09, Dec, 2016
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उद्धारक का बाट जोह रहा महात्मा गांधी का ‘स्कूल’, दे चुका है दो पीएम और सीएम

National-school-darbhanga fonded by mahatma gandhi

रोशन मैथिल की रिपोर्ट

पटना, 13 अगस्त। आए दिन आपने सुना होगा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से संबंधित वस्तुओ को सहेजने के लिए और प्राप्त करने के लिए भारत सरकार एड़ी चोटी एक कर देती है। विश्व के किसी कोने से भी अगर उस गांधी का संबंध होता है तो वह देश अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है। स्वंय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार इस तरह की पहल कर कई देशों में गांधी के प्रतिमा का अनावरण किया है। ऐसी परिस्थिति में इसे विडंबना न कहे तो क्या कहे। गांधी द्वारा स्थापित एक शैक्षणिक संस्थान जो आजादी के आंदोलन में सत्याग्रह का अड्डा बना था आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। सुध लेने वाला कोई नहीं है। वह अहल्या आश्रम की तरह बाट जोह रहा है कि कब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में राम आएंगे और उनका उद्धार करेंगे।

जानकारों की माने तो दरभंगा टाॅवर चैक से कुछ ही दूरी पर स्थित खंडहररूपी नेशनल स्कूल स्वतंत्रता आंदोलन का साक्षी रहा है। यह वहीं स्कूल है जिसकी स्थापना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहल पर की गई थी। उस समय स्थपित पांच राष्ट्रीय विद्यालय में से दरभंगा नेशनल स्कूल भी एक है। इस स्कूल के बारे में कहा जाता है कि एक से एक दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी यहां आ चुके हैं। इनमें राष्ट्रपिता के अतिरिक्त देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ राजेन्द्र प्रसाद, जेपी आंदोलन के अग्रणी डाॅ जयप्रकाश नारायण सहित कई नाम शामिल है। इतना ही नहीं इतिहासकारों के अनुसार इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले कई छात्र प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री पद को भी सुशोभित कर चुके हैं।

क्या है इस विद्यालय का इतिहास
कहा जाता है कि असहयोग आंदोलन के समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दरभंगा आए थे। इस क्रम में उन्होंने बेंता मैदान में आयोजित सभा को संबोधित किया। लोगों के मन में आजादी को लेकर उबाल मचलने लगा। फिर क्या था। अंदोलन की धारा तेज हो उठी। इसी क्रम में गांधी की पहल पर दरभंगा नेशनल स्कूल की स्थापना हुई। इसी जगह से आंदोलन को जीवंत किया जाने लगा।

जगदीश्वरी प्रसाद ओझा लिखित किताब स्वर्गीय बाबू कमलेश्वरी चरण सिंह का संक्षिप्त जीवन परिचय के अनुसार- ’दरभंगा के नामी असहयोगी नेता बाबू व्रजकिशोर प्रसाद और बाबू धरणीधर ने आंदोलन को तेज करने के लिए राष्ट्रिय स्कूल की आवश्यकता समझी। कमलेश्वर चरण सिन्हा पर इसको चलाने का भार दिया गया। वर्ष 1924 में असहयोग आंदोलन शिथिल पड़ने पर अधिकांश राष्ट्रिय विद्यालय बंद हो गया, लेकिन दरभंगा राष्ट्रीय विद्यालय चलता रहा’, पेज 16

 नेपाल के पुर्व पीएम मातृका प्रसाद कोईराला, गिरीजा प्रसाद कोईराला और बिहार के सीएम कर्पूरी ठाकुर


नेपाल के पुर्व पीएम मातृका प्रसाद कोईराला, गिरीजा प्रसाद कोईराला और बिहार के सीएम कर्पूरी ठाकुर

इस विद्यालय से संबंधित प्रतिभावान छात्र
जानकारों की अनुसार इस नेशनल स्कूल में रह कर कई छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे। इनमें से कई ने देश के साथ-साथ विश्व भर में अपनी पहचान बनाई। इनमें नेपाल के पूर्व पीएम मातृका प्रसाद कोइराला एवं गिरीजा प्रसाद कोइराला, सूरज नारायण सिंह का नाम शामिल है। इतना ही नही समाजिक विचारधारा को विश्व भर में अलग रूप देने वाले बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर ने भी यहां शिक्षा प्राप्त की है।

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ऐक विचार साझा हुआ “उद्धारक का बाट जोह रहा महात्मा गांधी का ‘स्कूल’, दे चुका है दो पीएम और सीएम” पर

  1. Md IKBAL August 14, 2016

    सरकार को ऐसी धरोहर पर ध्यान देना चाहिए

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