10, Dec, 2016
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हो मोदी जी, कैसे होई बाबूजी के श्राद्ध? एक बेटे का प्रधानमंत्री से प्रश्न

jahanabad

पंकज कुमार की रिपोर्ट

जहानाबाद, 11 नवम्बर। 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले का पुरे देश ने स्वागत किया है। इस कदम से कितना कालाधन सरकार के पास आएगा यह तो समय के साथ देश की जनता को पता चल जाएगा लेकिन इसका साइड-इफेक्ट अभी से लोगों को दिख रहा है। हम बात कर रहे हैं जहानाबाद की जहाँ एक बेटे को अपने बाप का श्राद्धकर्म करना महंगा पड़ा रहा है।
हजहानाबाद के अमीरगंज गाँव के रहने वाले रामाशीष यादव का निधन होने के बाद उनके पुत्र रामदेव यादव को 500 और 1000 के नोट से सामान देने से दूकानदार गुरेज कर रहे हैं। ऐसे में श्राद्ध पर संकट मंडराने से मृतक के परिजन चिंतित हैं। वहीं मृतक के पुत्र रामदेव यादव ने बताया कि 11 नवम्बर को दशमकर्म और 13 नवम्बर को श्राद्ध है पर परिवार के पास 500 एवं 1000 के नोट है और कोई दुकानदार समान देने को तैयार नहीं है। ऐसे स्थिति में श्राद्धकर्म के सामान की खरीदारी नहीं हो पाई है। बैंक भी महज़ 4000 रुपये ही बदल कर दे रहे हैं। जबकि श्राद्ध-कर्म में लगभग 50 हज़ार से ऊपर का खर्च आ रहा है।
ऐसे में बेटे के साथ पूरा गाँव मृतक रामाशीष यादव के श्रद्धाकर्म को लेकर चिंतित है। गाँव के लोगों ने बताया की परिजन के पास सिर्फ पांच सौ एवं एक हज़ार रुपये के नोट हैं मगर कोई दुकानदार उन्हें समान देने को तैयार नहीं है। उधार भी देने से दूकानदार इंकार कर रहे हैं। अब सवाल यह उठता है की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा 500 एवं 1000 के नोट बंद कर दिए जाने से भले ही कालाधन का पता चल सके मगर रामदेव यादव के पिता का श्राद्धकर्म तो तत्काल बाधित होता नज़र आ रहा है।

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