बिहार के एक बच्चे ने आकाशवाणी के लाइव प्रसारण में कहा था – ‘गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है’

Advertisement

न्यूज़ डेस्क : जी हां। बिहार के पटना आकाशवाणी पर लाइव कार्यक्रम में एक बच्चे की कविता ने देश भर में बवाल मचा दिया था। 1984 में देश में हुए आम चुनाव पूरी तरह इंदिरा सहानूभूति लहर के आगोश में थे। कांग्रेस ने इन चुनावों में अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की थी पार्टी को देशभर में 543 लोकसभा सीटों में से 401 सीटें मिली थीं। इस सरकार में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें थे। अब तक के सबसे अधिक सीटों पर विजयी प्राप्त करने के बाद केंद्र की कुर्सी तक पंहुचे राजीव गांधी की सरकार ने मार्च 1986 में स्वीडन की एबी बोफोर्स से 400 होबित्जर तोपें खरीदने का करार किया। जो की बाद में घोटाले के रूप में सामने आया। जिसनें देश की राजनीति में खलबली मचा दी थी। बोफोर्स घोटाले ने आम जनमानस के ऊपर इस कदर असर डाला कि देश भर में गांवो, कस्बों और शहरों की दीवारों पर इससे जुड़े नारे लिखे जा रहे थे।

यह वह दौर था जब देश में बोफोर्स सौदे को लेकर का़फी बहसें और शंकाएं खड़ी कर दी गई थी। इस घोटाले ने किस कदर राजीव गांधी की प्रतिष्ठा को चौपट किया था इसका जिक्र बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार शशिधर खान की लिखी हुई ‘इरोम शर्मिला और आमरण अनशन’ किताब में मिलता है।

शशिधर खान बताते हैं कि आकाशवाणी पटना के बच्चों के कार्यक्रम में एक बच्चे को कविता सुनाने के लिए कहा गया। बच्चे ने लाइव प्रसारण में सड़कों पर नारेबाजी वाली एक कविता सुना दी, ‘गली-गली में शोर हैं, राजीव गांधी चोर है’। कविता का सीधा प्रसारण हो गया। जिसकी गाज शाम होते होते आकाशवाणी के निदेशक पर गिरी। क्योंकि उनके संभलने से पहले कविता प्रसारित हो चुकी थी। साथ ही उस समय मध्य प्रदेश के सागर यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता का कोर्स पढ़ाने वाले प्रो. महात्रे भी इसके लपेटे में आये। प्रो. महात्रे ने परीक्षा के पर्चे में यह प्रश्न डाल दिया कि ‘गली-गाली में शोर है, राजीव गांधी चोर है’ पंक्ति आकाशवाणी के किस केंद्र से प्रसारित हुई थी। उस समय केंद्र व राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। इसका खामियाजा प्रोफेसर साहब को भुगतना पड़ा। पुलिस के देखरेख में उस सवाल के जवाब में बवाल मच गया। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रो. महात्रे को खींचकर बाहर निकाला, उनके चेहरे पर कालिख पोती और गधे पर बिठाकर सड़क पर घुमाया। इनमें छात्र व शिक्षक भी शामिल थे। कहा जाता है कि इस कविता के बाद बवाल इतना बढ़ गया था कि कविता पढ़ने वाले बच्चे के परिजनों को अपना पता भी बदलना पड़ा। देश भर में यह चर्चा का विषय बन गया था।

आने वाले समय में इस घोटाले ने देश के इतिहास की सबसे मजबूत सरकार की 1989 के लोकसभा चुनाव में बलि ले ली और कभी ‘मिस्टर क्लीन’ के नाम से पुकारे जाने वाले प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ऊपर भी इस घोटाले की कालिख के तमाम छींटे पड़े। इस घोटाले ने सियासत के एक नए सितारे वीपी सिंह को जन्म दिया जिन्होंने इस मुद्दे पर पूरे देश में अभियान चलाया और अंत में प्रधानमंत्री की कुर्सी तक जा पहुंचे।

मालूम हो कि बोफोर्स तोपों की खरीद में दलाली का खुलासा अप्रैल 1987 में स्वीडन रेडियो ने किया था। रेडियो के मुताबिक बोफोर्स कंपनी ने 1437 करोड़ रुपए का सौदा हासिल करने के लिए भारत के बड़े राजनेताओं और सेना के अधिकारियों को रिश्वत दी थी। 1989 के लोकसभा चुनाव का ये मुख्य मुद्दा था जिसने राजीव गांधी को सत्ता से बाहर कर दिया और वीपी सिंह राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के प्रधानमंत्री बने थे।