05, Dec, 2016
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बिहार में बहार है.. इलाज के अभाव में मुख्यमंत्री के गांव का अस्पताल बीमार है !

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कुलदीप भारद्वाज की रिपोर्ट
पटना, 1 अक्टूबर। सूबे के मुखिया का दावा है कि बिहार विकास कर रहा है। लेकिन हालात कुछ और ही हकीकत बयान कर रहे है। खुद मुख्यमंत्री के गृह जिले नालन्दा में नीतीश के निश्चय की हालत न केवल जर्जर है बल्कि किसी भी वक्त किसी बड़े हादसे को न्योता देता दिख रहा है। बिहार वासियों के स्वास्थ्य को ठीक रखने और बीमारों को समय पर इलाज मुहैया कराने की जिम्मेदारी बतौर मंत्री लालू यादव के बड़े पुत्र और महुआ से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए तेजप्रताप यादव के कंधों पर है।

चैकिये मत यह कोई नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरो का पुरातन अवशेष नही है बल्कि नालन्दा जिले के सरमेरा प्रखंड का चेरो वृन्दावन गांव का सरकारी प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र है। यहां इलाके के आम आदमी जो बीमार पड़ते है उनको डॉक्टरी इलाज मुहैया कराया जाता है। लेकिन हालात ऐसे है कि इस उपस्वास्थ्य केंद्र को ही इलाज की जरुरत है क्योंकि ये भवन अब अंतिम सांसे गिन रहा है। हालात ऐसे है कि बीमार व्यक्तियों का इलाज मजबूरी में इस जर्जर बिल्डिंग की जगह खुले आसमान के नीचे किया जाता है।

बिल्डिंग तो जर्जर है ही यह उपस्वास्थ्य केंद्र भी महज एक नर्स के भरोसे चल रहा है। डॉक्टर का अतापता नहीं है। सरकार की ओर से मिलने वाले दवाईया यहाँ कभी नहीं मिलती है। तो मजबूरन दवाईया मजबूरी में यहां इलाज कराने पहुंचे व्यक्ति को ही बाजार से खरीदनी पड़ती है। अब आप ही खुद सोचे यह हालात सूबे के मुख्यमंत्री के गृह जिले की है। तो सूबे के जिला के स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति तो भगवान् भरोसे ही चलती होगी। वैसे महागठबंधन सरकार का दावा है। ये सरकार गरीब गुरबा की सरकार है लेकिन हालात कुछ और ही बयान कर रहे है। चैकिये मत ये नीतीश के गृह जिले का उपस्वास्थ्य केंद्र है। प्राचीन नालन्दा विश्वविद्यालय का खंडहर नहीं जाने वो सच जो आप के होश उड़ा देगा।

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