दरवाजे पर बाढ़ ने दी दस्तक तो जागी बिहार सरकार, बांधों की मरम्मत को जारी की राशि

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पटना। मानसून ने बिहार में दस्तक दे दी है। ऐसे में बिहार में कुछ दिना से लगातार भारी बारिश हो रही है। वही पड़ोसी देश नेपाल में भी भारी बारीश हो रही है। ऐसे में पीछले साल की तरह इस साल भी बिहार के कई जिलो में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

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बात अगर कोसी क्षेत्र की करें तो यहा कई इलाको में बाढ़ का कहर शुरू हो चुका है और कोसी के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। ऐसे में अब प्रशासन को बांधो की मरम्मत का काम याद आया है। जेसी की बिहार सरकार की रीत रही है उसी अनुसार इस साल भी खतरा सिर पर मंडराने के बाद बांधों की मरम्मती और मजबूतीकरण की सरकार ने सुध ली है।

सरकार ने जून के अंतिम सप्ताह में कैबिनेट की बैठक की और बांधों की मरम्मती के लिए राशि जारी करने का फैसला लिया है।

बता दे कि हर साल बिहार में मानसून के वक्त बाढ़ का खरा रहता है और इससे भारी तबाही मचाती है। जैसा की पीछले साल भी हुआ था। लेकिन बावजूद इसके सरकार हमेंशा की तरह प्यास लगने पर कुंआ खेदने निकल पड़ी है। बाढ़ पूर्व तैयारियों के रुप में जून के अंतिम सप्ताह में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने बिहार की नदियों के बांधों के मजबूतीकरण और मरम्मती के लिए 275 करोड़ रुपये जारी किए हैं।इस बैठक में कैबिनेट के निर्णय में कहा गया है कि 2017 में आई बाढ में क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मती एवं सुदृढ़ीकरण के लिए ये पैसे मंजूर किये जा रहे हैं।

आपको बता दे कि बिहार में बाढ़ जहां कईयो के लिए जान माल की हानी लेकर आता है वही कईयो के लिए उपरी आमदनी और काला बजारी का जरिया भी बन जाता है। आंकड़े बताते है कि बिहार में हर साल बाढ़ के से पहले बांधो की मरम्मत से लेकर राहत कार्य के लिए दी जानेवाली राशि तक में घपले होते रहे है।

ऐसे में इस बार भी जब राशि बाढ़ के दरवाजे पर दस्तक देने के बाद जारी की गई है तो कुछ ऐसा ही अंदाजा लगाया जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल ये हे कि आखिर सरकार दिखावे के नाम पर जनता के साथ ये विश्वासघात क्यो करती है। 2008 के कुसहा त्रासदी की भी यही कहानी थी जब कोसी के कमजोर तटबंध की ना सिर्फ उपेक्षा हुई बल्कि उसको लेकर खेल भी चलता रहा और कोसी पूर्वी तटबंध को ही लील गई। जिसके चलते जल प्रलय का खामियाजा बिहार के कई हिस्सों को झेलना पड़ा था।

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