बिहार: पुल निर्माण के लिए तीन पीढ़ियों से संघर्ष कर रहे हैं लोग, फिर भी…

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मो. हसनैन की रिपोर्ट

आज जैसे ही अदौरी शब्द के साथ खोरी पाकर का प्रयोग होता है मतलब जैसे ही कोई अदौरी खोरी पाकर बोले तो यह समझ आ जाता है कि चर्चा अदौरी खोरी पाकर पुल निर्माण की होगी या इसके लिए हो रहे संघर्ष की होगी आइए समझते हैं संघर्ष की जरूरत क्यों है और क्यों पड़ीहालांकि तीन पीढ़ियों से यह मांग चल रही है। हमारे बुजुर्गों ने कई बार इस पर आवाज उठाया लेकिन तब के जनप्रतिनिधि केवल इतना दिलासा देते थे कि आपका यह पुल इतना महत्वपूर्ण है कि सरकार जब भी पुल निर्माण को सक्षम होगी आर्थिक दृष्टिकोण से तो सबसे पहले इस पुल का निर्माण कराया जाएगा जो कि 3 जिले को जोड़ता है। धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल से जोड़ता है और सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण ह। हर बार हमारे बुजुर्गों ने यह सोचा कि यह पूल तो वास्तव में इतना महत्वपूर्ण है तो यह तो बन ही जाएगा हो सकता है सरकार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हो जब सरकार सक्षम होगी निर्माण कराएगी।

फिर एक सिलसिला चला चुनाव दर चुनाव जनप्रतिनिधियों के आश्वासन का, उप मुख्यमंत्री महोदय का सोनल हाईस्कूल मंच से बोलना वोट लेने आने के क्रम में देवेश चंद्र ठाकुर जी का बोलना विधायक और सांसद का बार-बार आश्वासन या चुनाव में खड़े सभी प्रतिभागी जब भी इधर आते तो वोट लेने के लिए एक ही जुमला होता कि हमें जीता दो इस बार बन जाएगा आप का पुल।

जो हार जाता वह यह सोचता कि जीता तो हूं नहीं काहे के लिए इस पर आवाज भी उठाना रहने दो अगले चुनाव का मुद्दा है जो जीत जाता वह भी इसे अगली जीत की गारंटी का मुद्दा समझ कर छोड़ देताजबकि हालात ऐसे हैं ₹50 का केले का फल लेने नदी तैरकर जाने और आने के क्रम में यहां ग्रामीण डूब कर बंसी चाचा बनने लगे हैं।

वर्तमान की स्थिति को देखते हुए मैं हालिया शिफ्ट हुआ था अपने गांव में मेरे अंदर एक अजीब सी ऊर्जा भरी और मैंने सोचा कि जब कोई इस हद तक सोच सकता है कि पारिवारिक जिम्मेदारी से मुक्त रहता तो आत्मदाह कर बंसी चाचा बन जाता लेकिन इस पुल का निर्माण जरूर करवाता। तो क्या मैं इतना भी नहीं कर सकता कि इनकी भावना इनके कष्ट को मैं एक संघर्ष के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने का कार्य करूं यकीन मानिए तब मुझे यह काफी आसान सा कार्य लगा था और मैं इस में जुट गया

अब तो साहब स्थिति यह हो गई है की ओखली में सर डाल दिया हूं तो परवाह नहीं। चोट कितनी लगती है लेकिन यकीन मानिए तब यह एहसास इतना भी नहीं था कि इतनी कोशिश लगेगी अपने ही सांसद-विधायक और जनप्रतिनिधि को समझाने में की अदौरी का यह पुल निर्माण कितना महत्वपूर्ण है। 1 अप्रैल 2018 का वह दिन जहां पूरी दुनिया फूल बनाने में लगी थी हमने पुल बनाने का संकल्प लिया हमने इस पुल निर्माण में लोगों को जोड़ने का संकल्प लिया जनप्रतिनिधियों को जगाने का संकल्प लिया और तब हमारी पहली बैठक किया। और यकीनन लोग हमारे साथ इसलिए बैठे थे कि यह पुल निर्माण संभव तो नहीं है लेकिन कम से कम 4 लोग बैठकर आज चर्चा तो कर रहे हैं उनके लिए इतनी ही संतुष्टि काफी थी।

