25 अप्रैल, 2017
To Advertise on this Website call Us on 9155705448, 8130906081
ब्रेकिंग न्यूज़

NEWS OF BIHAR

बिहार की दो निरक्षर महिला, दिल्ली में संबोधित करेंगी आईएएस अधिकारियों को !

Biharsarif

बिहारशरीफ,23 अगस्त। कहते है कि प्रतिभा किसी की मोहताज़ नहीं होती। हमारे समाज में लोग कहते हैं कि महिला की पहचान पिता या पति से ही होती है। एक समय था जब महिला पिता या पति के नाम से ही जानी जाती थी। खुद की उसकी कोई पहचान नहीं होती थी। लेकिन आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे है जो पढाई में सिर्फ हस्ताक्षर करना जानती है। यह कहानी सुषमा और आठवीं पास मंजुला की है जिसने अपनी मेहनत से अपनी मंजिल को हासिल कर महिलाओं के लिए मिसाल बन गई है। सुषमा देवी और मंजुला देवी सोमवार को दिल्ली के एनआरएनएम भवन में देश भर के करीब ढाई सौ आईएएस अधिकारियों को जीविकोपार्जन का अनुभव बताएंगी। भले ही इनके पास किताबी ज्ञान नहीं लेकिन इतना अनुभव है कि आईएएस अधिकारियों की क्लास लेने के लिए तैयार हैं। दो साल पहले सुषमा अपना हस्ताक्षर भी नहीं कर पाती थी। काफी प्रयास के बाद अब मुश्किल से अपना नाम लिख लेती है। आर्थिक दृष्टिकोण से दोनों काफी पिछड़ी हुई महिला है। लेकिन अब जीविका से जुड़ने के बाद ये हवाई जहाज से दिल्ली गई हैं। इनके लिए तो हवाई जहाज को नजदीक से देखना ही एक सपना था।

आपको बताते चले कि सुषमा देवी ने शराबबंद से पहले ही अपने गांव को पूरी तरह से शराबमुक्त बना दी। काफी संघर्ष की और गांव में शराब बनाने, बेचने और पीने तक पर पूरी पाबंदी लगाने में सफल रही। जिला प्रशासन द्वारा गांव को शराबमुक्त घोषित किया गया। बदले में सरकार द्वारा उसे 1 लाख रुपए का इनाम भी मिला। रहुई प्रखंड के खाजे एतवारसराय की विजय रविदास की पत्नी सुषमा देवी है। जज्बे और संघर्ष की इसी कहानी को वह आईएस अधिकारियों के साथ शेयर करेगी। 2010 में सुषमा जीविका से जुड़ी थी।

दुसरी ओर मंजुला देवी ने बना दिया मशरूमगांव जब पारंपरिक खेती से हटकर पुरुष किसान भी खेती के नए पैटर्न के बारे में सोचने और उसे अपनाने का रिस्क नहीं उठा पा रहे थे। तब सिलाव प्रखंड के सारिल चक गांव की मंजुला देवी ने कठिन मेहनत के बल पर गांव को मशरूम गांव बना दिया।उन्होंने पहले गांव को मशरूम गांव के रूप में प्रसिद्धि दिलाई और फिर जीविका से भी जुड़ गई। जीविका से जुड़ने के बाद पोल्ट्री के काम में खुद तो सफलता हासिल की ही इलाके की करीब 2 हजार महिलाओं को भी इससे जोड़ दिया।

ये भी पढे़ं:-   दस साल का बहादुर विपीन हुआ डीएम से सम्मानित..., डीएम ने किया सलाम !

इन दोनों के संघर्ष की कहानी से जिलेभर की महिलाएं प्रेरित हो रही हैं कई राज्यों में जा रही हैं जिले की जीविका दीदी जीविका के डीपीएम डाॅ. संतोष कुमार ने बताया कि जिले में जीविका की योजनाओं की सफलता में महिलाओं का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्थिति यह है कि यहां की अनुभवी महिलाएं झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जाकर महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। चूंकि गरीबी उन्मूलन में जीविका की महत्वपूर्ण भूमिका उभरकर आई है। जिसे देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा एनआरएलएम के नाम से दूसरे राज्यों में भी इसे शुरू किया है और इसी के तहत ये महिलाएं दूसरे राज्यों में काम कर रही है। गौरवान्वित करने वाली है यह सफलता डीएम डाॅ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि जीविका से जुड़ी इन दोनों महिलाओं की सफलता गौरवान्वित करने वाली है। आज जिले में करीब 4 लाख महिलाएं जीविका से जुड़कर काफी तेजी से स्वावलंबी बन रही है। उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है। शिक्षा के प्रति जागरुकता बढ़ी है। आने वाले दिनों में ये महिलाएं जिले के विकास में अहम योगदान देंगी।

newsofbihar.com की ख़बरें अपने न्यूज़फीड में पढ़ने के लिए पेज like करें  

 
 

newsofbihar.com की ख़बरें अपने न्यूज़फीड में पढ़ने के लिए पेज like करें

loading...

अपने विचार साझा करें

आवश्यक लिखें चिह्नित:*

Powered By Indic IME