30 मई, 2017
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आप भी पढ़ें सामा-चकेवा विशेष… वृंदावन में आग लगले कियो ने बुझावे हे !

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सामा चकेवा बिहार में मैथिली भाषी लोगों का यह एक प्रसिद्ध त्यौहार है। भाई – बहन के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध को दर्शाने वाला यह त्यौहार नवम्बर माह के शुरू होने के साथ मनाया जाता है। इसका वर्णन पुरानों में भी मिला है। सामा – चकेवा एक कहानी है कहते हैं की सामा कृष्ण की पुत्री थी जिन पर अबैध सम्बन्ध का गलत आरोप लगाया गया था। जिसके कारण सामा के पिता कृष्ण ने गुस्से में आकर उन्हें मनुष्य से पक्षी बन जाने की सजा दे दी। लेकिन अपने भाई चकेवा के प्रेम और त्याग के कारण वह पुनः पक्षी से मनुष्य के रूप में आ गयी।

कार्तिक पूर्णिमा तक सामा चकेबा के सुमधुर गीतों से इलाके का चप्पा-चप्पा गूंजने लगा है। इस पर्व में महिलाओं और युवतियों में उत्साह देखा जा रहा है। क्षेत्र के विभिन्न गावों की बहनें अपने भाईयों के दीर्घ एवं सुखमय जीवन की मंगलकामना के साथ इसे मना रही हैं। शाम ढ़लने के बाद बहनें सामा चकेबा, सतभईया, चुगला, वृंदावन, चैकीदार, झाझी कुकुर, आदि की मूर्तिया बास की बनी चंगेली में रखती हैं। इसके बाद जोते हुए खेतों में जुटकर पारंपरिक सामा चकेवा के गीत गाती हैं। वहीं खर से निर्मित वृंदावन में आग लगाने और बुझाने की रश्म अदा की जाती है। इस दौरान महिलाएं और युवतिया पूरे उत्साह में इन रस्मों की अदायगी के बाद देर रात सामा चकेबा की मूर्ति का विशेष रूप से श्रृंगार करती हैं वहीं उसके खाने के लिए हरे-हरे धान की बालिया दी जाती हैं और रात्रि में इसे खुले आकाश में छोड़ दिया जाता है। पर्व के समापन के दिन भाई बजरी खाते हुए बहन के सभी कष्टों को दूर करने का संकल्प लेता हैं। भाई द्वारा तोड़ी गई प्रतिमा को नदी,तालाब या किसी जलाशय में विसर्जन के साथ ही इसका समापन हो जाता है।

क्या है कहानी इस पर्व की
सामा-चकेवा के उत्सव का सम्बन्ध सामा की दुःख भरी कहानी से है द्य सामा कृष्ण की पुत्री थी द्यजिसका बर्णन पुरानों में भी किया गया है द्य कहानी यह है कि एक दुष्ट चरित्र बाला व्यक्ति ने एक योजना रची द्य उसने सामा पर गलत आरोप लगाया कि उसका अबैध सम्बन्ध एक तपस्वी से है द्य उसने कृष्ण से यह बात कह दिया द्य कृष्ण को अपनी पुत्री सामा के प्रति बहुत ही गुस्सा हुआ द्य क्रोध में आकर उसने सामा को पक्षी बन जाने का श्राप दे दिया द्य सामा अब मनुष्य से पक्षी बन गयी द्य

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जब सामा के भाई चकेवा को इस प्रकरण की पुरी जानकारी हुई तो उसे अपनी बहन सामा के प्रति सहानुभूति हुई द्य अपनी बहन को पक्षी से मनुष्य रूप में लाने के लिए चकेवा ने तपस्या करना शुरू कर दिया द्य तपस्या सफल हुआ द्यसामा पक्षी रूप से पुनः मनुष्य के रूप में आ गयी द्यअपने भाई की स्नेह और त्याग देख कर सामा द्रवित हो गयी द्यवह अपने भाई की कलाई में एक मजबूत धागा राखी के रूप में बाँध दी द्यउसी के याद में आज बहनें अपनी भाइयों की कलाई में प्रति वर्ष बांधती आ रही हैं।

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