें!

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By sahul pandey
आज कल जब भी यूट्यूब पर कुछ भी देख रहा हूँ तो बीच में या पहले नेटफ्लेक्स का एक ऐड आ जाता है, देख के म में बहुत से अरमान ऐसे हिं जागने लगते हैं, भैया सबके जागते होंगे क्योंकि ये ऐड हिं कुछ ऐसा है।

दरअशल यह नया ऐड नेटफ्लिक्स की नई पेशकश ‘लस्ट स्टोरीज़’ का है जो आज कल युवाओ में भी काफी चर्चा का विषय बना है तो कुछ लोग अंदर हिं अंदर इसे देख कर गुस्से से लाल टमाटर हो रहे हैं। हो हो भी क्यों न होने का इस फ़िल्म ने पर्याप्त कारण भी दिया है। फ़िल्म ने अपने ट्रेलर से हिं हिंदुस्तान की परंपरा से लेकर संस्कृति तक को खुली चुनौती जो दे दी है।

बात ये है की ये फ़िल्म एक बहुत हिं जरूरी . इंसानी भावना जिसे हम सब कमरों के भीतर हिं रखने के बात करते हैं क्यों की हमारी संस्कृति हिं कुछ यही कहती है की ये कमरों से बाहर आया तो ये सही नही है। जी आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं, फ़िल्म पूर्ण रूप से ‘कामुकता’ पर हिं आधारित है।

नेटफ्लिक्स पर आई इस फ़िल्म में 4 शार्ट फिल्मे हैं जो जाने माने निर्देशकों जिनमे अनुराग कश्यप, ज़ोया अख्तर, दिबाकर बनर्जी और करन जौहर जी शामिल हैं, ने बनाया है, वहीं इनमें मशहूर एक्ट्रेस राधिका आप्टे, भूमि पेडनेकर, मनीषा कोइराला, कियारा आडवाणी, नेहा धूपिया, के साथ एक्टर संजय कपूर और विकी कौशल जैसे कलाकार मौजूद हैं।

सब्जेक्ट क्या है:- भैया हैम आपको पहले हिं बात चुके हैं की सब्जेक्ट वही है जिसे सुन के एक सभ्य लड़का मुस्कि छोड़ देता है तो एक सभ्य परिवार की लड़की शर्म से पानी पानी हो जाती है।यानी sex , फ़िल्म कई सारे रिश्तों के बीच के सैक्स रिलेशन पर आधारित है, जिसमे एक सीन तो टीचर उर स्टूडेंट के बीच भी है। वही इसमे महिलाओ के ऑर्गनेजम को बड़े खुले तौर पर दिखाया गया है, बाप रे बाप मुझे लिखने में शर्म आ रही है!लेकिन क्या करूं आपको बताना तो मेरा काम है।

अगर आपने यूट्यूब पर इस फ़िल्म का प्रोमो देखा हीग तो आपको याद होगा की फिल्म के प्रोमो में कामुकता भरे दृश्य और डॉयलॉग्स की झड़ी लगा दी गई है। वही जहां महिला का भरमार थी। फ़िल्म के एक सीन जिसमे महिला का ऑर्गेज्म का सीन है वहीं लता मंगेशकर जी की भारत कोकिला वाली आवाज में बज रहे आलाप को अगर उनके फैन्स सुन ले तो भी बवाल हिं हो जाए।

वैसे बवाल हो हिं गया है इस सीन को लेकर फ़िल्म के निर्देशक को मंगेशकर परिवार की नाराजगी झेलनी पड़ी है, लेकिन ये नाराजगी तो भैया फ़िल्म के लिए वरदान बन गई है। जब से ये बात सामने आई है, इस फिल्म को लेकर लोगों का उत्साह बढ़ गया है।


अब ऐसे में एक आशा की किरण तो बजरंग दाल वाले हिं है जिन्हें देश की संस्कृति की काफी चिंता रहती है। जो लोग वैलंटाइन डे पर कपल्स को पार्क में नही देख सकते वो इस फ़िल्म को कैसे बर्दास्त कर सकते हैं! और दूसरी आशा की किरण हमारे राम राज्य वाली सरकार से है जिससे इसमे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन शायद अभी तक दिख नही है,दिखता तो सेंसर न लग जाता।

लेकिन एक दावा तो मैं कर हिं सकता हुन भले हिं कुछ लोग मेरी बात सुन के इससे न देखे लेकिन भईया प्रोमो देख आप भी इस फिल्म को देखने के लिए ललायित हो रहे होंगे हमे पक्का यकीन है।

खैर जो भी हो मैं आपको कुछ अच्छे कारण बात देता हूँ ताकि आप ये ना देखे:

-अगर आप देश की संस्कृति में विश्वास करते हैं तो, भैया आपको इसधर मुद के देखना भी पाप है।
-भाई-भाई ,भाई- बहन , मा बेटे, साथ में भूल के भी ना देखे और अगर पापा साथ हैं तो भैया लैपटॉप या मोबाइल बंद कर ले नही तो जूता उनका और सर आपका।

-सभ्य घर के है तो देखना गुनाह है आपके लिए।
-गुरु को भगवान मानते है तो न देखे, नही तो …
-फ़िल्म नेटफ्लेक्स पर है तो पहले app डाउनलोड फिर सब्सक्रिप्शन तब देख सकेंगे, यहीं फटे हाल वाले तो भूल जाए और अपनी लालसा को पेटी में बंद कर दे।

क्यों देखे
-पैसा है तो subscrption ले और देखे मना किया है।
-ओपन माइंडेड है तो फिर कुछ कहने को बाकी क्या है।
-घरवाले निर्लज, बेहया, बेशर्म कहते है तो फिर तो आपके पास सर्टिफिकेट है देखने का।
-अकेले हैं तो मौज है अच्छा टाइम पास होगा।
-एक्टर्स और डायरेक्टर्स दोनो कमाल के है तो देखना तो बनता है।

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