24 अगस्त, 2017
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जहाँ एक तरफ लोग अपना कालाधन छुपा रहे हैं, वहाँ इस आईएएस अधिकारी ने माँगा अपने 900 रूपये का हिसाब

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newsofbihar.com डेस्क

पटना, 15 नवम्बर। आईएएस अधिकारी अमिता पाल को कौन नहीं जानता बिहार में। अमिता पाल अपने शुरूआती दिनों के अनुभवों को साझा करते हुए कहती हैं कि मुझे उस समय 1400 रुपये की तनख्वाह मिलती थी। दो महीने में 250-250 रुपये और उसके बाद भी दो महीने में 200-200 रुपये जनरल प्रोविडेंट फंड के रूप में काटे गए। आपको ये कुल 900 रुपये की रकम कम लग सकती है। मगर उस जमाने में इतने पैसे मायने रखते थे। ईमानदारी से काम करते हुए ये और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
30 दिसंबर को सेवानिवृत होने जा रहीं 1980 बैच की बिहार की आईएएस अधिकारी अमिता पाल ने अपने कार्यकाल के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड के रुपये में काटे गए कुल 900 रुपये का हिसाब-किताब नहीं मिल पाने के कारण बिहार, झारखंड और पंजाब के लेखा विभाग और वित्त विभाग के प्रधान सचिवों को पड़ताल के लिए पत्र लिखा है।
दावेदारी का आवेदन देते हुए अमिता पाल ने लिखा है कि 1986-87 के दौरान पंजाब में पोस्टिंग के दौरान चार महीने में प्रोविडेंट फंड के रूप में कुल 900 रुपए काट लिए गए थे। जिसका हिसाब नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकारों को भी निवेदन किया है कि उन 900 रुपयों का पता लगाकर ब्याज सहित उसे लौटाया जाए।
30 नवंबर को रिटायर होने वालीं अमिता पाल फिलहाल बिहार के डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी कमिश्नर के रूप में पोस्टेड हैं। उनका कहना है कि मेरी तन्ख्वाह से पैसे तो काटे गए मगर प्रोविडेंट फंड में नहीं आ सके। तीन राज्यों को लिखने के पीछे वजह ये है कि जिस दौरान 1986-87 में पैसे काटे गए थे तब वो पंजाब में पोस्टेड थीं। उस दौरान बिहार-झारखंड सय़ुक्त राज्य थे और एजी दफ्तर रांची में स्थित था। इसीलिए झारखंड को भी इसका पता लगाने के लिए लिखा है। इसके साथ ही वो खुद बिहार से हैं इसीलिए बिहार सरकार को भी बाकी दोनों राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से जांच करने और पैसे वापस करने के लिए लिखा है।

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