06, Dec, 2016
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बिहार के युवा कवि का जापान में जलवा, आदर्श की कविताओं को लेकर दीवानगी

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पटना, 16 सितम्बर। कहा जाता है जहां न जाए रवि वहां जाए कवि। जी हां साहित्य किसी भाषा की बंधन का मोहताज नहीं होता। शायद यही कारण है कि जापान के टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज में भी हिंदी भाषा सीखने वाले युवाओं में हिंदी को लेकर अच्छा-खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि हिंदी दिवस का आयोजन यहां व्यापक रूप से मनाया जाता है।

स्थानीय लोगों की माने तो हिंदी साहित्य का यहां काफी क्रेज है। लोग चांव से भारतीय साहित्य को पढ़ते और सुनते हैं। इन लोगों के अनुसार भारत के युवा कवि आदर्श कुमार इंकलाब की कविताएं भी यहां बेहद लोकप्रिय हैं । जिंदगी से जुड़े- हर भाव से सजे काव्य संग्रह ‘अक्षर अक्षर आदर्श’ को लेकर अगर यहां के युवाओं में जबरदस्त क्रेज है तो उसकी वजह है युवा मन से जुड़ी वो कविताएं जो युवा मन की हर उथल-पुथल को शब्द देती हैं ।

काव्य संग्रह ‘अक्षर अक्षर आदर्श’ की एक कविता –

चाहता था
गिन लूं कितने कदम चले थे साथ-साथ
हो सके तो समेट लूं उन्हें सीने में
रख दूं सिरहाने के नीचे
जब कभी मन मायूस हो
तकिया हटा दूं
ताकि महसूस हो सके
जिंदगी तेरी अदा पर हम क्यों फिदा हैं !

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जापान के टोक्यो यूनिवर्सिटी में हिंदी के जाने-माने प्रोफेसर डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी के मुताबिक काव्य संग्रह ‘अक्षर अक्षर आदर्श’ में प्रेम, विरह, मिलन के साथ-साथ जिंदगी की आपाधापी से जुड़ी कविताएं है- जो जापान के सहज जीवन से मेल खाती हैं। यही वजह है कि आदर्श की कविताओं में हिंदी सीख रहे युवाओं की अच्छी-खासी दिलचस्पी है। आपको बता दें कि काव्य संग्रह अक्षर अक्षर आदर्श में साहित्य, राजनीति, मीडिया से जुड़ी मशहूर हस्तियों समेत करीब डेढ़ सौ लोगों की आदर्श की कविताओं को लेकर लिखी गईं प्रतिक्रियाएं प्रकाशित हैं।

बताते चले कि बिहार के सीतामढ़ी के निवासी आदर्श कुमार इंकलाब पेशे से पत्रकार हैं। समय समय पर वह साहित्य सृजन कर भाषाई भंडार को भी समृद्ध करते रहे हैं।

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