21 अगस्त, 2017
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वित्त मंत्री मानते हैं कि मिलना चाहिए विशेष राज्य का दर्जा तो फिर देते क्यों नहीं हैं?

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केंद्र ने माना बिहार को विशेष दर्जा की जरूरत
पटना, 31 जुलाई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सालों पुरानी मांग पर केंद्र सरकार ने भी सैद्धांतिक रूप से सहमति जता दी है। केंद्र सरकार ने मान ही लिया कि बिहार को विशेष राज्य की आवश्यकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में बयान दिया है कि अगर किसी राज्य को विशेष राज्य की दर्जा भविष्य में दिया जाता है तो सबसे पहले बिहार को दिया जाना चाहिए। क्योंकि बिहार विशेष राज्य का सबसे बड़ा अधिकारी है।

आपको बताते चले कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने से इन्कार कर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अब इसके नाम पर चुनावी दांव खेलने की सियासत नहीं चल पाएगी। केंद्र का मानना है कि राज्यों को पहले के मुकाबले काफी ज्यादा धन मिल रहा है। प्रदेश सरकारें सुशासन के जरिए इस धन का सही इस्तेमाल कर प्रदेश के विकास का चेहरा बदल सकती हैं। इसलिए अगर आंध्र जैसे प्रगतिशील राज्य को विशेष दर्जा दिया जाएगा तो फिर बिहार, झारखंड, उड़ीसा और कुछ हद तक उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की अनदेखी कैसे की जा सकती है।

वैसे भी 14वें वित्त आयोग ने राजस्व बंटवारे के नए फाॅर्मूले में पूर्वोेत्तर और जम्मू-कश्मीर के अलावा विशेष राज्य का दर्जा देने के प्रावधान को ही हटा दिया है। इसी का सहारा लेते हुए केंद्र ने सभी राजनीतिक दलों को साफ कह दिया है कि विशेष दर्जा देने की कोई गुंजाइश नहीं है।

-आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा नहीं।
-वित्त मंत्री ने उत्तर प्रदेश और झारखंड को भी बताया जरूरतमंद।
-विशेष राज्य के दर्जे पर अब नहीं चमकेगी सियासत।
-वित्त मंत्री जेटली ने विपक्ष से कहा, राज्यों को सबल बनाएं

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