08, Dec, 2016
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सनसनीखेज खुलासा: दरभंगा के ‘लालकिले’ में पांच हजार करोड़ का काला सच ! सबसे बड़ा जमीन घोटाला

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संवाददाता प्रवीण कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

दरभंगा का रहनेवाला कोई शख्स जब-जब देश की राजधानी दिल्ली में लालकिले को देखता है तो शायद उसकी आंखे नम हो जाती हैं…एक टिपिकल दरभंगिया ये सोचने को मजबूर हो जाता है कि दिल्ली के लालकिले से कहीं ज्यादा खूबसूरत तो उसके अपने शहर दरभंगा का लालकिला है लेकिन दरभंगा के लालकिले और दिल्ली के लालकिले की किस्मत में जमीन-आसमान का फर्क है। दिल्ली के लालकिले पर तिरंगा लहराने के लिए देश के प्रधानमंत्री पहुंचते हैं और दरभंगा के लालकिले के पास अपने गौरवशाली इतिहास पर रोने के सिवा अब तो कुछ रहा नहीं। खैर अभी मुद्दा कुछ और है…बांकी बातें फिर कभी।
प्रधानमंत्री मोदी के कालेधन के खिलाफ चलाये गए नोटबंदी के अभियान के बाद क्या बेनामी संपत्ति के ऊपर भी कार्यवाई होगी? क्या सुशाशन का नारा देने वाले नीतीश कुमार बिहार के सबसे बड़े जमीन घोटाले के ऊपर कोई जांच बिठाएंगे, या कोई ठोस कार्यवाई करेगी राज्य सरकार? चौंकिए मत! बिहार की धरती दरभंगा में अबतक का सबसे बड़ा जमीन घोटाला उजागर हुआ है। जी हाँ, एक ऐसा घोटाला जिसमे राज घराने से लेकर पुलिस के हाकिम तक और सर्वे ऑफिस से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस के अधिकारी, स्थानीय नेता और नगरपालिका तक शामिल बताये जा रहे हैं। जब इसकी सुचना newsofbihar.com को मिली तो हमने अपने खोजी पत्रकारों को भेजकर उक्त जमीन से सम्बंधित जानकारी जुटाई। newsofbihar.com को प्राप्त दस्तावेज और जानकारी से बहुत चौंकाने वाले राज से पर्दा उठा है। हम आपको एक एक कर दरभंगा राज के हर राज से वाकिफ कराएँगे।
आपको बता दें कि यह जमीन घोटाला इतना बड़ा है कि इसमें पड़ने से स्थानीय मीडियाकर्मी से लेकर स्थानीय नागरिक तक डरते हैं। कुछ लोगों ने इस मामले को उजागर करने का प्रयास किया तो स्थानीय पुलिस और भाड़े के गुंडों की मदद से उनको धमकाया गया। काफी जद्दोजहद के बाद सोनभद्र और सहारा अख़बार ने इस खबर को थोड़ी जगह दी लेकिन घोटाले में शामिल रसूखदार लोगों ने इसे बढ़ने से रोकने के लिए जमकर धन और बहुबल का प्रयोग किया।

सूत्रों की माने तो दरभंगा राज किले का जमीन बिकाऊ नहीं है, अगर है भी तो सिर्फ गिने-चुने खेसरा को ही बेचा जा सकता है। फिर भी यहाँ की जमीन, जिसमे पक्का रास्ता, मंदिर के ट्रस्ट की जमीनें, महारानी के ट्रस्ट की जमीनें, तालाब, नाला, मुख्य-द्वार के आगे पीछे की जमीन इत्यादि को उन्हीं खेसरा नंबरों में बेच दिया गया। गौरतलब हो कि सर्वे ऑफिस में भी राजघराना के लोग ही काबिज हैं और उनके द्वारा अपने हिसाब से परिवर्तन कर जमीनों को बेच दिया जाता है। सर्वे ऑफिस में जो कर्मचारी ऑफिस को खोलता है वह वर्षों पहले रिटायर हो चुका है और सर्वे कार्यालय में अभी उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। अभी कुछ दिनों पहले कार्यालय में आग भी लगी थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक आग लगाकर जरुरी कागजातों को जलाने का प्रयास भी किया जा सकता है। newsofbihar.com ने राज के कार्यालय में आग लगने की घटना और उसके पीछे षड़यंत्र की आशंका की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

