05, Dec, 2016
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20 दिन की रौशनी फिर ‘काली कोठरी’… राजनीति का मोहरा तो नहीं बन गये शहाबुद्दीन !

sahabuddin

न्यूज़ ऑफ़ बिहार डेस्क : बिहार के बाहुबली नेता मो. शहाबुद्दीन की जेल से सिवान यात्रा भाया हाईकोर्ट और सिवान से जेल की यात्रा भाया सुप्रीम कोर्ट की खबरों ने बिहार सहित पुरे भारत को अपने तरफ केन्द्रित किया। जमानत की सियासत खबरों की सुर्खियाँ बनी। बाहुबली शहाबुद्दीन की रिहाई, 300 गाड़ियों का काफिला, 20 दिन की रौशनी फिर काली कोठरी! शहाबुद्दीन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ बीते 20 दिनों में। शहाबुद्दीन के जेल से लौटते ही मुख्यमंत्री नितीश कुमार को मास लीडर नहीं मानने का बड़ा बयान के बाद बिहार की सियासत में करवट के आसार नज़र आ रहे थे। राजनितिक विश्लेषकों के अनुसार नितीश कुमार पर सरकार को बचाने का संकट मंडराने लगा था। हर अखबार, न्यूज़ चैनल, डिजिटल मीडिया तक में सिर्फ शहाबुद्दीन… शहाबुद्दीन… और सिर्फ शहाबुद्दीन… की खबरें आम हुई। संपादकीय लिखें गये डोक्युमेंट्रि भी बनाई गई।
यहाँ तक की तेजस्वी को मुख्यमंत्री और शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को उप-मुख्यमंत्री बनाने की अफवाहों ने तरह तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।जमकर बयानबाजी हुई। इन 20 दिनों में जमकर फोटो वार भी हुआ। कभी तेज प्रताप तो कभी शहाबुद्दीन, यहाँ तक की बीजेपी, राजद, जदयू के नेताओं की तस्वीरें अपराधियों के साथ सोशल मीडिया में वायरल हुई। लेकिन लगभग 20 दिन तक चली इस सियासत का अंत होने जा रहा है। इस सियासी सरगर्मी का मुख्य सूत्रधार शहाबुद्दीन की जेल वापसी हो गई है। अब सवाल यह है की इस जमानत की राजनीति में सियासत का मोहरा तो नहीं बन गये शहाबुद्दीन ?
जाते जाते शहाबुद्दीन ने नितीश कुमार को लेकर इतना जरुर कह दिया है की चुनाव में मेरे समर्थक उन्हें बता देंगे। अब इस बात का मायने क्या हो सकता है यह तो चुनाव आने के बाद ही पता चल सकेगा। फिलहाल शहाबुद्दीन की जेल वापसी के बाद बिहार की राजनीति की गर्माहट थोड़ी कम होने के आसार जरुर नज़र आ रही है।

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आइये बताते है आपको कब क्या हुआ
7 सितंबर : राजीव रौशन हत्याकांड में पटना हाइकोर्ट ने शहाबुद्दीन जमानत दी
10 सितंबर : 11 साल तक सीवान और भागलपुर जेल में बंद रहने के बाद बाद शहाबुद्दीन की रिहाई हुई
10 सितंबर : जेल से बाहर आते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया
11 सितंबर : एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में शहाबुद्दीन ने कहा नीतीश कभी मास लीडर नहीं रहे, मेरे नेता लालू यादव है
16 सितंबर : मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने पीड़ित चंदा बाबू के पक्ष में जमानत रद्द करने के लिये सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
16 सितंबर : बिहार सरकार भी जमानत रद्द करने के लिये सुप्रीम कोर्ट गयी
19 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने दायर अपीलों पर शहाबुद्दीन और स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप को नोटिस जारी किया
23 सितंबर : पत्रकार राजदेव की पत्नी ने सुरक्षा और हत्या के केस को दिल्ली स्थानांतरित करने के लिये सुप्रीम कोर्ट पहुंची
25 सितंबर : चंदा बाबू की पत्नी भी जमानत रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची
28 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगायी, साक्ष्य नहीं रखने का दिया हवाला
29 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने शहाबुद्दीन की जमानत को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रखा
30 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए शहाबुद्दीन की जमानत को रद्द किया

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ऐक विचार साझा हुआ “20 दिन की रौशनी फिर ‘काली कोठरी’… राजनीति का मोहरा तो नहीं बन गये शहाबुद्दीन !” पर

  1. Manoj October 1, 2016

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