29 मार्च, 2017
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NOB Exclusive: बिहार की बैंकर बिटिया कंचन ने रौशन किया बिहार का नाम, दुधमुंही बच्ची के साथ करती हैं 12 घंटे की ड्यूटी

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निखिल झा की प्रस्तुति

खगड़िया, 17 नवम्बर। बेटियों का ज़माना है, आजकल हर अखबार में बस बेटियों की उपलब्धियों का फ़साना है। एक बेटी के पिता को बेटियों के सफलता के किस्से कितना सुकून देते होंगे। ज़ाहिर सी बात है कि हर पिता अपनी बेटी को सफलता के हिमालय पर चढ़ते देखना चाहता है। बात पी.वी सिन्धु की हो, साइना नेहवाल की या हमारे बिहार की बैंकर बेटी कंचन की। लड़कियां हर मामले में लडको से आगे दिखाई देती हैं। आज की बेटियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे हैं। देश पर जब-जब संकट आया है हमारी बेटियों ने उस संकट की घडी में बेटों के साथ कदम से कदम मिलाया है। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर हमारी बैंकर बिटिया कंचन तक, देश की बेटियों ने संकट की घडी में हमेशा मिसाल पेश किया है। खगड़िया के इलाहबाद बैंक में कार्यरत कंचन के क्या कहने।

कंचन रोज अपने सात माह की प्यारी बेटी पंखुड़ी को लेकर बैंक आती है। भीड़ से जूझती है। और अपने फर्ज को निभाती है। इलाहाबाद बैंक में काम करनेवाली कंचन कहती हैं कि जब देश काला धन से परेशान है। उस समय हमारे देश के मुखिया ने फैसला लिया कि हमें एक लड़ाई लड़नी है। यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें बैंक कर्मियों को महती भूमिका निभानी है। इसलिए मैं तैयार हूं। देश और समाज की सेवा के लिए। कंचन बताती हैं कि सबुह 8 बजे से हीं बैंक आने की तैयारी में लग जाती हैं।

बच्चे को साथ लाती हैं। कहा बैंक में दूध और सारे इंतजाम वो साथ लाती हैं। ताकि बच्चे को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। बीच-बीच में वह जब भी ब्रेक होता है वह बच्चे को कुछ खिला देती हैं। दिनभर तो जमा और निकासी में बीत रहा है। शाम बैंक बंद होने के बाद कागजी काम निबटाया जाता है। इसलिए रात जाते-जाते 9 बज हीं जा रहा है। ऐसे में वह बैंक में हीं वॉकर रखती हैं ताकि बच्चे को सोने में कोई परेशानी नहीं हो। वो कहती हैं कि बैंक के ग्राहक हीं हैं जो बैंक को सफल बनाते हैं।

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इसलिए उन्हें संतुष्ट करने के साथ-साथ राष्ट्र के नवनिर्माण में बैंकवाले जो आज अपनी भूमिका निभा रहे हैं वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। कंचन के पति प्रभात कुमार मुंगेर कोर्ट में एपीओ है। उन्हें भी अपनी पत्नी की कर्मठता पर गर्व है। हालांकि तीन दिनों पहले पंखुड़ी बीमार हुई थी। पर कंचन प्रभा ने तबभी छुट्टी नहीं ली। कहती हैं सारी थकान बच्ची की मुस्कान को देखकर मिट जाती है।

कंचन को इस चुनौती से निबटने में बैंक के कर्मचारी भी सहयोग करते हैं। बैंक के लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति है कि छुट्टी का नामोनिशान नहीं है। हमें मिलकर अपना फर्ज निभाना है। इसलिए सभी कंचन प्रभा के जज्बे को सलाम करते हैं और उन्हें सहयोग करते हैं। बैंक के शाखा प्रबंधक सुमन कुमार सिन्हा कहते हैं कि कंचन जैसे कर्मचारी इलाबाद बैंक की शान हैं। हमलोग हर संभव मदद दे रहे हैं। यह वह समय है जब हर बैंकर को अपना बेस्ट देना है। कंचन स्वत: आगे आ रही हैं। यह बैंक के दूसरे कर्मचारियों के लिए प्रेरणादायी बात है।

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