28 जून, 2017
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पूरे देश को है इस बिहारी शिक्षक पर नाज… अपने दमपर बदल डाला भारत का इतिहास !

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पटना, 6 सितम्बर। कहते हैं कोई अपने जिद्द पर आ जाए तो क्या नहीं कर सकता है। चाहे तो किसी को राजा बना सकता है और चाहे तो किसी देश का इतिहास और भाग्य बदल सकता है। कुछ ऐसा ही उस बिहारी शिक्षक ने कर दिखाया था। हम बात कर रहे हैं उस आसाधारण शिक्षक चाणक्य की जिसने अखंड भारत को एक करने का सपना देखते हुए एक साधारण से बालक चंद्रगुप्त को इस विशाल साम्राज्य का महानायब बना डाला।

इतिहासकारों के अनुसार आचार्य चणक्य सदैव अखंड भारत के लिए प्रयास करते रहे। यही कारण है कि जब सिंकदर भारत पर आक्रमण करने के लिए आगे बढ़ रहा था तभी वहीं धनानंद के पांस मदद के लिए पहुंचा। आपमानित होने के बाद उस आसाधारण शिक्षक ने नंदवंश को नाश करने के साथा साथ नए महानायक की तलाश आरम्भ कर दी। बहुत शीघ्र उन्हें चंद्रगुप्त जैसा छात्र मिला। चाणक्य ने जैसी कल्पना की थी चंद्रगुप्त उस कल्पना पर शत-प्रतिशत खरा उतरता गया और कुम्हार के सधे हाथों से चाक पर चढ़ी मिड्ढट्टी ने अपना आकार लिया और युवा चंद्रगुप्त ने छोटे-छोटे राजाओं की सहायता से पाटलिपुत्र पर चढ़ाई की और नंदों को युद्ध में परास्त करके मार डाला।

नंदवंश के विनाश के बाद चन्द्रगुप्त मौर्य मगध की गद्दी पर आसीन हुआ। उसे पराक्रमी बनाने और मौर्य साम्राज्य का विस्तार करने के उद्देश्य से गुरु चाणक्य ने व्यावहारिक राजनीति में प्रवेश किया और उसका मंत्री बना। अब चाणक्य का अगला लक्ष्य भारत को एक विशाल साम्राज्य के रूप में स्थापित करना था।
नंद वंश के बाद पूरे भारत पर कब्जा कर चन्द्रगुप्त सत्ता के केन्द्र पर काबिज हो गया और उसकी विजयी सेना ने विश्व विजेता बनने निकले सिकंदर महान के सेनापति सेल्यूकस को हराकर यहां से भगा दिया और उसके विश्व विजयी बनने के सपने को तोड़ डाला।

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उसने मौर्य वंश की स्थापना की और भारत का विशाल साम्राज्य स्थापित किया। इस तरह उसने अपने शिक्षक चाणक्य के सपने को पूरा कर इतिहास बनाया।

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