23 मार्च, 2017
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छठ महापर्व का आज दूसरा दिन, जाने कैसे मनाया जाता है खरना का व्रत

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पटना, 5 नवंबर। नहाय खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो चुकी है। आज छठ पर्व के दूसरे दिन खरना का आयोजन शाम में होगा। इस दिन व्रतधारी दिन भर अन्न जल ग्रहण किए बिना उपवास करती हैं और शाम में भगवान सूर्य को खीर-पूड़ी, पान-सुपारी और केले का भोग लगाने के बाद प्रसाद बांटा जाता है। शनिवार की सुबह से 12 घंटे का निर्जला खरना व्रत आरंभ होता है। शाम में छठी मइया की पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। खरना के दिन खीर के प्रसाद का खास महत्व है और इसे तैयार करने का तरीका भी अलग है। मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर खीर तैयार की जाती है। मिट्टी के नये चूल्हे पर दूध, गुड़ व आरव के चावल से खीर और गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद बनाया जाएगा। प्रसाद बन जाने के बाद शाम को सूर्य की आराधना कर उन्हें भोग लगाया जाता है और फिर व्रतधारी प्रसाद ग्रहण करती है। इस पूरी प्रक्रिया में नियम का विशेष महत्व होता है। शाम में प्रसाद ग्रहण करने के समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि कहीं से कोई आवाज नहीं आए। ऐसा होने पर खाना छोड़कर उठना पड़ता है। इसलिए व्रती को एकांत में जाकर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। यह अनुष्ठान जितना आध्यात्मिक है, उतना ही सामाजिक सरोकारों से लबरेज भी। लोग प्रसाद ग्रहण करने बिना किसी भेदभाव और बुलावे के व्रती के घर पहुंचते हैं। इसके बाद निर्जला उपवास शुरू होगा। रविवार को भगवान भाष्कर को पहला अर्घ्य शाम में दिया जाएगा और फिर सोमवार को सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पर्व संपन्न हो जाएगा।

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गुरुवार को व्रतियों ने किया नहाय-खाय
नहाय खाय को लेकर व्रतियों ने सुबह स्नान-ध्यान कर पूजा-अर्चना किया। छठ व्रत का संकल्प लेकर नये चूल्हे पर पूरे पवित्रता के साथ खाना पकाया। अरवा चावल, अरहर-चने की दाल, कद्दू, आलू-गोभी आदि की सब्जी, पकौड़ सहित कई पकवान बनाए। फिर उसे ग्रहण कर अनुष्ठान की शुरुआत की। नहाय खाय में कद्दू का विशेष महत्व होने की वजह से हर घर में इसका एक व्यंजन बना। इसके बाद व्रती खरना पूजन की तैयारी में जुट गये। गेहूं सुखाने में बरती गयी सतर्कता व्रतियों ने पूजा के गेहूं को सुखाने में काफी सतर्कता बरती। सुबह पूजा की गेहूं को पवित्रता के साथ साफ कर धोने के बाद उसे छत पर या ऊंचे स्थान पर सूखने के लिए डाला। फिर बैठकर उसकी रखवाली की, ताकि चिड़ियां या फिर कोई इसे दूषित न कर दें।

आज आटा चक्की में उमड़ेगी भीड़
गेहूं पिसाने के लिए शनिवार को शहर के आटा चक्की पर भीड़ उमड़ेगी। आटा चक्की संचालक भी पर्व को लेकर शुक्रवार को साफ-सफाई की। चक्की को साफ कर धोया। इसके बाद सिर्फ पर्व के गेहूं पिसाई का बोर्ड टांग दिया। चक्की संचालक ने बताया कि इस पर्व में पवित्रता बहुत जरूरी है। इसी वजह से हमलोग खरना के दिन सिर्फ पर्व का गेहूं ही पिसते हैं।

साठी के खीर व रोटी का चढ़ेगा प्रसाद
लोक आस्था का महापर्व छठ अनुष्ठान के दूसरे दिन सूर्यास्त के बाद शनिवार को व्रती खरना पूजन करेंगे। मिट्टी के नये चूल्हे पर दूध, गुड़ व साठी के चावल से खीर और गेहूं के आटे की रोटी का प्रसाद बनाया जाएगा। व्रती पूरे दिन उपवास रखकर सूर्यास्त के बाद छठी मइया की पूजा करेंगे। मइया को केले के पत्ते पर प्रसाद चढ़ाया जाएगा। व्रती व परिजन छठी मइया को प्रणाम कर आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद व्रती अपने सगे-संबंधियों के साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे।

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आज से शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला उपवास
शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ ही छठ मइया की आराधना की शुरू हो गयी. चार दिवसीय महापर्व के दूसरे दिन शनिवार को खरना पर सूर्यदेव को भोग लगाने के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा। खरना के प्रसाद में चावल, चने की दाल, पूरी, गन्ने की रस या गुड़ से बनी रसिया आदि बनाये जायेंगे और गोधूली बेला में भगवान सूर्य के प्रतिरूप को लकड़ी की पाटिया पर स्थापित करने के बाद पारंपरिक रूप से पूजा की जायेगी।

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