10, Dec, 2016
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बिहारी पत्रकार के ‘मन की बात’ ने उड़ा दिए पी एम के होश; राजकमल झा का स्पीच सोशल मीडिया में वायरल

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निखिल कुमार की प्रस्तुति

पटना, 04 नवम्बर। पत्रकारिता का मूल विचार क्या है? अगर आप मुझसे पूछें तो मैं कहूँगा कि पार्टी निरपेक्षता और सत्ता के विरुद्ध जनता के हितों के लिए संघर्ष करना पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है। एक पत्रकार का काम क्या है? सरकार की पीठ थपथपाना? अपनी पीठ तो सरकारें खुद थपथपाती आई हैं फिर पत्रकार क्या करे? इतनी भूमिका इसलिए बाँध रहा हूँ मैं क्यूंकि मेरा यह मानना है की हमारा काम सरकार और सत्ता को उसके दायित्वों की याद दिलाना है।

नई दिल्ली में बुधवार को पत्रकारिता के रामनाथ गोयनका पुरस्कार बांटे गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीफ गेस्ट थे और उन्हें अपने हाथों से कुछ पत्रकारों को उनकी बीजेपी विरोधी रिपोर्टों के लिए अवॉर्ड देना पड़ा।
पत्रकार और लेखक अक्षय मुकुल को भी अवॉर्ड मिलना था, लेकिन वो नहीं पहुंचे। उन्होंने इस प्रोग्राम का बायकॉट ये कहते हुए पहले ही कर दिया था कि मैं खुद को नरेंद्र मोदी के साथ एक फ्रेम में नहीं देख सकता।
पत्रकार अक्षय मुकुल का अवार्ड समारोह में शामिल नहीं होना चर्चा का विषय तो जरुर बना लेकिन इस प्रोग्राम का सबसे यादगार पल था, प्रोग्राम के अंत में आभार व्यक्त करते हुए अख़बार ‘द इन्डियन एक्सप्रेस’ के एडिटर राजकमल झा की कही दो चार बातें। राजकमल झा ने बहिष्कार के बजाय संवाद का रास्ता चुना और प्रधानमंत्री के सामने अपनी बातों को निर्भय होकर रखा।
पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रोग्राम के अंत में, प्रधानमंत्री के बोलने के ठीक बाद, राजकमल झा आभार जताने आये थे। उन्होंने अंग्रेजी में अपनी बातों को रखा। हम राजकमल झा की बातों का हिंदी अनुवाद आपके समक्ष रख रहे हैं। जब एक पत्रकार की हैसियत का अंदाजा इस बात से लगाया जाए कि वह कितने मंत्रियों के संपर्क में है, ऐसे में राजकमल झा की कही बातें एक पत्रकार को पत्रकारिता धर्म की याद दिलाएगा। इसलिए उनके द्वारा कही गई बातों को बार बार पढ़ा जाये।

राजकमल झा के स्पीच का हिंदी अनुवाद

बहुत बहुत शुक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।

आपकी ‘स्पीच’ के बाद हम ‘स्पीचलेस’ हैं। लेकिन मुझे आभार के साथ कुछ बातें कहनी हैं।

आपके शब्दों के लिए बहुत आभार। आपका यहां होना एक मज़बूत संदेश है। हम उम्मीद करते हैं कि अच्छी पत्रकारिता उस काम से तय की जाएगी जिसे आज शाम सम्मानित किया जा रहा है, जिसे रिपोर्टर्स ने किया है, जिसे एडिटर्स ने किया है।

अच्छी पत्रकारिता ‘सेल्फी पत्रकार’ नहीं तय करेंगे जो आजकल कुछ ज़्यादा ही दिखते हैं और जो अपने विचारों और चेहरे से खुद अभिभूत रहते हैं और कैमरे का मुंह हमेशा अपनी तरफ रखते हैं। उनके लिए सिर्फ एक ही चीज़ मायने रखती है, उनकी आवाज़ और उनका चेहरा। इसके अलावा सब कुछ पृष्ठभूमि में है, जैसे कोई बेमतलब का शोर। इस सेल्फी पत्रकारिता में अगर आपके पास तथ्य नहीं हैं तो कोई बात नहीं, फ्रेम में बस झंडा रखिये और उसके पीछे छुप जाइये।

शुक्रिया सर कि आपने विश्वसनीयता की बात कही। ये बहुत ज़रूरी बात है जो हम पत्रकार आपके भाषण से सीख सकते हैं। आपने पत्रकारों के बारे में कुछ अच्छी-अच्छी बातें कहीं जिससे हम थोड़े नर्वस भी हैं।

आपको ये विकिपीडिया पर नहीं मिलेगा, लेकिन मैं इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर की हैसियत से कह सकता हूं कि रामनाथ गोयनका ने एक रिपोर्टर को नौकरी से निकाल दिया था, जब उनसे एक राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा था कि आपका रिपोर्टर बड़ा अच्छा काम कर रहा है।

इस साल मैं 50 का हो रहा हूं और मैं कह सकता हूं कि इस वक़्त जब हमारे पास ऐसे पत्रकार हैं जो रिट्वीट और लाइक के ज़माने में जवान हो रहे हैं, जिन्हें पता नहीं है कि सरकार की तरफ से की गई आलोचना हमारे लिए इज़्ज़त की बात है। हम जब भी किसी पत्रकार की तारीफ सुनें तो हमें फिल्मों में स्मोकिंग सीन्स की तर्ज पर एक पट्टी चला देनी चाहिए कि सरकार की तरफ आई आलोचना पत्रकारिता के लिए शानदार खबर है। मुझे लगता है कि ये पत्रकारिता के लिए बहुत बहुत जरूरी है।

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2 विचार साझा हुआ “बिहारी पत्रकार के ‘मन की बात’ ने उड़ा दिए पी एम के होश; राजकमल झा का स्पीच सोशल मीडिया में वायरल” पर

  1. Keshav kumar jha November 4, 2016

    बहुत अच्छा आखिर पञकार कहा के है

  2. कुमार आशुतोष राजेश November 4, 2016

    राज कमल झा जी को धन्यवाद एक बिहारी सब पर भारी को चरितार्थ किया ढाई साल बीत गया ढाई साल बॉकी है मोदी जी जनता शीर्ष पर चढाती है जनता ही गर्त में पहुॅचाती है

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