08, Dec, 2016
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छठ महापर्व का महत्व और उससे जुडी प्रचलित कहानियाँ

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मो. हसनैन की ख़ास रिपोर्ट

कहाँ और कैसे मनाया जाता है छठ महापर्व:
छठ पूजा उत्तर भारत खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इस दौरान सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उपासना की जाती है। कार्तिक महीने की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाने वाला यह त्यौहार चार दिनों तक चलता है। इस बार छठ पूजा की तिथि चार नवंबर से लेकर सात नवंबर तक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। इस दिन सूर्य की भी पूजा की जाती है। माना जाता है जो व्यक्ति छठ माता की इन दिनों पूजा करता है छठ माता उनकी संतानों की रक्षा करती हैं।

छठ पूजा से जुडी प्रचलित कहानियां

राजा प्रियव्रत की कहानी: छठ पूजा के पीछे की कहानी राजा प्रियव्रत को लेकर है। कहते हैं राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी, तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियव्रत की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। प्रियव्रत पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा प्रियव्रत से कहा कि वो सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं और इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं। उन्होंने राजा प्रियव्रत से उनकी पूजा करने और दूसरों को पूजा के लिए प्रेरित करने को कहा। जिसके बाद राजा प्रियव्रत ने पुत्र इच्छा के कारण देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से छठ पूजा पुत्रों की दीर्घायु के लिए मनाया जाता है।

भगवान राम और लंका विजय से जुड़ी कहानी : छठ पूजा से जुड़ी एक अन्य कहानी प्रचलित है जिसके मुताबिक विजयादशमी के दिन लंकापति रावण के वध के बाद दिवाली के दिन भगवान राम अयोध्या पहुंचे। रावण वध केपाप से मुक्त होने के लिए भगवान राम ने ऋषि-मुनियों की सलाह से राजसूर्य यज्ञ किया। इस यज्ञ के लिए अयोध्या में मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया गया। मुग्दल ऋषि ने मां सीता को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने की सलाह दी। इसके बाद मां सीता ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की। इसके बाद से ही यह पर्व मनाया जाता है।

योद्धा कर्ण और माता कुंती से जुड़ी कहानी: एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। जिसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वो रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है। छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी है। इस कथा के मुताबिक जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए तब दौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया। लोक परंपरा के मुताबिक सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई।

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8 विचार साझा हुआ “छठ महापर्व का महत्व और उससे जुडी प्रचलित कहानियाँ” पर

  1. विजय कुमार November 5, 2016

    बहुत अच्छा। हसनैन साहब

  2. Shivam Singh November 5, 2016

    बहुत अच्छा ।

  3. Vijay Vikas November 5, 2016

    बहुत खूब। बिल्कुल सही।

  4. BABLUKUMAR GUPTA November 5, 2016

    Very nice hasnain ji

  5. Md kaishar November 5, 2016

    Bahut badhiya hai sir ji

  6. ब्रज किशोर November 5, 2016

    आभार । आपने छठ से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रचलित जानकारी से पाठको को अवगत कराया । छठी मईया की कृपा आप पर बनी रहे।

  7. MD Hasnain November 6, 2016

    बहुत सुंदर रोचक तथ्य

  8. MD Hasnain November 6, 2016

    आप सब का दिल से शुक्रिया जो आप सभी ने न्यूज ऑफ बिहार के जिला रिपोर्टर को ईतना प्यार एव न्यूज ऑफ बिहार को आप सब दिल से चाहते है आप सभी दिल से धन्यवाद ।
    आप का अपना
    मो0हसनैन जिला रिपोर्ट शिवहर
    9958656849/

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