24 अगस्त, 2017
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नवरात्रा विशेष : आज होगी देवी के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा

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स्कंदमाता ममतामयी मां का रुप हैं। ये भगवान कार्तिकेय को गोदी में लिए हुए हैं। इसलिए इनकी पूजा से भगवान कार्तिकेय की भी पूजा हो जाती है। स्कंदमाता की विधि विधान से पूजा करने से संतानहीनों को संतान की प्राप्ति हो जाती है। मनोकामना मां स्कंदमाता की पूजा पवित्र और एकाग्र मन से करनी चाहिए। स्कंदमाता की उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। मां स्कंदमाता शेर पर सवार रहती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है।

1.शास्त्रों के अनुसार स्कंदमाता की कृपा से संतान के इच्छुक दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त हो सकता है।
2.अगर बृहस्पति कमजोर हो तो स्कंदमाता की पूजा आराधना करनी चाहिए।
3.स्कंदमाता की विधि विधान से की गई पूजा से कलह-कलेश दूर हो जाते हैं। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है।

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