29 अप्रैल, 2017
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मोहनपुर की दुर्गा माता देती हैं आशीर्वाद और गणपति बप्पा अपने हाथों से देते हैं प्रसाद !

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पंकज प्रसून की रिपोर्ट

newsofbihar.com डेस्क, 6 अक्टूबर। आज से यही करीब एक दो दशक पहले तक गांव के लोग शहरों में होने वाले दुर्गा पूजा को देखने के लिए आया करते थे। भव्य पंडाल और बिजली की सजावट को देखने का कौतुहल गांव के लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता था। लेकिन अब वक्त बदलने के साथ-साथ गांवों में भी आर्थिक तरक्की का असर दिखने लगा है और इसका सीधा असर गांवों में हो रहे दुर्गा पूजा के आयोजन में महसूस किया जा सकता है। अब आप दरभंगा जिले के पचाढ़ी के पास मोहनपुर गांव में हो रहे दुर्गापूजा को ही ले लीजिए। इस गांव की आबादी बहुत अधिक नहीं है लेकिन दुर्गा पूजा को लेकर लोगों के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब आपको जानकर हैरानी होगी कि मोहनपुर गांव में दुर्गापूजा की शुरूआत बमुश्किल 7 से 8 साल पहले हुआ होगा लेकिन इतने कम वक्त में ही आयोजन समिति की कार्यकुशलता और गांव के नवयुवकों के सामुहिक प्रयास की बदौलत यहां की दुर्गापूजा बहुचर्चित हो गई है।

मोहनपुर गांव के ब्रह्मस्थान में दुर्गापूजा का आयोजन होता है। पूजास्थल पर बने विशाल पंडाल की भव्यता कई किलोमीटर दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेती है। लेकिन इस साल कुछ ऐसा इंतजाम किया गया है जिसको देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी है। पूजा स्थल से बिल्कुल सटा हुआ एक तालाब है। इस तालाब के बिल्कुल बीच में एक पंडाल बनाया गया है। शटरिंग की मदद से ऐसा मुमकिन हो पाया है। वहां तक पहुंचने के लिए लकड़ी का अस्थाई पुल बनाया गया है। पुल के दोनों तरफ बिजली की बेहद खूबसूरत सजावट की गई है। अब आप सोच रहे होंगे की तालाब के बीच में पंडाल तो बना दिया गया लेकिन उस पंडाल के भीतर क्या है जिसको देखने के लिए इतनी भीड़ उमड़ रही है? तो चलिए, हम आपकी जिज्ञासा शांत किए देते हैं…उस पंडाल के अंदर गणपति बप्पा की भव्य मूर्ति स्थापित की गई है….और सुनिए गणपति बप्पा की प्रतिमा के सामने आप जब दो रुपये का सिक्का डालेंगे तो गणपति बप्पा अपने हाथ से अपना प्रिय मोदक यानि लड्डू प्रसाद स्वरूप देते हैं। हैं ना कमाल के गणपति बप्पा।

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मोहनपुर गांव में पू्र्ण पारंपरिक तरीके से माता दुर्गा के वैष्णवी स्वरूप की आराधना की जाती है। सप्तमी तिथि का माता का पट भक्तजनों के लिए खुलता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से मनौती मांगता है माता उसे जरूर पूरा करती हैं। नवमी तिथि को कुमारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है। गांव के बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि जब से गांव में मां दुर्गे की पूजा-अर्चना शुरू की गई है उसके बाद से गांव में तरक्की ही तरक्की देखने को मिल रही है।

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