25 अप्रैल, 2017
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शराबबंदी पर लिखी कविता सुनेंगे नीतीश कुमार, 14 नवम्बर को है शराबबंदी पर जनसंवाद कार्यक्रम

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newsofbihar.com डेस्क

पटना, 12 नवम्बर। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव में किये अपने शराबबंदी के वादे को पूरा करते हुए सूबे में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू किया। लेकिन इस कड़े कानून को लेकर कई लोगों ने अपनी आपत्ति जताई थी। लोगों से मिले फीडबैक के बाद नीतीश कुमार जलील मस्तान से मिले थे और कड़े कानून में सुधर के लिए विकल्प के रूप में लोगों से सुझाव माँगा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि जिनके पास भी कोई और विकल्प हो, वो अपने सुझाव राज्य सरकार को भेज सकते हैं। इस सिलसिले में उत्पाद विभाग को अबतक 1100 सुझाव मिल चुके हैं। सुझाव देने वाले पचास लोगों से नीतीश कुमार 14 नवम्बर को मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित संवाद कक्ष में जनसंवाद कार्यक्रम कर लोगों के सुझाव पर विचार विमर्श करेंगे। 14 नवम्बर के इस कार्यक्रम में लोग मुख्यमंत्री को यह बताएँगे कि शराबबंदी से जुड़े पाव्धान खासकर नए शराबबंदी कानून के सजा के प्रावधानों के सम्बन्ध में उनकी क्या राय है।
सूबे में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री सीधे-सीधे इस कानून का फीडबैक जनता से लेंगे। वहीं सरकारी महकमे में इस बात की चर्चा है कि इस जनसंवाद कार्यक्रम के बाद सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जा सकती है। शराबबंदी कानून के संबंध में लोगों से सुझाव मंगाने की प्रक्रिया एक नवंबर को विधिवत शुरू हुई थी। बारह नवंबर को सुझाव दिए जाने की आखिरी तारीख है। आधिकारिक तौर पर यह बताया कि ग्यारह नवंबर की शाम तक ईमेल से 511 लोगों ने सुझाव दिए थे. डाक से 21 लोगों और 542 लोगों ने एसएमएस के माध्यम से अपने सुझाव दिए हैं।
इन सुझावों में 55 प्रतिशत लोगों के पत्र ऐसे हैं जो सलाह से संबंधित हैं। शेष लोगों ने विषय से हटकर अपनी बात कही है। जिन पचास लोगों को मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम में बुलाया जाना है, उन्हें आमंत्रित किया जा चुका है। सुझाव भेजने वाले लोगों में बहुतों ने इस बिंदु पर लिखा है कि घर में शराब पकड़े जाने पर अठारह वर्ष से कम उम्र के किशोरों पर कोई कार्रवाई न हो। एक ने लिखा है कि दवा के रूप में शराब के प्रयोग की छूट मिलनी चाहिए। एक ने अपने सुझाव में यहां तक कह डाला कि जब देश में इस तरह की शराबबंदी का कानून नहीं है तो फिर आप बिहार में इसे क्यों लागू कर रहे हैं। महिलाओं ने भी ईमेल से अपने सुझाव भेजे हैं। शराबबंदी के पक्ष में आज एक कविता भी मिली।

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