10, Dec, 2016
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NOB Exclusive: अपने क्लाइंट और हाई क्लास वाली सर्किल से बाहर निकलिये वित्त मंत्री जी.. एक पत्रकार का वित्त मंत्री को खुला पत्र

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साभार विजय देव झा

दरभंगा, 13 नवम्बर। हमारे आदरणीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली जी आजकल आप देश की मुद्रा व्यवस्था को संभालने और सुधारने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं और हम सामान्य जन आपके साथ झेल भी रहे हैं। मुझे आपके और प्रधानमंत्री मोदी के इस अभियान पर कोई शक नहीं है कि सरकार देश से ब्लैक मनी और नकली नोटों को पूरी तरीके से निकाल देना चाहती है। आपको कई बार यह कहते हुए सुना की पूरे देश में प्लास्टिक करेंसी चलनी चाहिए। जेटली जी आप लोग मातवर प्रकार के नेता हैं जो आज तक अपने क्लाइंट और हाई क्लास वाली सर्किल से बाहर नहीं निकले होंगे। मैं दरभंगा से हूं और दरभंगा जैसे कस्बा नुमा शहर के बारे में आपकी जानकारी है शायद इतनी ही होगी कि यहां के सांसद श्री कीर्ति आजाद हैं जिनकी कुल उपलब्धि यही है कि वह बिहार के एक सुप्रसिद्ध राजनेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र हैं जिनकी कुल उपलब्धि यही है की वह क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं। खैर जाने दीजिए हम लोग गुल्ली डंडा खेलने वाले लोग हैं। दरभंगा के बारे में आपकी इतनी ही जानकारी होगी की यहां के स्थानीय सांसद से आपकी मूँछ की लड़ाई चल रही है और बेचारे अभी पार्टी से निलंबित हैं खैर यह अलग प्रश्न है की आप मूँछ नहीं रखते और आजाद लम्बी और मोटी सी चुटिया रखते हैं।
दरअसल मैं आपको दरभंगा जैसे उपेक्षित ज़िलों में बदतर बैंकिंग व्यवस्था के हालात के बारे में बताना चाह रहा था। आज पूरे देश की जनता या तो बैंक के बाहर या फिर एटीएम के बाहर कतार में खड़ी है अच्छी बात है की राजनीति ही सही कुछ बड़े नेता भी पैसे बदलवाने के लिए लाइन में खड़े दिखे. हमारे लिए यह कोई नई कहानी नहीं है हम दरभंगा वाले पिछले कई सालों से ऐसे ही बैंक के सामने खड़े होते हैं ऐसे ही एटीएम की दर बदर की ठोकरें खाते हैं जेटली जी पिछले साल की बात है दिसंबर का महीना था मेरे बेटे श्रीश का जन्म हुआ था। जन्म लेते ही श्रीश हॉस्पिटल में धरने पर बैठ गया उसके इलाज के लिए मुझे पैसे की जरूरत थी और पैसा मेरे अकाउंट में था। उस दोपहर मैं अपने भतीजे प्रशांत के साथ घर से पैसे निकालने के लिए निकला हम लोग पैदल ही चले क्योंकि मेरे पास गाड़ी नहीं थी हमने कोई रिक्शा भी नहीं किया क्योंकि हमें आशंका थी की एटीएम से पैसे निकालने के चक्कर में शायद पूरे शहर की परिक्रमा करनी पड़े पहला एटीएम मेरे घर से 2 किलोमीटर दूर था जहां पर 200 लोगों की भीड़ पहले ही जमा थी जब तक मेरी बारी आती एटीएम कंगाल हो चुका था उसके पास मुझे देने के लिए एक ढेला तक नहीं बचा था. और फिर यहां से पैसे की खोज की मेरी यात्रा आगे बढ़ी। दरभंगा में कहने के लिए कोई 50 एटीएम होंगे लेकिन यह सिर्फ नाम के हैं जो पिछले कई सालों से खराब पड़े हैं जिनकी ना चिदंबरम ने और ना ही आपने कभी कोई सुध ली।
मैं 50 एटीएम से निराश लौट चुका था और हम लोग तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय कर चुके थे। हम लोग दरभंगा बस स्टैंड से कुछ ही किलोमीटर दूर थे जब प्रशांत ने खीजते हुए मुझे कहा कि काका इधर-उधर भटकने से बेहतर यह होगा कि हम लोग बस पकड़ कर पटना ही चल चलें वहां तो पैसा मिल ही जाएगा। खैर शायद भगवान मेरी परीक्षा ले रहे थे मुझे एक एटीएम मिल गया जहाँ पैसा उपलब्ध था। ईश्वर ने मेरी सुन ली। जेटलीजी जब आज एक अप्रत्याशित स्थिति आ गयी है तब भी दरभंगा के बैंक और बैंकिंग व्यवस्था उससे अधिक चौपट्ट है। आज के तारीख में भी एक दो से अधिक एटीएम नहीं चल रहे हैं। जबकि पिछले 3 दिनों में पूरा देश अर्थशास्त्र की तरह ज्ञान दे रहा है मैं स्पष्ट कर दूं की मैं अर्थशास्त्र का जानकार नहीं हूँ। संभव है कि मैं महान अर्थशास्त्री माल्थस के नाम का सही है स्पेलिंग भी नहीं लिख पाऊँ। जेटली जी यह आपका विषय है और मैं इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूं।
आप बड़े लोग हैं आप देश चलाते हैं आप क्यों चिल्लर और खुदरा के हिसाब किताब के झमेले में पड़े। लेकिन हमें तो पड़ना पड़ेगा। घर कैसे चलेगा घर के छोटे बच्चों को कैसे समझाएंगे की तुम्हारी जरूरत को पूरा करने के लिए घर में इसलिए पैसे नहीं है क्योंकि जेटली जी और मोदी जी देश में मौद्रिक सुधार कर रहे हैं। उस घर का क्या जहां पर बेटियों की शादी तय है उसका क्या जिनके पास बैंक अकाउंट नहीं है उस मजदूर का क्या करेंगे जिसे दिहारी नहीं मिल रही है। उन लोगों के लिए एक सजा है। अभी तक लोग आपके कदम का समर्थन कर रहे हैं। आरामतलबी और लापरवाही के लिए मशहूर सरकारी बैंक के कर्मचारी और हाकिम की तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं। लेकिन अगर आप यह समझ रहे हैं की यह भावना और उफान खाली पेट और रोजमर्रा के हो रही परेशानियों के बीच भी कायम रहेगा तो आप गलत हैं। महराज इस देश के ऋषि मुनि सदियों पहले लिख कर गए की भूखे भजन न होई गोपाला। जेटलीजी भारत की जनता एक अबूझ पहेली है जिसे समझने में ब्रह्मा के भी पसीने छूट जाएँ। यह देश महात्मा गाँधी और शास्त्रीजी के समय से काफी आगे निकल चुका है। सो जिस जनता ने 2014 में आपको “इहा आगच्छ: इह तिस्ठत:” कह सत्ता सौंपी थी वह आपको स्वस्थानंम गच्छ कहते देर नहीं लगाएगी।

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