सोनभद्र और सहारा समय में इससे सम्बंधित ख़बरों के प्रकाशित होने के बाद भी अभी तक उसपर कोई कार्यवाई नहीं हुई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यदि राज का जमीन बेचने वालों के पास जमीन का स्वामित्व होता तो जिन लोगों ने राज की जमीन को खरीदकर घर बनाया है उनके नाम से दाखिल-ख़ारिज होता। जबकि यह सर्वविदित है कि बिकाऊ जमीन जो वर्षों पहले बिक चुका है को छोड़ कर किसी जमीन का दाखिल-ख़ारिज नहीं हो रहा है। यही कारण है कि दरभंगा का रामबाग किला जो वार्ड स. 14 के अंतर्गत आता है बिना नगर निगम के किसी अथॉरिटी से नक्शा पास कराये सारे नियमों को ताख पर रखकर कंक्रीट जंगल में बदल गया।

newsofbihar.com के सवाल?

दरभंगा नगर निगम से यह सवाल करना चाहती है कि रामबाग में बिना दाखिल-ख़ारिज किये हुए जमीन पर, बिना नक्शा पास कराये 4 मंजिला इमारतों का निर्माण कैसे हो गया? राज किले के अन्दर निर्मित उन मकानों को नगर निगम के तरफ से कोई नक्शा प्राप्त नहीं है और कोई भी मकानमालिक नगरनिगम को होल्डिंग टैक्स नहीं देता क्यूंकि दस्तावेजों में रामबाग किले के अन्दर मकान मौजूद ही नहीं है। क्या दरभंगा नगार निगम के अन्दर बिना नगर निगम की जानकारी के बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी गईं और उनपर अवैध निर्माण हुआ यह जांच का विषय है। साथ ही अगर जो जमीनें बेचीं गयीं वह बिकाऊ हैं तो किसी अधिकारी द्वारा किस आधार पर राज की जमीनों का दाखिल ख़ारिज रोका गया और वह बिना किसी अवरोध आजतक कैसे प्रभाव में है।

ज्ञात हो कि रामबाग किला की दीवारों पर जिला प्रशासन का बोर्ड लगा है जिसमे चेतावनियाँ लिखी हुई हैं। मतदान के समय दीवार पर लगाए गए पोस्टर पर जुर्माना लगाना कहीं न कहीं दर्शाता है की यह जिला प्रशासन के अधीन है। अगर यह जिला प्रशासन के अधीन है तो फिर किला के मुख्य द्वार की गुम्बदों में दुकानें कैसे चल रही हैं? बिहार के इस धरोहर को किराये पर लगाने का अधिकार किसने दिया है इसे किराये पर लगाने वालों को और किराये पर चल रहे एक प्रभावशाली व्यक्ति के जिम और अन्य दुकानों को बिना किसी आधार और दस्तावेज के अपनी दूकान चलाने की अनुमति किसने और क्यूँ दी यह जांच का विषय है।

अब प्रश्न यह उठता है कि अगर इतने बड़े भू-खंड को बेचने का अधिकार अगर किसी को प्राप्त है तो इसके लिए सबसे पहले कानूनन जमीन विक्रेता को नियमों के तहत पुरे भू-खंड का प्लानिंग करके हर प्लाट के लिए पक्का रास्ता, पक्का नाला, स्ट्रीट लाइट, स्कूल के लिए, अस्पताल के लिए, प्ले ग्राउंड क्व लिए जगह छोड़कर जमीन का ले-आउट सरकार के पास जमा कराना चाहिए था जो नहीं किया गया। ऐसा इसलिए नहीं किया गया क्यूंकि ऐसा करने पर जमीन बेचने वाले को जमीन पर अपना स्वामित्व सिद्ध करने के दस्तावेज बिहार सरकार के समक्ष उपस्थित करना पड़ता।

कुछ इस तरीके से किया जा रहा है गोरखधंधा

जब बात राजघराने और रसूखदार और बड़े पदों पर आसीन लोगों की हो तो फिर उनके लिए सारे नियम और कानून बदल दिए जाते हैं? इतना ही नहीं अपने इस गोलमाल को छिपाने के लिए राजघराने ने एक ऐसा उपाय ढूंढा जिसके तहत जमीनों की रजिस्ट्री तो बदस्तूर जारी रही लेकिन दाखिल-ख़ारिज रुक गया। जब हमने इस बाबत रजिस्ट्री ऑफिस में बात किया तो वहां से बताया गया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं। रजिस्ट्री ऑफिस के मुताबिक वो सिर्फ इतना देखते हैं की बेचने और खरीदने वाले उपस्थित हैं या नहीं और रजिस्ट्री कर दिया जाता है। दाखिल-ख़ारिज इसलिए रुकवाया गया क्यूंकि यदि दाखिल-ख़ारिज होता होता तो सारे खेसर नम्बर का सही रकबा सामने आ जाता। साथ ही यह भी पता चल जाता कि कौन सी जमीन बिकाऊ है और कौन सी जमीन गैर-मजरुआ है, कहाँ तालाब है और कौन सा जमीन ट्रस्ट के अंतर्गत आता है। लेकिन इस हजारों करोड़ के जमीन घोटाले में संलिप्त लोगों की बुद्धिमानी देखिये दस धुर जमीन बेचने के लिए भी सात से आठ खेसर नम्बर का प्रयोग किया जाता है ताकि कोई समझ न सके कि किस खेसर का जमीन बिक रहा है।

