06, Dec, 2016
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बुनियादी सुविधाओं व विकास से कोसों दूर है घनश्याम बीघा गांव

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पंकज सिंह की रिपोर्ट
जहानाबाद, 16 अक्टूबर : आदर्श पंचायत दावथु का एक छोटा गांव सुदूर उत्तर दिशा में भोगोलिक रूप से नालंदा एवं जहानाबाद जिला के सीमा स्थित विकास से वंचित बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम इस गांव का नाम है घनश्याम बीघा।

गया-इस्लामपुर मुख्य सड़क से तीन किलोमीटर की दूरी, गांव तक पहुंचने के लिए घुमावदार पगडंडी, कच्ची गलियां टूटी फूटी नालियां ही पहचान है इस गांव का। आंगनवाड़ी में किलकारी एवं मुस्कान बिखेरने के जगह गलियों के धूल में धूसरित हो रहे बच्चे एवं स्कूल के बजाय गलियों एवं पगडंडियो पर कौतुक मे मश्त नौनिहाल शायद नियति है यहां के आने वाली पीढ़ी का।
गांव में पहुंचते ही बच्चे क्या युवा बुजुर्ग एवं महिलाएं कौतुक वश काम छोड़कर अपलक तबतक निहारती है जब तक आने वाले का प्रयोजन नहीं जान लेती। गांव के विकास के संबंध मे सवाल दागते ही चेहरे पर दर्द की झलक स्वतः उभर आती है। फिर एक एक कर दुखों की कहानी का क्रम शुरू हो जाता है।
हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त लगभग पचपन वर्षीय कपिलदेव यादव ने दर्द को बताते हुए कहते हैं की आज तक हमारे गांव में बुनियादी विकास का कोई उदाहरण नहीं है। आज तक न सड़क न गलियां तथा न ही नालियों को दुरुस्त किया जा सका जबकि ये सारी व्यवस्था शायद सरकार द्वारा पंचायत को दी गई है।
काफी दौड़ धूप करने के बाद इस गांव मे नवसृजित स्कूल की व्यवस्था हुई लेकिन तीन वर्षों में भी भवन नहीं बन पाया। आज भी मौसम के मिजाज से स्कूल संचालित है। बरसात के दिनों में यहा आना सब के बूते की बात नहीं है। बीमारी की स्थिति मे रोगियों को खाट पर ले जाने के सिवा कोई उपाय नहीं है।
अब तक दो लोंगों की मृत्यु ले जाने में देर होने के कारण हो चुकी है। और तो और प्रसव पीड़ा से पीड़ित तीन महिलाओं का प्रसव बधार मे खाट पर टांग कर ले जाते वक्त हो गया है। आवागमन की सुविधा एवं सरकारी भवन के न होने से शादी विवाह भी कठिन हो जाता है।
सिर्फ जेठ या बैशाख के महीने मे शादी विवाह सम्पन्न करने की मजबूरी होती है। आंगनबाड़ी केंद्र का लाभ भी बच्चे नहीं उठा पाते। उन्होंने बताया की आज मानव भले ही मंगल पर चला गया हो लेकिन हमलोंगों के जीवन मे अभी शनि की दशा कायम है और आने वाली पीढ़ी को भी इसी दशा मे गुजारनी होगी।
जहां की पुरुष तो क्या महिलाएं अभी भी खुले में शौच करने को विवश हो उसे बिजली की बात करना या सोंचना शायद शोभा नहीं देता। पंचायत के मुखिया उमा शंकर शर्मा का कहना है कि जितनी भी राशि हमें मिली उससे पंचायत के गांवो का हर संभव विकास का प्रयास किया है। समुचित विकास राशि नहीं मिलने से कुछ गांवो में प्रयाप्त विकास नहीं हो सका।
क्या कहते हैं प्रखंड विकास पदाधिकारी एजाज आलम- पंचायतों में विकास के लिये पंचायती निकायों को योजना भेजना और क्रियान्वयन करना होता है। अगर इस गांव में बुनियादी सुबिधा नहीं है तो इस गांव के विकास के लिये विशेष प्रयास किया जायेगा।

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