परीक्षा ली, रिजल्ट दिया और अब नामांकन से इंकार, ये है पटना विश्वविधालय का काम , जानिए

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पटना। बिहार के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित इस विश्वविद्यालय पटना विश्व विधालय के एक कारनामें से लगभग सैकड़ो छात्र मुसिबत में फस गए है। पअना विश्वविधालय में एडमिशन की चाह लिए इन छात्रो ने पहले यहां प्री-पीएचडी के लिए फार्म भरा फिर इसके लिए विवि की ओर से आयोंजित परीक्षा दी। इसके अलावा बीते मेंगलवार को विवि ने रिजल्ट भी जारी कर दिया। लेकिन अब विवि ने छात्रो के साथ भद्दा मजाक करते हुए नामांकन लेने से मना कर दिया है।

बता दे कि इन छात्रो के लिए मुसीबत की वजह यह है कि वोकेशनल कोर्स और बॉयोकेमिस्ट्री विषयों के नियमित शिक्षक ही विश्वविद्यालय के पास हैं नही इसी लिए विवि ने नामांकन लेने से मना कर दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब विवि के पास प्रर्याप्त शिक्षक नही थे तो इन विषयों में पीएचडी नामांकन की प्रक्रिया बंद क्यो नही की गई। खुद कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह ने माना कि प्री-पीएचडी की परीक्षा में शामिल होने के लिए सभी विषयों के अभ्यर्थियों से आवेदन लिए गए थे।

ज्ञात हो की यूजीसी की गाइडलाइन की माने तो पीएचडी कोर्स सिर्फ नियमित शिक्षक ही करा सकते हैं। लेकिन पटना विवि का हाल तो उल्टा है। यहां व्यवसायिक पाठ्यक्रम में नियमित शिक्षक हैं ही नहीं, गेस्ट फैकल्टी के सहयोग से पीजी के कोर्स संचालित किए जाते हैं। अब शिक्षकों की बहाली होने के बाद प्री-पीएचडी परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों का नामांकन लिया जाएगा।

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लेकिन इसके इत्तर छात्रो की परेंशानी कोई नही सुन रहा है। व्यावसायिक कोर्स के अभ्यर्थियो की माने तोयूजीसी ने 2016 में गाइडलाइन जारी किया था। विश्वविद्यालय को पत्र भी प्राप्त हुआ था। उनहोने बताया कि यूजीसी ने सेवानिवृत्त शिक्षकों से भी पीएचडी कराने से 2017 में ही मना कर दिया था। यह साबकुछ विवि को भत होते हुए भी फरवरी, 2018 में सभी विषयों के लिए प्री-पीएचडी के लिए आवेदन मांगे गए। ऐसे में छात्र कह रहें हैं कि विश्वविधालय ने उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को नामांकन लेने की निश्चित तिथि बतानी चाहिए।

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10 विषयों में नहीं होगा रजिस्ट्रेशनः- एमजेएमसी, म्यूजिक, रूरल स्टडीज, सोशल वर्क, वीमेन स्टडीज, हर्बल केमिस्ट्री, बॉयोकेमिस्ट्री, बॉयोटेक्नोलॉजी, प्रबंधन, फाइनांस कंट्रोल विषय में प्री-पीएचडी परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते।

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बाकी विषयों में नामांकन में दिक्कत नहींः- हिंदी में 12, मैथली में 18, उर्दू में नौ, अरबी में चार, फारसी में 17, बंगाली में तीन, दर्शनशास्त्र में 31, अंग्रेजी में 60, संस्कृत में 27, राजनीति शास्त्र में 58, मनोविज्ञान में 38, भूगोल में 10, गृह विज्ञान में नौ, अर्थशास्त्र में 40, इतिहास में तीन, समाजशास्त्र में 16, पीएमआइआर में 17, सांख्यिकी में 13, जियोलॉजी में 54, बॉटनी में 67, गणित में 50, केमिस्ट्री में 104, फिजिक्स में 29, जूलोजी में 52, लॉ में 17, एजुकेशन में 11 तथा कॉमर्स में 32 सीटों के लिए आवेदन मांगे गए हैं।

पिछले सत्र में नियमों की हुई है अनदेखीः- विश्वविधालय के इस कारनामें में पिछले सत्र में नियमों को ताक पर रख दिया गया है। जानबूजकर व्यावसायिक कोर्स में भी पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन कराए गए। इस बारे में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मटुकनाथ चैधरी ने कहा कि जुलाई 2015 में इस पर पत्रकारिता विभाग ने आपत्ति जताई थी। पत्र में कहा गया था कि जो प्रोफेसर पत्रकारिता की क्लास नहीं ले सकते हैं, वे पीएचडी कैसे करा सकते हैं? तब तक दो छात्रों का रजिस्ट्रेशन हो चुका था। यह नियम के विरुद्ध था। इतना होने के बाद भी पत्रकारिता के लिए प्री-पीएचडी टेस्ट लेना समझ से परे है।

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पीएमओ के पत्र के बाद विश्वविद्यालय की खुली आंखः- बता दे कि आरटीआई के जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दी गई सूचना में यह माना गया है कियूजीसी की नियमावली के प्रतिकूल व्यावसायिक कोर्स का संचालन किया जा रहा है। इसकी शिकायत अभ्यर्थी मुकेश कुमार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से फरवरी में की थी। पीएमओ से पत्र आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद टूटी और एडमिशन पर रोक लगाई गई।

एनओयू ने बंद कर दिया था पीएचडी कोर्सः- नालंदा ओपेन यूनिवर्सिटी (एनओयू) के रजिस्ट्रार प्रो. एसपी सिन्हा ने बताया कि यूजीसी की गाइडलाइन स्पष्ट है कि बगैर संबंधित कोर्स में रेगुलर फैकल्टी के पीएचडी कोई भी विश्वविद्यालय संचालित नहीं करा सकता है। इसी आधार पर एनओयू में 2012 से ही पीएचडी कोर्स में नामांकन बंद है।

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