लकिन मैं और मेरे जैसे कुछ साथी असंतुष्ट थे। जनप्रतिनिधियों को इस निर्माण के प्रति जगा करहमारा कारवां सबसे पहले पहुंचा मोतिहारी कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह जी के यहां हमने मंत्री महोदय से मुलाकात कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने की इच्छा जताई। क्योंकि प्रधानमंत्री महोदय का आगमन था मोतिहारी में स्वच्छता से संबंधित अलख जगाने उसमें हमारी मुलाकात तो संभव नहीं हो पाई प्रधानमंत्री महोदय से लेकिन हमने एक मांग पत्र दिया मंत्री महोदय के माध्यम से तब मंत्री महोदय ने हमें बताया कि आपका यह अदौरी पुल का निर्माण केंद्र से नहीं हो सकता। क्योंकि यह NH के रास्ते में नहीं मेरे द्वारा पूछे जाने पर ई पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत श्री रघुनाथ झा जी ने नितिन गडकरी को जो पत्र लिखा क्या उनको पता नहीं था कि यह NH के रास्ते में नहीं है और इसका निर्माण राज्य सरकार करेगी। उनका जवाब था कि पता नहीं वह क्या सोच कर लिखे लेकिन आप लोग तो सही रास्ते पर निकलो यह राज्य का विषय है और मुख्यमंत्री सेतु योजना इसके लिए उपयुक्त रहेगा।

उसके बाद हमलोग मिले बेलसंड विधायक प्रतिनिधि राणा रणधीर सिंह चौहान से। इस मुलाकात के पीछे एक जिज्ञासा थी कि आखिर मुख्यमंत्री से पुल लिया कैसे जाता है। राणा रणधीर सिंह चौहान जी को चंदौली पुल पास कराते बड़ा करीब से देखा था। श्री चौहान ने बताया पुल लंबा हो तो संघर्ष भी लंबा करना पड़ता है। मेरे चंदौली पुल के संबंध में तो खुद मुख्यमंत्री महोदय भी कह चुके थे कि यह प्रकृति के साथ खिलवाड़ है और मॉडल पुल के नजदीक दूसरा पुल का निर्माण नहीं हो सकता बावजूद इसके मैंने संघर्ष नहीं छोड़ा और परिणाम के रूप में आज चंदौली पुल का निर्माण हो रहा है।

श्री चौहान से मुलाकात के बाद और कुछ हुआ या ना हुआ हो उन्होंने आश्वासन भी दिया कि वह भी प्रयास करेंगे अपने स्तर से बावजूद इसके हमारे मानस पटल पर एक बात बैठ गई कि अगर संघर्ष करें तो यह पुल निर्माण संभव है। और हमने सोचा क्यों ना अपने विधायक को साथ में जोड़ा जाए इस संघर्ष से।स्थानीय विधायक शिवहर ने आश्वासन दिया था कि मैं आप लोगों को लेकर मुख्यमंत्री से पटना चलूंगा पर कई महीने हो गए अब तक आश्वासन पूरा नहीं हुआ।

फिर क्या था एक नई ऊर्जा के साथ हुई शुरू तैयारी मुख्यमंत्री महोदय से मिलने की, जानकी नवमी के अवसर पर पुनौरा में हेलीपैड पर मिलकर बताया और ज्ञापन दिया। साथ में अतीश चंद्रा जी थे जिनको मेरा वाला ज्ञापन दिया गया और मुझे आश्वासन दिया गया कि इस पर पहल होगी। अब मैंने अपने ज्ञापन का एक प्रति श्री सुनील कुमार पिंटू जी पूर्व पर्यटन मंत्री महोदय को भी दिया था। मुख्यमंत्री महोदय ने उस ज्ञापन को पथ निर्माण मंत्री को दिया कि देखिए जो हो सकता है कीजिए।

