देश की प्रथम महिला डॉक्टर बनी थी बिहार की बेटी , जिसने तोड़ा यह रिकॉर्ड

Kadambini-Ganguly
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आज है राष्ट्रीय चिकित्सीय दिवस यानि डॉक्टर्स डे है आज हम आपको बताना चाहेंगें की देश की पहली महिला डॉक्टर के बारे में जो बिहार की थी. साथ ही यह भी बता दें की देश के प्रथम पुरूष डॉक्टर भी बिहार से ही थे . भारत के प्रसिद्ध डॉक्टर डॉ बिधान चन्द्र रॉय (डॉ.बी.सी.रॉय)को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी जंयती और पुण्यतिथि पर इसे मनाया जाता है. उनका जन्म 1 जुलाई 1882 में बिहार के पटना में हुआ था.

बिहार के भागलपुर में 18 जुलाई 1861 में जन्मी कादम्बिनी गांगुली भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी. उन्होने अपनी डॉक्टर की
डिग्री सात समंदर पार यूरोप जा कर प्राप्त की थी.

गांगुली भारत की पहली महिला स्नातक हुई और देश की पहली महिला फिजीशियन थीं. बता दें कि उसी साल महाराष्ट्र की आनंदी बाई जोशी भी महिला डॉक्टर बनीं लेकिन, कादम्बिनी ने विदेश से डिग्री लेकर एक विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में अपना रिकॉर्ड बनाई थी
.

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कादम्बिनी पहली दक्षिण एशियाई महिला भी थी जिन्होंने यूरोपीयन मेडिसिन में शिक्षा लिया था. यही नहीं कांग्रेस के अधिवेशन में भाषण देने वाली पहली थी . जिन्होंने यह गौरव प्राप्त किया था . 1886 में कादम्बिनी देश की पहली महिला डॉक्टर बनी थीं .

कादम्बिनी उस दौर की महिला है जब समाज म लड़कियों की शिक्षा के लिए राजी नहीं था. उस दौर में लड़कियों को घर से निकालना भी गवारा नहीं था. उस दौर को पार कर देश कर कादम्बिनी अपने लक्ष्य को प्राप्त किया . उनकी जिेदगी में बहुत अड़ंगे आया लेकिन कादम्बिनी ने एक शुरूआत की थीं . वो न होतीं , तो शायद हमारा समाज और भी देर से जागता है.

कादम्बिनी के पिता बृजकिशोर बसु ब्रह्मो सुधारक और भागलपुर में हेडमास्टर की नौकरी करते थे बृजकिशोर ने 1863 में भागलपुर महिला समिति बनाई थी. जो भारत का पहला महिला संगठन था. 1878 में कादम्बिनी कलकत्ता यूनिवर्सिटी का एंट्रेस एग्जाम पास करने वाली पहली महिला थी. देश में पहला बनने का कीर्तिमान शामिल है. जब वह यूरोप से भारत लौटी तो उनके हाथ में मेडिसिन और सर्जरी की तीन अडवांस डिग्रियां थीं . वो उस दौर की सबसे पढ़ी लिखी महिला थीं.

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कादम्बिनी की शादी 21 की उम्र में 39 साल के विधुर द्वारकानाथ के साथ हुई थी. द्वारकानाथ भी ब्रह्मो समाज के एक्टिविस्ट थे. पिछली पत्नी से पांच बच्चे थे और कादम्बिनी के तीन बच्चें हुए . उन्होंने आठ बच्चो को पालन पोषण किया.

कादम्बिनी देश की पहली वर्किंग मां थीं. मां, डॉक्टर और सोशल एक्टिविस्ट का किरदार अपनी जिंदगीं में बखूबी निभाया. उनके लिए यह सब एक साथ कर पाना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने दोनों जगह अपने कर्तव्‍यों को बखूबी निभाया. एक मां के रूप में भी और एक डॉक्‍टर के रूप में भी.

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