सिर्फ साढ़े चार घंटे और तैयार हो भारतीय रेलवे ने रच दिया इतिहास, आप भी देखिए ये कारनामा

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नई दिल्ली। रेलवे के पूर्व तटीय रेलवे मानव रहित क्रॉसिंग्स पर होने वाली दुर्घटनाओं से परेशान तो है लेकिन इसे लेकर अब उसने एक बड़ा अनूठा उदाहरण पेश करने के साथ-साथ एक रिकाॅर्ड भी कायम किया है। आपको बता दे कि ओडिशा के संबलपुर रेलवे का ये कारनामा देखने को मिला है। यहां मंडल में मानव रहित क्रॉसिंग को न सिर्फ खत्म ही किया बल्की महज पांच घंटे से भी कम समय में छह मध्यम ऊंचाई के सब-वे (अंडरब्रिज) का निर्माण कर नया रिकाॅड भी बनाया।

आपको बता दे कि इस अंडरब्रिज के बन जाने के बाद अब संबलपुर मंडल के सभी मानव रहित क्रॉसिंग खत्म हो जाएंगे। इस बात की जानकारी संबलपुर के मंडल रेल प्रबंधक ने दी। पूर्व तटीय रेलवे में संबलपुर के मंडल रेल प्रबंधक डॉ. जयदीप गुप्ता ने बताया कि संबलपुर मंडल में छह सब-वे का काम एक साथ शुरू किया गया। गुरुवार को साढ़े चार घंटे में सभी अंडरब्रिज का काम पूरा कर लिया गया। आपको बता दे कि इन छह अंडरब्रिजों के बन जाने के बाद से ओडिशा के कालाहांडी इलाके में भवानीपटना-लांजीगढ़ रोड सेक्शन में सात मानव रहित गेट पूरी तरह से हमेंशा के लिए बंद हो गए हैं।

रेलवे में अपनी तरह का पहला प्रयासः- आपको बता दे कि अभी तक का रेलवे के इतिहास में ये अपने तरह का पहला प्रयास है। इसे लेकर मंडल रेल प्रबंधक ने कहा कि संबलपुर मंडल में छह अंडरब्रिज का निर्माण अपने आप में पहला प्रयास है। यह न केवल पूर्व तटीय रेलवे में, बल्कि भारतीय रेलवे में पहली बार किया गया है।

आपको बता दे कि छह अंडरब्रिजों के एक साथ निर्माण की राह में कइ्र प्रकार की अड़चने थीं। मौसम भी अनुकूल नही था क्यो कि मानसून की स्थिति भी अनुकूल नहीं थी। अभी तक हम ऐसे वीडियोंज चाईना या दूसरे देशो के देखते थे ए लेकिन ऐसा पहली बार है कि भारत में भी इतनी तिव्र तरीके से काम को अंजाम दिया जा रहा है। बता दे कि ऐसे कदम भारतीय रेल के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

बताते चले कि छह अंडरब्रिज के निर्माण में 300 कामगार, 12 क्रेन और 20 एक्सवेटर्स की मदद ली गई। रेलवे ने अंडरब्रिज बनाने के लिए पहले से बने हुए सात कंक्रीट के बॉक्स नुमा ढांचों का सहारा लिया। ये अंडरब्रिज 4.15 मीटर ऊंचे हैं। कुल 42 ऐसे बॉक्स से सभी अंडरब्रिज बनाए गए हैं।

अंडरब्रिज बनाने के लिए रेलवे के कामगारों ने पहले रेलवे ट्रैक को हटाया। इसके बाद एक्सवेटर्स मशीनों से निर्माण स्थल पर खुदाई की गई। क्रेन से वहां कंक्रीट से बने बॉक्स रखे गए। इसके बाद कामगारों ने फिर उनके ऊपर पटरी बिछा दी।

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