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि जिस खेसरा नम्बर में 5 धुर जमीन था उसके अन्दर 5 बीघा तक जमीन बेचा गया। इस बड़े खरीद फरोख्त में तकरीबन 5000 करोड़ रूपये के कालेधन का खेल हुआ है और यह बिहार के इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा जमीन घोटाला है।

गौरतलब है कि जिस दिन इन सभी बातों का खुलासा होगा और सरकार इसकी जांच करवाएगी उसके बाद घोटालेबाजों की करनी का खामियाजा जमीन खरीद कर उसपर घर बनाकर रहने वालों को भुगतना होगा। अब प्रश्न यह उठता है कि जांच के बाद अगर दाखिल-ख़ारिज का आदेश आता है और तब अगर यह पाया जाता है की जमीन बिकाऊ नहीं था तो क्या राज-घराना जमीन खरीदने वालों को वो सारे पैसे लौटाएगा? अगर लौटाएगा भी तो कितना क्यूंकि हम सभी जानते हैं कि जमीन के खरीद फरोख्त में किस तरह से कालेधन का प्रयोग होता है।

यह घोर आश्चर्य की बात है कि सम्पूर्ण दरभंगा प्रशासन, नेतागण एवं यहाँ रह रहे निवासी उक्त बातों पर चर्चा भी नहीं करते। इन सभी लोगों ने इस घोटाले को दबाकर दरभंगा में एक ऐसे स्लम का निर्माण कर दिया है जो राजनैतिक दृष्टिकोण से तो लोगों को दिखाई देता है क्यूंकि इस कॉलोनी में हजारों की संख्या में मतदाता हैं जो बिना किसी सुविधा के रह रहे हैं, लेकिन भौगोलिक दृष्टिकोण से सरकारी दस्तावेजों में यह कॉलोनी है ही नहीं। इस विषय पर चर्चा और जांच करने के बजाय नालों को भरकर जमीन बनाकर बेचने का काम कई दिग्गज कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है की राज किला दरभंगा शहर का हिस्सा नहीं है बल्कि किसी टापू पर बसा हुआ है जहाँ प्रशासन, पुलिस और नेतागण किसी की पहुँच नहीं हो पा रही है, या इस पर बिहार सरकार और केंद्र-सरकार का कोई नियम लागू नहीं होता है। अगर ऐसा ही है तब तो फिर जो जैसे चल रहा है वह ठीक है लेकिन अगर दरभंगा राज सरकार के अधीन है तो इस विषय की गहराई से जांच होनी चाहिए जिससे कई बातों का खुलासा होगा और कई सफेदपोश बेनकाब होंगे।

एक बात जो सपष्ट देखने को मिलता है वो यह कि देखते ही देखते ट्रस्ट का फिल्ड जो बच्चों के खेल-कूद के लिए उपयोग में था एक सोची समझी साज़िश के तहत धीरे-धीरे गंदे पानी के गड्ढे में बदल गया। कारण यह है कि सरकारी नाले के निर्माण को अधूरा छोड़ दिया गया लेकिन ठीकेदार को पूरे पैसे मिले। फील्ड की हालत ऐसी है की आस-पास के इलाके में महामारी फैलने की आशंका है। हम सभी जानते हैं की दरभंगा भूकंप प्रभावित क्षेत्र है। ऐसे में बिना नगर निगम से नक्शा पास कराये इतने बड़े आवासीय कॉलोनी का निर्माण दुर्घटना को बुलावा देता है। तंग गलियां और बिना भूकंप मानकों के बने हुए मकानों की सुरक्षा भगवान् भरोसे है।

