10, Dec, 2016
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Big Breaking: उनके 87 दोस्तों के पास है देश का 85 हजार करोड़ रुपयाः मीसा भारती

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newsofbihar.com डेस्क

पटना, 16 नवम्बर। नोट बैन को लेकर देश भर के नेताओं और पार्टियों के अलग-अलग बयान आ रहे हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प बयान दिया है बिहार से राज्यसभा सांसद और राजद नेत्री मीसा भर्ती ने।

मीसा का बयान ” केवल 87 लोग दबाए बैठे हैं देश के 85 हज़ार करोड़। सुप्रीम कोर्ट के लताड़ के बाद भी सरकार जानबूझकर सोयी हुई है और अगर 100 करोड़ के ऊपर के डिफाल्टर की बात की जाए तो यह संख्या लाख के ऊपर है और कोई भ्रम मत पालिए कि इस नोटबंदी से इनका कुछ भी बिगड़ेगा।” मीसा ने अपने फेसबुक टाइमलाइन पर केंद्र सरकार के 500 और 1000 के नोटबंदी के फैसले पर निशाना साधा है। मीसा अपने फेसबुक टाइमलाइन पर लिखती हैं “आज गरीब और ईमानदार अपने जो पैसे बैंकों में जमा कर रहे हैं, उन्हीं पैसों को मोदी सरकार न्यूनतम ब्याज पर अपने उद्योगपति मित्रों को बांट देगी ताकि वे और धनी बन सकें और चुनावों में खर्च करने के लिए और पैसे दें। इनमें से अधिकतर लेनदार उद्योगपति या तो हमेशा के लिए डिफॉल्टर बन जाएंगे या फिर मोदी सरकार ही उनके ऋण माफ़ कर देगी”। मीसा भारती के पोस्ट के बाद फेसबुक पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

वहीँ सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से उन लोगों के बारे में जानकारी मांगी थी जिन पर 500 करोड़ रुपए अधिक का बैंक लोन बकाया है। जानकारी में यह बात निकलकर आई है कि केवल 87 लोगों पर पब्लिक सेक्टर बैंक का 85 हजार करोड़ रुपया बकाया है। भारत के चीफ जस्टिस टी. एस. ठाकुर ने आरबीआई द्वारा सौंपी गई बकायदारों की एक लिस्ट पढ़ने के बाद यह खुलासा किया कि ऐसे 87 लोग हैं जिनपर बैंकों के 500 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है, इस तरह इन लोगों पर कुल 85 हजार करोड़ रुपए बकाया है। पीठ ने कहा कि हमने 500 करोड़ रुपए से अधिक के कर्जदारों की सूची मांगी थी तो यह आंकड़ा सामने आया है। अगर हमने इससे नीचे के कर्जदारों की सूची मांगी होती तो यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए से अधिक होता।

इस संबंध में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से इन लोगों के नाम सार्वजनिक करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई को बैंको के लिए नहीं, बल्कि देश की भलाई के लिए काम करना चाहिए और इन सबसे बड़े बकायदारों के नाम समाने लाने चाहिए। टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, “इस अमाउंट को देखिए, अगर हमने 100 करोड़ रुपए बकाया वालों की लिस्ट मांगी होती तो यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ के पार होता। क्यों ना हमें इन डिफॉल्टर्स के नाम पब्लिक कर देने चाहिए? आरबीआई हर साल जानबूझकर बैंक लोन पचाने वालों की सूची जारी करता है। इससे फर्क नहीं पड़ता है कि इन लोगों ने जानबूझ कर बैंक लोन बचाया है या नहीं, हकीकत यह है कि इन पर 500 करोड़ रुपए से अधिक बैंक लोन नहीं चुकता किया है और लोगों को इनके नाम जानने का हक है।”
वहीं आरबीआई ने डिफॉल्टर के नाम सार्वजनिक करने का विरोध किया। आरबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि कानून के तहत गोपनीयता का प्रावधान है, जो नाम सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं देता। इस दलील पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कैसी गोपनीयता। किसी ने बैंक से कर्ज लिया लेकिन उसे नहीं चुकाया। ऐसे लोगों के नामों को सार्वजनिक करने से आरबीआई को क्या फर्क पड़ेगा। इससे तो उन लोगों की साख खराब होगी, जिन्होंने कर्ज नहीं चुकाया।

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