21 जनवरी, 2017
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बिहार का पहला ‘कैशलेस’ गांव… यहां दूध वाले भी करते है ‘Cashless Transaction’

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प्रवीण कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

दरभंगा, 09 दिसम्बर। नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को कैशलेस करने का बीड़ा उठाया है ऐसे में newsofbihar.com कहाँ पीछे रहने वाला था। हमारे दरभंगा के संवाददाता प्रवीण कुमार ने एक ऐसा मोहल्ला ढूंढा है जो आज से 3 वर्ष पूर्व ही कैशलेस हो गया था। आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा क्यूंकि बिहार को तकनीकी रूप से पिछड़ा राज्य माना जाता है। लेकिन हम आपको बताएँगे कैसे बना यह मोहल्ला देश का पहला “कैशलेस सोसाइटी”। जब हमारे संवाददाता को इस कैशलेस सोसाइटी की जानकारी मिली तो वो सच्चाई का पता लगाने दरभंगा के कबिलपुर-बाबुसाहेब कॉलोनी पहुंचे। वहाँ पहुँचने के बाद उनको जानकारी मिली कि युवा समाजसेवी निखिल झा के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने एयरटेल मनी के सहयोग से वर्ष 2014 में अपने मोहल्ले को पूर्ण रूप से कैशलेस बना लिया और अधिकांश कार्य मोबाइल मनी के माध्यम से होने लगे। हालांकि लोगों का रुझान डिजिटल मनी की तरफ नहीं होने के कारण यह प्रयोग उतना सफल नहीं हुआ जितनी अपेक्षा थी। लोगों ने डिजिटल माध्यम के साथ-साथ करेंसी से काम करना जारी रखा।

कैसे हुई सोसाइटी के कैशलेस होने की शुरुआत?

प्रवीण कुमार ने जब इस कैशलेस अभियान के बारे में निखिल झा से बात की तो उन्होंने बताया कि अपने सोसाइटी को स्मार्ट बनाने का उनका यह प्रयोग उनके एक मित्र के सुझाव पर उन्होंने लिया। अपने मित्र अमरकांत चौधरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एयरटेल मनी में कार्यरत अमरकांत चौधरी ने उनसे कहा कि अगर हमारा सोसाइटी कैशलेस हो जाए तो अधिसंख्य समस्याएं हल हो जायेंगी। लोगों को बिजली बिल जमा करने में, पैसे भेजने में और अन्य कामों में करेंसी से भुगतान करने पर काफी परेशानी होती थी। घंटों लाइन में लगने के बाद बिल जमा हो पाता था जिसका असर दैनिक कार्यों पर पड़ता था। इन्हीं परेशानियों को ध्यान में रखकर मोहल्ले को स्मार्ट सोसाइटी बनाने का निर्णय लिया। निर्णय तो लिया लेकिन उसको सफल करना आसान नहीं रहा। अंततः हमने अपने सोसाइटी को स्मार्ट, ग्रीन और डिजिटल बनाने का सफल अभियान चलाया।

कैसे बना देश का पहला स्मार्ट सोसाइटी
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निखिल आगे बताते हैं कि पढ़े-लिखे लोग भी कैश की बजाय मोबाइल मनी के उपयोग के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। शुरू में उन्हें समझाने में बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। निखिल कहते हैं कि पैसों की जरुरत कब होती है? जब आप कोई सामान खरीदते हैं या आप कोई सर्विस लेते हैं। मतलब साफ़ था कि हमें ग्राहकों और व्यापारी वर्ग से बात करना था। निखिल के अनुसार उन्होंने स्थानीय किराना दुकानदारों, अखबार वालों, और दूधवालों से मिलकर उन्हें कैशलेस व्यवस्था के फायदे बताये। उनको बताया गया कि कैसे बिना करेंसी के वो अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते हैं और कैशलेस होने से कैसे वो कम मेहनत करके ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। निखिल के अनुसार शुरुआत में तो लोगों ने ऐसी किसी बात को मानने से इनकार कर दिया लेकिन जब बार-बार मीटिंग कर उन्हें समझाया गया तो वो तैयार हो गए। वैसे सभी व्यवसायी जो कैशलेस होने को तैयार हुए उन्हें अमरकांत चौधरी की सहायता से एयरटेल का सिम उपलब्ध कराया गया और एयरटेल मनी जो की अब एयरटेल बैंक है को प्रयोग करने की ट्रेनिंग दी गई।

ऐसे मनाया ग्राहकों को

हम सभी जानते हैं कि उत्पाद से ज्यादा महत्वपूर्ण उपभोक्ता होते हैं। यह इस कैशलेस सोसाइटी को बनाने के क्रम में भी देखने को मिला। निखिल ने बताया कि उत्पाद बेचने वालों और सर्विस देने वालों को तो हमने तैयार कर लिया लेकिन सोसाइटी को कैशलेस बनाना तभी संभव था जब ग्राहक मोबाइल मनी का प्रयोग करने को तैयार हों। ग्राहकों को कैशलेस होने के फायदे बताने के लिए सांस्कृतिक और शिक्षाप्रद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन ग्राहकों को सम्मानित किया गया जिन्होंने कैशलेस प्रक्रिया के माध्यम से कोई एक काम किया था। धीरे धीरे लोगों ने अपना बिजली बिल और अन्य सरकारी बिल सहित कुछ कार्य कैशलेस तरीके से करना शुरू कर दिया।

एक साल पूरा होने पर सोसाइटी के लोगों को बधाई देने पहुंचे थे एयरटेल के ये बड़े अफसर
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निखिल कहते हैं कि 10 सितम्बर 2014 उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है क्यूंकि इस दिन कैशलेस सोसाइटी के एक साल पूरा होने के मौके पर एयरटेल बिहार-झारखण्ड के उस समय के सीइओ आनंद खुराना जोकि अभी स्टार टी वी के सीइओ हैं खुद पहुंचे थे। उन्होंने इस प्रयोग की जमकर तारीफ की थी और अपने कर्मचारी अमरकांत चौधरी सहित सभी स्थानीय लोगों को इस प्रयोग में एयरटेल को मौका देने के लिए धन्यावाद दिया था। बाद में उन्हीं के प्रयासों से इस स्मार्ट सोसाइटी की खबर एयरटेल के मैगजीन में प्रकाशित किया गया था।

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2 विचार साझा हुआ “बिहार का पहला ‘कैशलेस’ गांव… यहां दूध वाले भी करते है ‘Cashless Transaction’” पर

  1. sonu Kumar pal December 10, 2016

    darbhanga to thik h par madubani ke khajuolli parkhand ke tulshiyahi gaon me aap ja ke dekhe to aaj tak bijlli nhi De pya koi aur aap cashless ki bat Kate h aur utna hi nhi log aaj bhi lalten jala ke kam chalte h jnha utna hi nhi uske aasppas ke 10 kilometres tak aaj bhi koi rojgar nhi h uar cashlesh ki nhi jnha agar aap me h kabilyat h to badal dijye us goan ka bhavish aur uska hi nhi aushke jase 15000 goan h aaj bhi nhi h bijlli ham to duwa karRte h ki pure bihar ka bhavish badal jaye thanks

    • gaurav December 25, 2016

      bhai us gown k nirwachit mukhiya bidhyak ji ky krte h…
      ap log R.T.I ke jariye mukhiya ji or bidhyak ji se swal kariye

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