23 अगस्त, 2017
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ऑल बिहार पियक्कड़ समाज का मुख्यमंत्री नीतीश के नाम खुला पत्र

Nitish kumar aur Sarabi

निखिल झा

फादरणीय मुख्यमंत्री जी,
फादर वाला परनाम आपको। गुस्ताखी के लिए माफ़ी चाहूँगा। ऊपर जो लिखे हैं उ मिस्टेक नहीं है मुख्यमंत्री साहब। उ जान बुझ कर लिखे हैं। वो क्या है न की मुख्यमंत्री तो आप चुनाव जीत कर बने थे,लेकिन बिहार में शराब बंदी लागू करवाने के बाद तो आप हमारे फादर जैसे हो गए हैं। सो हम भी सोचे की जब चिट्ठी लिख रहे हैं तो आपको कुछ अलग अभिवादन दें।

मुख्यमंत्री जी,
हमारे फादर भी शराब के सेवन को गलत मानते हैं। अगर मैं ये कहूँ की दुनिया के ज्यादातर लोग शराब के सेवन को गलत मानते हैं तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। लेकिन सर गलत तो लोग राजनीती को भी मानते हैं फिर राजनीति भी छोड़ देना चाहिए। खैर आप राजनीती तो छोड़ने से रहे ये सारा ढोल शराबबंदी का इसीलिए पीटा ही जा रहा है कि आने वाले सालों में जम कर राजनीति कर सकें आप शराब बंदी पर। वैसे चिट्ठी जब आप यहाँ तक पढ़े होंगे तो आपको मुझपर बहुत गुस्सा आ रहा होगा। आप सोच रहे होंगे की सब बड़ाई कर रहा है और इ दारुबाज बुराई कर रहा है मेरा।
तो हम आपको ये बता दें मुख्यमंत्री महोदय की हम आपके बहुत बड़े प्रशंसक हैं। आप शराबबंदी किये और हम पीना छोड़ दिए। यकीन नहीं हो रहा है न आपको? हम भी यही कहना चाह रहे हैं मुख्यमंत्री साहब। आपके लाख कोशिशों के बावजूद हमारे जैसे दारुबाज पी ही रहे हैं दारु। अरे झारखण्ड जाकर नहीं, यहीं बिहार में।
हिल गए न! वैसे एक बात कहें, अगर आप हमको जेल नहीं भेजने का वचन दें तो। आप सोच रहे होंगे कि चार महीने से ऊपर हो गया शराब बंद हुए तो आज काहे बैठे हैं चिट्ठी लिखने के लिए। उसके पीछे बहुत बड़ा रीजन है। समझे न बहुत बड़ा रीजन। अखबार में देखे कि आप तीन दर्जन से ज्यादा पुलिस वालों को सम्मान दिए हैं। काहे कि उ सब बिहार में शराब बंदी में बहुत योगदान किये हैं। लेकिन मुख्यमंत्री जी शराब है की मिल ही रहा है। आप पूछिये इस से पहले हम ही बता देते हैं की हम दरभंगा से हैं और जानकारी पूरा बिहार का है। लेकिन पूरे बिहार पर अगर बात करेंगे तो चिट्ठी भी लम्बा हो जाएगा और आप बोर भी हो जाइएगा। इसलिए दरभंगा का ही बात कर लेते हैं।

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दरभंगा पियक्कड़ों की संख्या के हिसाब से पटना और मुजफ्फरपुर के बाद तीसरा सबसे बड़ा जिला है। आप जब से शराब बंद करवाए हैं तब से यहाँ पियक्कड़ों की संख्या आधी हो गयी है। वो क्या है न की पन्नी पीने वाला सब और ताड़ी पीने वाला सब, अरे वही गरीब जनता। तो गरीब जनता अब दारु छोड़ के भांग का सेवन कर रही है। लेकिन आधे पियक्कड़ अभी भी हैं। ये सब रईस पियक्कड़ हैं। मने पहले डेढ़ सौ का पौवा पीते थे अब पांच सौ का पौवा पीते हैं। ये हैं की अभी भी पीते हैं और आप हैं की पुरस्कार बाँट रहे हैं पुलिस वालों को। आप भी क्या कीजियेगा आपके ये निठल्ले पुलिस वाले झूठ मुठ का दारु पकड़ कर आपको दिखा रहे हैं। तस्कर सब जो है दारु का उ सब अभी भी सेफ है। इसलिए हमलोग भी सेफ हैं और हमलोगों का पीने का आदत भी सेफ है।

