22 अगस्त, 2017
To Advertise on this Website call Us on 9155705448, 8130906081
ब्रेकिंग न्यूज़

NEWS OF BIHAR

कव्वाली वो भी संस्कृत में ! बिहार के एक शिक्षक ने रच दिया संस्कृत में कव्वाली, आप भी सुनिए

img-20161124-wa0022

पंकज प्रसून की रिपोर्ट

दिल्ली, 25 नवंबर। कव्वाली तो आप सबने खूब सुनी होगी लेकिन आज हम एक ऐसे कव्वाली के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में ना तो आपने सुना होगा और शायद आपकी कल्पना से भी परे हो। जी हां, संस्कृत भाषा में कव्वाली की कल्पना को साकार कर के दिखाया है बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले कृष्ण कांत ठाकुर और उनकी टीम ने। कृष्ण कांत ठाकुर दिल्ली के साकेत इलाके के बिरला विद्या निकेतन में शिक्षक हैं और संगीत से उनको खासा लगाव है। कृष्ण कांत ठाकुर और उनके दो सहयोगी पीके ठाकर, सरोज मोहंती ने संस्कृत में खास कव्वाली की रचना की है। दरअसल दिल्ली संस्कृत अकादमी की तरफ से आयोजित होने जा रही प्रतियोगिता में बिरला विद्या निकेतन स्कूल के छात्रों की टीम को भी शामिल होना था। कृष्ण कांत ठाकुर और उनके सहयोगियों ने आपस में मिलकर तय किया कि इस बार की प्रतियोगिता में कुछ हटकर प्रस्तुति की जाए और ऐसे में उन सबों ने मिलकर संस्कृत में कव्वाली की रचना की। जिस किसी ने भी संस्कृत वाली कव्वाली के बारे में सुना सब चौंक गए। फिर शुरू हुआ बच्चों को प्रैक्टिस कराने का दौर…शुरू शुरू में बच्चों को मुश्किलों का सामना तो जरूर करना पड़ा लेकिन वो कहते हैं ना कि “करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रसरी आवत गांठ पर, सिल पर पड़त निशान”। निरंतर अभ्यास की बदौलत बिरला विद्या निकेतन के बच्चे संस्कृत कव्वाली में निपुण हो गए।

आप भी देखिए और संस्कृत भाषा में रचित इस कव्वाली का लुत्फ उठाइये। स्कूल में अभ्यास के दौरान ली गई इस वीडियो को कृष्ण कांत ठाकुर ने फेसबुक पर शेयर भी किया है।

ये भी पढे़ं:-   छात्रों की संख्या लाखों में और शिक्षकों की संख्या उस अनुपात में नगण्य, कैसे पढेंगे छात्र?

newsofbihar.com की ख़बरें अपने न्यूज़फीड में पढ़ने के लिए पेज like करें

loading...

अपने विचार साझा करें

आवश्यक लिखें चिह्नित:*

Powered By Indic IME