इस 5000 करोड़ के जमीन घोटाले पर सभी मौन हैं क्यूंकि राजघराने के लोग स्थानीय अपराधियों को बुलाकर यहाँ रहने वाले लोगों को डराने धमकाने का काम करते हैं और उल्टा कई प्रकार के पुलिस केस में फंसा देते हैं या फंसाने की धमकी देते हैं। पुलिस और स्थानीय गुंडों के डर से यहाँ रहने वाले लोगों ने अपनी जुबान पर ताला लगा लिया है। यह पूरी कहानी किसी फिल्म से प्रेरित लगती है लेकिन सच्चाई यह है कि यह काला सच हमारे बिहार के दरभंगा जिले का है जिसके किले का अपना स्वर्णिम इतिहास है। आज उसी स्वर्णिम इतिहास का काला सच जनता के सामने लाने की जरुरत है और उसकी सघन जांच करवाने का समय है।
इस लेख के माध्यम से newsofbihar.com दरभंगा के स्थानीय प्रशासन, नेता, पुलिस अधिकारी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार से यह मांग करती है कि राज-घराने के इस काले सच की जांच हो और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाए

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19 विचार साझा हुआ “सनसनीखेज खुलासा: दरभंगा के ‘लालकिले’ में पांच हजार करोड़ का काला सच ! सबसे बड़ा जमीन घोटाला” पर

  1. Kumar prakash December 2, 2016

    Good topick pls work

  2. Tejnarayan jha bramhrshi December 2, 2016

    Bihar aur kendra ispar karbai karen

  3. नितेश भरद्वाज December 2, 2016

    सचमच बिहार का सबसे बड़ा घोटाला है,मिथिला मैथिल की राजनीती पर अपनी रोटी सेकने वाले कहाँ मर गए ,उन्हें अपनी धरोहर नही दिखाई दे रही है, चूड़ा दही और माँछ भात पर पूरा धरोहर को नष्ट कर दिए, भविष्य की पीढ़ी अपने पूर्वजों को कभी माफ नही करेगा जोरदार आंदोलन होनी चाहिए ।जोरदार विरोध और जाँच हों8 चाहिए ।आपको बहुत बहुत साधुवाद बधाई की अपने इतने हिम्मत की काम की इन हिजड़ो के बस्ती में ।

  4. Alok December 2, 2016

    Gahrai me jaker janch honi chahiye aakhir majara kya hai

  5. Vikash Kumar December 2, 2016

    यह बहुत चिंता की बात है कि सरकार इस गिरते ऐतिहासिक धरोहर को बचाने का ठोस उपाय नहीं कर रही है तथा दोषियों को छोड़ रही है।मै आपको इस बात को उठाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ।

  6. Balkrishna jha December 2, 2016

    Iske liye andolzn karna prega. Tabhi milthila ka ye dhrohar bachega. Sochne bali bat hai ki jis mithila raj ki mang ham kar rahe hain vah to pahle se Rajya tha aur uski rajdhani dhwast hone ke kagaar par hai.

  7. Om prakash jha December 2, 2016

    Yu r very brave.

  8. रमेश चंद्र यादव December 2, 2016

    निश्चित रूप से इस पर सघन जांच हो और उस भूखण्ड पर सबसे बड़ा औद्योगिक संसथान खोला जाय जिससे हमारे प्रान्त का कुछ विकाश हो ।
    और धन्यवाद् news@bihar को जिनके द्वारा यह सुचना आम जन को मुहैया करवाया गया ।

  9. Dilip mishra December 2, 2016

    madan mohan jha agar sachey maithil hai to turant jaanch karwae aur mantri mandal se istifa de

  10. raju mishra December 3, 2016

    bahut bahut Dhanbad a news channel Oru jathi kraj Badshahi

  11. संजीव ठाकुर December 3, 2016

    ये सारी जवाबदारी जिलाधीश की होती है की ऐसी संगीन मामले में दखलंदाजी करके मामले का निपटारा करे …! आमलोगों की इसमें क्या गलती है, उन्होंने तो अपनी जीवन भर की कमाई जमीन खरीदने व माकन बनाने में झोंक दी है…!
    पहले १०-१५ लोगों के जमीनों की दाखिल खारिज़ भी हुई, ऐसा भी नहीं है की अधिकृत जमीनों की दाखिल खारिज़ और बांकी सारी जमीनें अनधिकृत है I
    न्याय की दृष्टि से अगर देखि जाइ तो सभी जमीनों की दाखिल खारिज़ करवाने की दिशा में उचित पहल होनी चाहिए ताकि नगर-निगम को टैक्स भी मिलेगा एवं नागरिक रक्षा भी साथ साथ होगी….!
    उन लोगों का क्या दोष है जिन्होंने जमीन खरीद की है राज कैंपस के अंदर…!

