25 अप्रैल, 2017
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सुशासन बाबू… 12 वर्षों से विस्थापित बाढ़ पीड़ितों को आज भी है मुआवजे का इंतजार !

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मो. सरफराज सिद्धकी की रिपोर्ट

मधुबनी, 08 सितम्बर : एक एक कर 12 वर्ष गुजर गये। बिहार के मधुबनी जिले अंतर्गत झंझारपुर अनुमण्डल के भदुआर गांव के लोगों की आंखों में बाढ़ की त्रासदी का नजारा आज भी ताजा है। वर्ष 2004 में 9 जूलाई की रात कमला नदी के कहर ने 62 घरों को पलक झपकते लील गई थी। इन घरों की जगह बना तालाब आज भी उसी प्रकार है। भदुआर के महावीर महतो के 9 कमरों का नया भवन हो अथवा रामेश्वर महतो का भव्य पक्के का मकान हो या 15 परिवार वाला ठाकुर टोला। सभी फुस के घरों के साथ ही पानी में विलीन हो गये। प्रशासन ने सूची बनाई। भदुआर के 42 परिवार एवं हरना के 20 परिवारों को मिलाकर कुल 62 परिवारों की सूची बनी। इनको सरकार द्वारा फिर से बसाने का आश्वासन दिया गया। जो 12 साल बाद भी छलावा है।
करीब 60 वर्ष पहले कमला बलान के किनारे एक पूरा गांव विस्थापित हुआ था। यही विस्थापित लोग भदुआर गांव के नाम से दुबारा बसे। वर्ष 1987 एवं 2004 की प्रलंयकारी बाढ़ में पुनः विस्थापित हुए लोगों को दुबारा बसाया ना जा सका। कई ऐसे परिवार जिनको दुसरी जगह घर बनाने को जमीन न था वे गांव छोड़ कर चले गये। कई परिवार आज भी बांध किनारे झोपड़ी में रह कर सरकार द्वारा दुबारा बसाये जाने की आस लगाये हुए हैं। राम कुमारी देवी, मुर्ती देवी, राम सती देवी, फुल दाय देवी, भेलो महतो, मनधन ठाकुर, कुमर ठाकुर, राम चलित्र ठाकुर, हरे राम महतो,, सुपीन्द्र ठाकुर, राजेन्द्र ठाकुर, संजू देवी, बिना देवी, आदि कई ऐसे नाम हैं जिन के परिवार की आंखे इन्तिजार में पथरायी जा रही है। हरना के मो. उसमान जिनके पिता 1987 के बाढ़ में एवं मां जूवेदा 2004 के बाढ़ में बह गई। ऐसे लोग भी आज तक मुआवजा एवं विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। दुसरी तरफ गांव में घर बह जाने के बाद राहत नहीं मिलने पर फाका कशी की जीवन गुजार रहे कई ऐसे परिवार हैं जो गांव से पलायन कर चूके हें। इनमें महावीर महतो, मो0 ईकबाल, मो0 अकरम, वैद्यनाथ पण्डीत मो0 नूर हसन आदि शामिल हैं। इनकी डीह पर 2004 से ही लगभग 40 फीट पानी जमां हुआ है। इन आठ वर्षों में यहां की निवासीयों की आंसु पोछ ने कई नामी गिरामी हस्ति आये। नर्मदा बचाव आनदोलन की नेत्री मेघा पाटेकर भी भदुआर व हरना के विस्थापितों का दर्द अपनी आंखों से देख चुके हें। विभिन्न राज नितीक दलों से जूड़े कई बड़े नेता का आना भी इन विस्थापितों का दर्द नहीं झेल सके हैं। 9 जूलाई की तारीख फिर लोगों को 2004 की याद दिला रही है। लेकिन इस वार फीर पानी कमला नदी में उफान मचा रही है। लोग रात-रात भर जागकर गुजार रहे हैं। नदी में रैन कट होनेसे टतबंध में सटता जा रहा है जिससे भदुआर व हरना के लोग में दहश्त है। वर्ष 2004 में कमला नदीं लगभग एक किलोमीटर दूर थी मगर अब मात्र 100 मीटर की दूरी पर बह रही है। 2004 में जिस जगह बांध टुटी थी उस जगह बांध बन जाने के बाद भी बांध में दरार दिखती है। जिससे लोगों को डर है कि बांध पर पानी का दबाव होने से बांध टुट सकता है।

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