जब मन करता है फोन घुमाते हैं और बोलते हैं चाहिए। उधर से आवाज़ आता है क्या? चौअन्नी, अठन्नी, या रुपैया? अब शराब-बंदी में चौअन्नी से ज्यादा पीने का हमारा हैसियत है नहीं सो हम तो चौअन्नी ही मंगाते हैं। पीते हैं और टाइट हो जाते हैं। चौअन्नी से ज्यादा इसलिए नहीं बढ़ पाते क्यूंकि कहीं ज्यादा लग गया तो नशा जेल में उतारेंगे आप। आप अब हमको झूठा मान रहे होंगे। लेकिन माँ कसम सच में दारु बहुत आसानी से उपलब्ध है यहाँ तो। हर मोहल्ला में एक ठो सप्लायर है। जब चाहिए जैसे चाहिए दारु उपलब्ध है बस आपको जानकारी होनी चाहिए कि फोन किसको करना है। कहिये तो आपके मंत्रियों के लिए भी उपलब्ध करवा दें। लेकिन आप तो हमको ही जेल में डाल दीजियेगा और गलत जानकारी देने वाले पुलिसवालों को पुरस्कार देकर उनका हौसला अफजाई कीजियेगा।

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अरे हम तो कहते हैं मुख्यमंत्री साहब आप खुद भी जाइए छापेमारी में। आपको खुद पता चल जाएगा की कितना माल पकडाया और कितना का रिपोर्ट हुआ। दिन भर शराब बंदी पर अख़बार, टी वी और रेडयो पर विज्ञापन और खबर देखते रहते हैं और मन ही मन आपको कोसते रहते हैं की शराब बंदी तो हुआ नहीं आपने खर्चा बढवा दिया हम लोगों का। ऊपर से जब से आप शराब बंदी के युद्ध के इन सेनापतियों को मेडल दिए हैं देह जर के ख़ाक हो गया है। ये अभी तक जो शराब बंदी है ये इन्ही सेनापतियों की गलत रिपोर्टिंग का नतीजा है। न ये झूठमूठ का आपको कहते कि शराब नहीं मिल रहा है बिहार में न आप खुश होकर ताली बजाते। लेकिन समस्या तो ये है मुख्यमंत्री साहब की ये सेनापति बेचारे भी क्या करें। सच बोलेंगे तो आप सस्पेंड कर दीजियेगा और थानेदार से हवालदार बना दीजियेगा। इसलिए ये सब आप से झूट्ठे कह रहा है कि शराब नहीं मिलता है बिहार में।

एक निवेदन करना चाहूँगा लास्ट में। एक बार आप खुद भी ट्राई कीजिये शराब खरीदने का एक आम नागरिक बनकर। अगर आधे घंटे में आपको शराब नहीं मिला तो आरएस की चौअन्नी की कसम पक्का दारु पीना छोड़ दूंगा। आशा है की मेरी भावनाओं को और अपने सेनापतियों की करतूतों को समझने के बाद आप सबक लेंगे और जल्द से जल्द दारु बिना दिक्कत उपलब्ध करवाने का आर्डर देंगे। अपनी वाणी को यहीं विराम देता हूँ बांकी बातें अगली चिट्ठी में लिखूंगा।
आखिर में मेरा अपना एक शेर।।।

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दारु पिए राजा, भांग खाए चोर !!
गांजा पिए… जो धुआं छोड़े चारों और !!
आपका विश्वासी
ऑल बिहार पियक्कड़ समाज

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