05, Dec, 2016
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बिहार में शमशान में चलता है यह स्कूल; शिक्षक दिवस पर छात्रों की व्यथा जानने के लिए पढ़ें यह खबर।

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सरफराज सिद्दीकी की रिपोर्ट

झंझारपूर, 5 सितम्बर। सूबे की सुशासन सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही। विभिन्न तरह की कल्याणकारी योजनाऐं अंधराठाढ़ी प्रखण्ड में हवा हवाई साबित हो रही है। यहां के विभिन्न उर्दू मकतबों में कथित सुशासन की पोल खुलती नजर आ रही है। कमरों के अभाव में बच्चों की सही रूप से पढ़ाई लिखाई नहीं हो पा रही है। जहां अभिभावकगण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। वहीं हरना उर्दू विद्यालय में हकिमों के द्वारा उपस्थिति सुनिश्चित कराने का दवाब है। दूसरी ओर बच्चों को बैठाने की जटिल समस्या।
430 विद्यार्थियों के लिए सिर्फ दो कक्षाएं हैं। स्कुल में बेंच डेस्क तक लगाने की जगह नहीं है। पुराने जमाने के गुरुकुल की तरह फर्श पर बोरा बिछाकर पढ़ते हैं विद्यार्थी। यह कहानी है ।अंधराठाढ़ी प्रखण्ड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय हरना उर्दु की। वर्ग सात से आठ तक की पढ़ाई एक कमरे में तो कक्षा पांच और छः की पढ़ाई दुसरे कमरे में होती है। बाकी एक से चार वर्ग की पढ़ाई सड़क पर या कब्रिस्तान में होती है। शिक्षा की ऐसी व्यवस्था है जैसे यह स्कुल इंसानों के बच्चों के लिए न होकर भेड़-बकरियों का स्कूल है। कल्पना की जा सकती है कि किस कदर यहां के अल्पसंख्यक छात्रों की पढ़ाई पूरी होती होगी। नामांकित विद्यार्थियों में से प्रतिदिन उपस्थिति सौ के करीब सिमट कर रह गया है। अगर तेज धुप या बारीश हूआ तो मात्र दो से तीन क्लास चल पाता है।बाकी क्लास के बच्चों को छुट्टी देना पड़ता है। उपस्थिति अच्छी रही तो अफरातफरी का आलम हो जाता है। विद्यालय में शिक्षको की संख्या सात है। जिसमे से दो शिक्षक बीएलओ व अन्य कामों में स्कूल से बाहर ही रहते हैं।

बताया जा रहा है भवन निर्माण के लिए मिला था सात लाख
2010 में भवन निर्माण के लिए 7 लाख रुपये विद्यालय को प्राप्त हुए। ग्रामीण अतिकुर रहमान एवं अकिल असरफ ने अपनी अपनी सात कट्ठा जमीन विद्यालय के भवन निर्माण के लिए स्वेच्छा से दान दे कर रजिस्ट्री भी कर दिया। उस समय जमीन की भड़ाई के लिए कोष की समस्या आड़े आई। तत्कालीन एमएलसी विरेन्द्र चैधरी ने अपने ऐच्छिक कोष से डेढ़ लाख रुपये भराई के लिए दिया था। लेकिन आजतक विद्यालय की जमीन का भराई नहीं हो सका। इधर भवन नहीं रहने के कारण प्रभारी हेडमास्टर को भवन निर्माण वाला रुपया वापस करने का फरमान आगया। मजबूर होकर हेडमास्टर को 2013 में पैशा लोटाना परा हेडमास्टर का कहना है कि पहले जमीन भराई होगी तभी भवन बनेगा। न ही आज तक जमीन का भराई हो सका न ही भवन बन सका।स्कुल में बेंच डेस्क तो है लेकिन लगाने की जगह नहीं है।
मध्य विद्यालय हरना उर्दू में रखे बेंच डेस्क को बच्चे दूर से देख कर तरसते हैं। काश कभी हम भी बेंच डेस्क पर किताबें रखकर पढते। वहीँ स्कूल में = शौचालय नदारद है। शौच के लिए बच्चे अपने अपने घर जाते हैं । चापाकल कि भी समस्या है। सावन भादो की बरसात और चैत वैशाख की चिलचिलाती धूप में तो स्थिति और भी विकट हो जाती है। बच्चे कहते है भवन के अभाव में पढ़ाई लिखाई में काफी प्रेशानी होती है। बेंच डेस्क नहीं रहने के कारण एक दूसरे के पीठ पर कांपी रख कर लिखना परता है। शौैचालय नहीं रहने से बहूत ज्यादा दीक्कत होती है। क्या कहते हैं। हेडमास्टर
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मो इसराईल कहते हैं कि भवन निर्माण से पहले मिट्टी भराई जरुरी है। पैसे का आवंटन तत्कालीन एमएलसी के ऐच्छिक कोष से कई वर्ष पूर्व ही हो चुका है। विभागीय अधिकारी इस दिशा में उदासीन हैं। जिस्से भवन निर्माण शुरु नहीं हो सका है। दुसरी ओर कमरे के अभाव में विद्यालय के शिक्षक मो शौकत अली, मो शफीकूर रहमान, आदि का कहना है। कि हमलोग चाहकर भी अच्छी तरह से बच्चों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं।

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3 विचार साझा हुआ “बिहार में शमशान में चलता है यह स्कूल; शिक्षक दिवस पर छात्रों की व्यथा जानने के लिए पढ़ें यह खबर।” पर

  1. Amdurrahim September 5, 2016

    Bilkul sahi Report he me ne dekha he apne anakho se scool ka haal or mene isi wajha se apne baccho ko is scool me admission nahi karawaya or mere bacche yehi haal dekh kar scool jana nahi chahte the jabke kisi dusre scool me mere bacche shoq se padhte hai…..me bhi yahi kahna chata hu ke jitna jaldi ho sake is Report pe karwai karni chahiye ….Abdurrahim from Harna

  2. Sonu Kumar yadav September 5, 2016

    reading

  3. ABDUL AHAD RAHMANI September 20, 2016

    Es school mei bachche ke vavis k saath khilwar ho raha hai.

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