26 फ़रवरी, 2017
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NOB Special Story: नोट.. नोट.. नोट ने दिया बैंकिंग सिस्टम को हथौड़े का चोट… नोट बैन पर बैंक से ग्राउंड जीरो रिपोर्ट

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निखिल झा की रिपोर्ट

दरभंगा, 14 नवम्बर। देश में शुरू हुए इस महायज्ञ में आहुति देते हिन्दुस्तान को देख रहा हूँ दो दिन से। महायज्ञ इसलिए क्यूंकि देश के चुने हुए प्रधानमंत्री ने इसे महायज्ञ कहा है और मैं देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति द्वारा कही गयी बातों से अलग कुछ और कैसे कह सकता हूँ। पिछले दो दिन से तो दरभंगा के बैंकों के बाहर लगी कतारों से बिना कैमरा निकाले उनका अनुभव साझा करता रहा। क्यूँकि सत्य को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। हमारे देश में अधिकांश लोग कैमरा देखकर डर जाते हैं। कैमराफोबिया से ग्रसित है हिंदुस्तान। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें बस कैमरे में आने की चिंता है तो लाइन में लगे हिंदुस्तान को गोली से ज्यादा कैमरे से डर लगता है। अगर कैमरा देख लेते तो झूठ ही बाहर आता, क्यूंकि कैमरे पर सच नहीं बोलता है हिन्दुस्तान। शायद यही कारण है कि अख़बार और उसके बदले हुए स्वरुप डिजिटल मीडिया पर आज भी हिंदुस्तान के लोगों को ज्यादा भरोसा है।

बात शुरू करते हैं नोट बंद करने के फैसले से। केंद्र सरकार की तरफ से लिया गया एक अहम फैसला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक मजबूत कदम। फैसला लेने के लिए आपके अन्दर हौसला चाहिए और प्रधानमंत्री के पास वो हौसला है। उन्होंने पार्टी हित से ऊपर उठकर निर्णय लिया। देश के प्रधानमंत्री का यह फैसला लेना उनके लिए भी जरुरी था क्यूंकि उनको ऐसा लग रहा था की उनकी सरकार काम कर रही है। आज वो भी आश्चर्यचकित होंगे यह जानकार कि उनकी सरकार ने कितना काम किया है। मैं देश के प्रधानमंत्री के कालाधन और अघोषित कैश रखने वालों के विरुद्ध शुरू किये गए इस प्रयास को सैलूट करता हूँ।

इस महायज्ञ के वास्तविक स्थिति का जायजा लेने पर मुझे यह ज्ञात हुआ कि लोगों में असुरक्षा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं। बैंक के बाहर हाथ में, झोला में और मुट्ठी में अपने पैसे लिए हुए खड़े लोगों के मन में पैसे छिन जाने, चोरी हो जाने और लूट लिए जाने का भी खौफ है। आसपास लूटेरे और पॉकेटमार भी घूम रहे हैं मौके कि तलाश में। दूर-दराज के इलाके से आये लोग रात को बैंक के आसपास जुगाड़ करके सो रहे हैं। सुबह होते ही बैंकों के बाहर भीड़ लग जाता है और फिर देखते देखते संख्या हजारों में चली जाती है। लोग परेशान हैं। किसान, मजदूर, खुदरा व्यापारी, छोटे दूकानदार और नौकरी पेशा। सभी लाइन में लग इस महायज्ञ में आहुति दे रहे हैं। कोई शिकायत नहीं कर रहा। सभी बलिदान देने को तैयार हैं। यह इस बात को बताता है कि हमारा हिंदुस्तान इमानदार है। बेईमान और भ्रष्ट तो यह व्यवस्था है।

बैंक में जवान और खुबसूरत लड़कियां भी लाइन में लगी हैं और शादीशुदा महिलाएं भी। बूढी और विधवा माताएं भी हैं लाइन में। पैसे लेने मनचले भी पहुंचे हुए हैं जो इस महायज्ञ में गंगा नहाने सा अनुभव महसूस कर रहे हैं। लड़कियों और महिलाओं के साथ अभद्रता भी हो रहा है तो उनका बचाव भी। कुछ लोग पैसे लूटने की फिराक में हैं तो कुछ परेशान लोगों को चाय पानी कराने में। न सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम है और न ही घंटों लाइन में लगने वालों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध है। न राज्य सरकार तैयार है इस आपातकाल से निबटने को और न केंद्र सरकार। और बैंक ने तो अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।

जानिये बैंक कर्मचारियों की जुबानी कैश क्राइसिस की वास्तविक स्थिति या टी वी पत्रकारों की भाषा में ग्राउंड जीरो रिपोर्ट। नोट की अदला-बदली और अकाउंट में पैसे जमा करने की प्रक्रिया में क्या हो रहा है और स्थिति क्या है यह बैंक के कर्मचारियों से बेहतर कौन बता सकता है। इस क्रम में एसबीआई और पीएनबी के कर्मचारियों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया। दोनों देश के सबसे अग्रणी बैंक हैं इसलिए स्थिति की वास्तविकता का ठीक ठीक पता यहाँ से लगना आसान है। नाम उजागर नहीं करने के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने बात करने की सहमति दी। पीएनबी शाखा के प्रबंधक रैंक के अधिकारी ने मुझे बताया की बैंक बहुत ही नाजुक स्थिति से गुजर रहा है।

उसने कहा कि दूसरी शाखाओं में क्या हो रहा है यह तो उसे नहीं पता लेकिन दरभंगा के प्रमुख पीएनबी शाखाओं में से एक इस शाखा की हालत बहुत अच्छी नहीं है। हमारे पास लोगों के पैसे बदलने के लिए कैश नहीं है। लाइन में लगे और काउंटर पर एक दूसरे के ऊपर चढ़ते लोगों को देखकर दया आ रही है। लेकिन हम कुछ बोल नहीं सकते। हम सुबह 9 बजे आते हैं और रात के 3 बजे तक रुकते हैं। बैंक के सभी कर्मचारी इसी दिनचर्या में जी रहे हैं। जहाँ तक लोगों की समस्याओं के कम होने की बात है तो मैं आपसे झूठ नहीं बोलूँगा। न हमारे पास इंफ्रास्ट्रक्चर है, न स्टाफ है और न ही कैश है। हम मानसिक अवसाद में हैं और बहुत तनाव में जी रहे हैं। हमारे पास लोगों की जरुरत को पूरा करने के लिए 50% संसाधन भी उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में अगर कैश क्राइसिस की इस समस्या के लिए अगर तत्काल कोई कदम नहीं उठाया गया तो देश की बैंकिंग व्यवस्था फेल हो जायेगी। मेरे यह पूछने पर कि वित्त मंत्री और आरबीआई की तरफ से मीडिया में खबरें आ रहीं हैं की देश में कैश की कोई कमी नहीं है। उसने बताया कि यह झूठ है देश में 80% शाखाओं के पास जरुरत का 20% कैश भी उपलब्ध नहीं है। हमारे एटीएम फेल हैं। हम 18-19 घंटे काम करने के बाद भी मात्र 20% से 25% लोगों को ही पैसे दे पा रहे हैं। अगर इस स्थिति पर अगले दो-तीन दिनों में कोई कदम नहीं उठाया गया तो और कुछ हो न हो बैंक फेल हो जायेंगे। अमूमन यही बात हर बैंक कर्मचारी के मुंह से सुना मैंने। क्या एसबीआई और क्या पीएनबी देश के दोनों अग्रणी बैंकों की यह स्थिति है तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बैंकों की क्या व्यवस्था है इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

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