    संजीव ठाकुर….

  12. Balkrishna Jha December 4, 2016

    Kuchh cheejen jo kanoon ruka hua hai use khareedna aur uspar avaidhanik roop se makan banana to jurm hai, galti nahi. Yhi to darshata hai ki Rambag kila me kiyna bara kale dhan ka upyog hua hai jiska jikra kahi bhi nahi hai. Kya regulise hone se betarteebi se banaye gaye makaano se prakritik apdaon se bacha ja sakta hai? Kuchh bhi ho. Bhrashtachar ko ujagar karna hi aj ke bharat ka agenda hai.

  13. Abhishek Singh December 4, 2016

    yeh rajgharana rajgharana kya Kr rhe ho naam nahi malum ha kya….??
    ki tumlog Bhi darte ho..

  14. pankai December 4, 2016

    Doshiyo par nischit karrvaye honi chahiye.

  15. Himanshu kumar Lucky December 4, 2016

    सबसे पहले इस न्यूज़ को उजागर करने वाले पत्रकार एवं उनके सहयोगी को मैं सलाम करता हूँ ..।
    मैं इस किला के पास और किला के अंदर रामबाग में कुछ दिन रह चुका हूं..जब भी मैं किला के इस सौंदर्य को देखता ..मेरा मन मचल जाता की जिस किला के अंदर तालाब, मंदिर आदि इतनी अत्यंत चीज़े बनी हुई है..यहाँ पर लोग तालाब भरवाकर पक्का मकान बना रहे है..मैंने कुछ लोगों से पूछा की इस किले के अंदर जमीन बेचने का अधिकार किसे है..तो कुछ लोगों ने बिचोलिये से संपर्क करवाया..लेकिन मैं जमीन लेने देने की प्रक्रिया से सहमत नही हुआ..
    लेकिन हर समय एक सवाल जो मेरे मन को कौंध रहा था कि…इस धरोहर को संस्कृति को सँभालने के बजाय इसके सौंदर्य को क्यूँ नष्ट किया जा रहा है..?
    और पत्रकार महोदय को ये भी बता चाहता हूँ की उन्होंने किला के गुम्बद में जिस जिम(व्यायाम-शाला) का उल्लेख अपने लेख में किया है..तो मैं उन्हें ये बता देना चाहता हूँ की उस जिम के संचालक दरभंगा के स्थानीय बीजेपी नेता हैं…और मैं पूर्ण रूप से तो नही कहूँगा लेकिन इतना तो जरूर है कि इस भू- प्रॉपर्टी में दरभंगा के स्थानीय नेता एवं अधिकारी की मिली भगत है।

    और एक बात जो …मैं पिछले महीने दरभंगा में किले के अंदर स्थित सिनेमा हॉल के सामने वाले मैदान को देखकर आश्चर्य हुआ…की जहाँ कुछ दिन पहले ही हमलोग मित्रों के साथ शाम में बैठकर गप्पे लड़ाते थे..बच्चे सब तरह तरह के खेल खेलते थे …उसी मैदान पर चारों और पानी जो की एक गंदे तालाब जैसा रूप ले लिया ।

    अब आप जल्द से जल्द भू-माफियाओं को उजागर करवाएं..जिससे की हम जैसे लोगों की उत्कंठा और मन को शांति मिले।

  16. अरुण कुमार दास December 4, 2016

    इस महाघोटाला की जानकारी तो प्रायः मिथिला /बिहार की हर जनमानस को है लेकिन धन्यबाद है इसे समाज /प्रसासन /सरकार तक पहुंचाने बाले को । दरभंगा का राजकिला और राजनगर का राजभवन को सरकार की कड़ी दृस्टि की आब्श्यक्ता है ।सरकार दृस्टिबिहिंन न होये

  17. अरुण कुमार दास December 4, 2016

    इस महाघोटाला की जानकारी तो प्रायः मिथिला /बिहार की हर जनमानस को है नही मालूम है तो अंचल अमला /जिला प्रसासन और सरकार को ,लेकिन धन्यबाद है इसे समाज /प्रसासन /सरकार तक पहुंचाने बाले को । दरभंगा का राजकिला और राजनगर का राजभवन को सरकार की कड़ी दृस्टि की आब्श्यक्ता है ।सरकार दृस्टिबिहिंन न होये ।

  18. Abhishek Singh December 5, 2016

    True journalism

  19. Manish Kumar roy December 6, 2016

    bahut bahut dhanbad aap ko mera

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