01 मई, 2017
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”श्रीराम ने किया था दुधेश्वर लिंग की स्थापना”

darbhaga

संतोष कुमार की रिपोर्ट

बिहार का बाबाधाम बन सकता है देवकुण्ड का दूधेष्वरनाथ मंदिर

औरंगाबाद , 02 अगस्त। लोगों की आस्था का अटूट केन्द्र बनता जा रहा है देवकुण्ड का बाबा दूधेष्वरनाथ मंदिर। यहां सावन की दूसरी सोमवारी पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। आपको बता दें कि औरंगाबाद से 70 किलोमीटर दूर देवकुण्ड के पास दुधेश्वर धाम नामक भोले बाबा का मंदिर है। जहां आजकल हाथों में जल लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रहती है। यहां सभी श्रद्धालु भोले बाबा पर जल चढ़ाने के लिए अपनी बारी का घंटों इंतजार करते हैं। कहने को तो सूबे के विभिन्न इलाकों से श्रद्धालु भोले बाबा को जल चढ़ाने निरंतर आते रहते हैं। लेकिन सावन के महीने में यहां की रौनक देखने लायक होती है। खासकर सोमवार को आसपास का पूरा इलाका श्रद्धालुओं से भर जाता है। भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि लोगों का चलना मुश्किल हो जाता है। वहीं मंदिर में आए लोगों का मानना है कि यहां आने से उनके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही भोलेनाथ उनके सारे मुरादों को पूरा कर देते हैं।

इसी दौरान जल चढ़ाने आए देवकुंड थाना के थानाध्यक्ष पवन कुमार के अनुसार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के सारे पुख्ता इंतजाम पहले से ही कर रखे हैं। वहीं दूसरी तरफ देवकुण्ड धाम के महंत वामी कन्हैयानंद पूरी के अनुसार बाबा दुधेष्वरनाथ के रूप में बसे इस लिंग की स्थापना खुद भगवान श्रीराम ने अपने हाथों से तब किया था। जब भगवान श्रीराम अपने पितरों का तर्पण करने के लिए गया जाने के क्रम में च्यवन ऋषि के दर्शन हेतु यहां रूके थे। ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा जी ने स्वयं इस मंदिर का निर्माण अपने हाथों से किया है। लेकिन इन सब के बावजूद पर्यटन की असीम संभावनाओं से भरा यह मंदिर सरकार की उदासीनता के कारण पूरा विकसित नहीं हो पाया। लोगों के मन में इस मंदिर के प्रति श्रद्धा को देखते हुए सरकार को ऐसी मान्यता प्राप्त जगहों की सुध लेनी चाहिए। ताकि बाबा भोलेनाथ के इस मंदिर को बिहार के बाबाधाम के रूप में विकसित किया जा सके।

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