उस क्रम में हम पहले प्रभात झा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष BJP और तमाम जो लोग उस कार्यक्रम में थे उनसे व्यक्तिगत या दूरभाष से संपर्क कर सबको इस मांग के प्रति खड़ा होने का अनुरोध किया था। सब ने हमें आश्वासन दिया था। इस बीच मई के आखिरी दिनों में प्रधानमंत्री महोदय का जब मन की बात का प्रसारण रेडियो पर होना था। तो सांसद महोदय हमारे अगल-बगल के गांव में कार्यकर्ताओं के साथ सुनकर मन की बात और भोज की व्यवस्था मैं व्यस्त थी तभी हमने नाव पर बैठकर बीच नदी बागमती में जहां पर प्रस्तावित पुल का निर्माण की मांग चल रही है। प्रधानमंत्री महोदय की मन की बात बीच नदी से सुनने का प्रोग्राम बनाया और मीडिया के इस सब खबर के प्रतिफल से सांसद महोदय का ध्यानाकर्षण हुआ और वहां पहुंची और अपने द्वारा अभी तक किए गए सभी पत्र व्यवहार को हमारे बीच रखा। यह सही है कि लोकसभा के प्रश्न उठाए गए यह सही है कि विधानसभा में सुनील कुमार पिंटू जी द्वारा फैसल रहमान जी द्वारा समय-समय पर प्रश्न उठाया गया। लेकिन यह भी उतना ही सही किसी विधायक द्वारा कभी विधानसभा में इस पुल निर्माण को लेकर कोई प्रश्न नहीं उठाया गया कोई पहल नहीं हुई।

बगल के गांव में आए जिला अधिकारी शिवहर को भी लाने का प्रयास किया हमने उस नदी तक और सफल रहे अनुश्रवण समिति में उठाने का प्रयास किया और सफल रहे। लोक शिकायत निवारण में आज भी एक मामला चल रहा है जो फर्जी एस्टीमेट या अक्षम एस्टीमेट या अक्षम एजेंसी द्वारा बनाई गई एस्टीमेट के संबंध में है जिसका अगला सुनवाई डेट 25 जुलाई को है।

हमने सोशल मीडिया के माध्यम से, जन संपर्क के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच इसको रखने का प्रयास किया और जनता की उम्मीद बढ़ी है। पुल निर्माण संघर्ष को लेकरकई बार हमारी बात पथ निर्माण मंत्री से हुई कई बार हमारी बात जदयू के प्रवक्ता नीरज जी से हुई कई मुलाकात हमारे सीतामढ़ी शिवहर के प्रभावी लोगों के साथ हुआ जो कहीं ना कहीं हमारी बात मुख्यमंत्री महोदय तक पहुंचा सकते थे। हमने प्रधानमंत्री महोदय को भी शिकायत किया जो आज भी आरसीडी बिहार सरकार में पेंडिंग है न जाने कितने आरटीआई आवेदन लगाए। अभी 15 जुलाई को मंगल भवन शिवहर में हमने एक संकल्प बैठक रखा था जिसमें सांसद विधायक प्रभारी मंत्री तथा सभी जनप्रतिनिधि एवं सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्ष महोदय को आमंत्रित किया था। यह अलग बात है कि सांसद प्रभारी मंत्री और विधायक जरूरी नहीं समझा आना लेकिन लगभग सभी दलों के अध्यक्ष कार्यकारिणी उपस्थित रहे जहां भरी सभा में उन लोगों ने संकल्प लिया कि जल्द ही सर्वदलीय जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे