03, Dec, 2016
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“उर्दू शिक्षकों की बहाली नहीं की गई तो जाट-पटेल की तर्ज पर अल्पसंख्यक करेंगे आंदोलन”

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दरभंगा, 5 अगस्त। अगर जल्द से जल्द उर्दू टीईटी की बहाली नहीं की गई तो जाट और पटेल समाज की तरह आंदोलन करेंगे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग। ये कहना है ऑल इंडिया बेदारी कारवां के अध्यक्ष नजरे आलम का। इस मामले को लेकर आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम की अध्यक्षता में एक आपात बैठक क्षेत्रिय कार्यालय लालबाग दरभंगा में बुलाई गई। बैठक के दौरान नजरे आलम ने कहा कि पिछले वर्ष से लगातार बिहार सरकार ने उर्दू टी0ई0टी0 की बहाली का मजाक बनाकर रख दिया है। शिक्षक सड़कों पर आन्दोलन करते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रहा है। अभी पिछले दो-तीन दिनों के अन्दर पटना में टी0ई0टी0 यूनियन के लोगों ने धरना दिया लेकिन शिक्षा मंत्री अशोक चैधरी के पास उनसे बातचीत करने के लिए समय की कमी देखी गई। नजरे आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक मामला पहुँच चुका है और मुझे ऐसी सूचना भी मिली है कि अल्पसंख्यक समुदाय के विधायक एवं मंत्री ने मुख्यमंत्री से जल्द बहाली कराने की माँग की है जो सराहनीय कदम है। यही काम हमारे नेता अगर पहले किए होते तो इन बेरोजगार लोगों को कबका रोजगार मिल गया होता।

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नजरे आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब से बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं तब से ऐसा लगने लगा है कि बिहार की दूसरी सरकारी जबान कही जाने वाली उर्दू को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। जिसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल है। क्योंकि श्रीमान मुख्यमंत्री न तो स्कूलों में उर्दू के शिक्षकों की बहाली करवा रहे हैं और बहुत सारे काॅलेजों में उर्दू के शिक्षक नहीं होने की वजह कर उर्दू की शिक्षा नहीं हो रही हैं। ना तो अल्पसंख्यकों को किसी विभाग में नौकरी की बहाली निकाली जा रही है और तो और अल्पसंख्यक समुदाय के किसी अच्छे व्यक्ति को बिहार सरकार के सैकड़ों निगम और बोर्ड हैं जिसमें किसी पद पर उन्हें विकास की डोर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ही दी जा रही है।

अगर मांगों पर जल्द से जल्द सुनवाई नहीं की गई तो ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां अक्टूबर-2016 महीने से दलित-मुस्लिम रिजर्वेशन की माँग को लेकर आन्दोलन करेगा। साथ ही उर्दू शिक्षकों की जल्द बहाली नहीं कि गई और जिन लोगों का ग्रेस के नाम पर पत्ता साफ कर दिया गया है उनके साथ न्याय नहीं किया गया तो जिस प्रकार से गुजरात में पटेल समाज और हरियाणा में जाट समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतर कर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी है ठीक उसी प्रकार से अल्पसंख्यक समुदाय भी आॅल इण्डिया मुस्लिम बेदारी कारवां के बैनर तले अपने अधिकार के लिए सड़कों पर उतरेगा। बैठक को अकरम सिद्दीकी, जावेद करीम जफर, सरवर अली फैजी, विजय कुमार झा, पप्पु खान, मिर्जा नेहाल बेग, शाह इमादुद्दीन सरवर, असद रशीद नदवी, जुबैर आलम, समीउल्लाह नदवी, मो0 अरफात, मो0 असमतुल्लाह ने भी सम्बोधित किया।

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ऐक विचार साझा हुआ ““उर्दू शिक्षकों की बहाली नहीं की गई तो जाट-पटेल की तर्ज पर अल्पसंख्यक करेंगे आंदोलन”” पर

  1. Shamim Akhtar August 6, 2016

    हा यह बात तो सही है कि नितिश जी भी लालू कि तरह मुसलमानों को ठग रहे है ।क्यो कि जो प्रश्न गलत थे उसके लिए सरकार जिम्मेवार हैं नितिश जी कहे थे कि ग्रेस मार्क मिलेगा जो दिये नहीं ।आन्दोलन होना ही चाहिए ।

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