अब गरीब देश नही रहा भारत, हर मिनट इतने लोग आ रहे गरीबी रेखा से ऊपर, जानिए

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नई दिल्ली । एक आओर जहां विरोधी दाल मोदी सरकार पर वादे पूरे न करने और जुमलेबाजी का आरोप लगकार्र 2019 चुनाव से पहले उन्हें घेरने की कोसिस में लगी है तो वही ऐसे हिं समय में मोदी के लिए एक सुकून भारी खबर आई है।

खबर सिर्फ मोदी सरकार के लिए हिं नही बल्कि देश के लिए भी अछि है। जानकारी के अनुसार अब भारत गरीब देश नही रहा है। जी है ,ये सच है, इस बात का दावा अमेरिकी शोध संस्था की ओर से किया गया है। इससे संस्था की और से भारत में गरीबी को लेकर जारी ताजा आंकड़े मोदी सरकार और देश दोनो के लिए शुकुन देने वाले हैं। संस्था ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले कुछ साल में भारत में गरीबों की संख्या बेहद तेजी से घट रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है की सबसे अच्छी बात ये ही की भारत अब सबसे गरीब देशों की श्रेणी से बाहर निकल चुका है। रिपोर्ट की मने तो भारत में हर मिनट 44 लोग गरीबी रेखा के ऊपर निकल रहे हैं। ये भी कहा गया है की यह दुनिया में गरीबी घटने की सबसे तेज दर है।

इससे रिपोर्ट को अमेरिकी शोध संस्था ब्रूकिंग्स के ब्लॉग, फ्यूचर डेवलपमेंट में जारी किया है।. रिपोर्ट में दावा किया गया है की के 2022 तक भारत में 03 फीसदी से कम लोग ही गरीबी रेखा के नीचे बाख जाएंगे। वहीं 2030 तक बेहद गरीबी में जीने वाले लोगों की संख्या देश मेें न के बराबर रहेगी। आपको बात दे की इस रिपोर्ट को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित किया गया है।

सबसे अधिक गरीबी नाइजीरिया में 
रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोगों की संख्या नाइजीरिया में है. वहीं गरीबी के लिहाज से भारत तीसरे स्थान पर है. मई 2018 के अंत तक नाइजीरिया में बेहद गरीब लोगों की संख्या लगभग 8.7 करोड़ रही, वहीं भारत में लगभग 7.3 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे दर्ज किए गए. नाइजीरिया में जहां हर मिनट लगभग छह लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जा रहे हैं वहीं भारत में गरीबी में लगातार कमी आ रही है. 

रिपोर्ट के आंकड़ों पर सवाल
भारत में गरीबी में कमी को ले कर इस रिपोर्ट में प्रस्तुत आंकड़े भारत में दर्ज किए जाने वाले आंकड़ों से मेल नहीं खाते. इसका सबसे बड़ा कारण गरीबी को नापने के अलग – अलग पैमाने हैं. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2004 से 2011 के बीच भारत में गरीब लोगों की संख्या 38.9 फीसदी से घट कर 21.2 फीसदी रह गई. वर्ष 2011 में भारत में लोगों की क्रय क्षमता 1.9 डॉलर प्रति व्यक्ति के करीब रही. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि देश में तेज आर्थिक विकास के चलते गरीबी घटी है.  

 रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस वर्षों में दक्षिण एशिया के देशों जैसे भारत,इंडोनेशिया,बांगलादेश,फिलिपींस, चीन और पाकिस्तान में लोगों की आय तेजी से बढ़ी है. इसके चलते दुनिया भर में गरीबी में कमी आयी है. वहीं वैश्विक स्तर पर गरीबी को कम करने में भारत व चीन की भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

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