05, Dec, 2016
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कथा दीपावली की…जानिए इसलिए लक्ष्मी-गणेश की होती है इस दिन पूजा !

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दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावली शब्द ‘दीप’ एवं ‘आवली’ की संधिसे बना है। आवली अर्थात पंक्ति, इस प्रकार दीपावली शब्द का अर्थ है, दीपोंकी पंक्ति । भारतवर्ष में मनाए जानेवाले सभी त्यौहारों में दीपावलीका सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदोंकी आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं।ख्1, माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चैदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था।

श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए । कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्तूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। इसे दीवाली या दीपावली भी कहते हैं।

दीवाली अँधेरे से रोशनी में जाने का प्रतीक है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यही चरितार्थ करती है- असतो माऽ सद्गमय , तमसो माऽ ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती है। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन,सफेदी आदि का कार्य होने लगता हैं। लोग दुकानों को भी साफ सुथरा का सजाते हैं। बाजारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाजार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नजर आते हैं।

क्यों होती है दिपावली में गणेश ओर मां लक्ष्मी की पूजा

लेकिन क्या आपने यह जानने की कोशिश की है कि आखिर दिवाली के दिन श्रीगणेश और मां लक्ष्मी की पूजा क्यों की जाती है या इस पर्व से क्या संबंध है। वैसे भी सभी धर्म कार्यों में गणेश जी के साथ तो गौरी जी का पूजन होता है, लेकिन दिवाली पर यहां श्रीगणेश के साथ मां लक्ष्मी का पूजन क्यों किया जाता है? पूर्वजों और पंडितों और कई पौराणिक कथाओं में इस कहानी का जिक्र किया है कि आखिर गणेश और लक्ष्मी की क्यों एक साथ पूजा की जाती है। आज हम आपको बताते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है?

पौराणिक ग्रन्थों में एक कथा में प्रमाण मिलता है कि लक्ष्मी जी की पूजा गणेश जी के साथ क्यों होती है। एक बार एक वैरागी साधु को राजसुख भोगने की लालसा हुई उसने लक्ष्मी जी की आराधना की। उसकी आराधना से लक्ष्मी जी प्रसन्न हुईं तथा उसे साक्षात् दर्शन देकर वरदान दिया कि उसे उच्च पद और सम्मान प्राप्त होगा। दूसरे दिन वह वैरागी साधु राज दरबार में पहुंचा। वरदान मिलने के बाद उसे अभिमान हो गया। उसने राजा को धक्का मारा जिससे राजा का मुकुट नीचे गिर गया। राजा व उसके दरबारीगण उसे मारने के लिए दौड़े। परन्तु इसी बीच राजा के गिरे हुए मुकुट से एक कालानाग निकल कर भागने लगा।

सभी चौंक गए और साधु को चमत्कारी समझकर उस की जय जयकार करने लगे। राजा ने प्रसन्न होकर साधु को मंत्री बना दिया, क्योंकि उसी के कारण राजा की जान बची थी। साधु को रहने के लिए अलग से महल दिया गया वह शान से रहने लगा। राजा को एक दिन वह साधु भरे दरबार से हाथ खींचकर बाहर ले गया। यह देख दरबारी जन भी पीछे भागे। सभी के बाहर जाते ही भूकंप आया और भवन खण्डहर में तब्दील हो गया। उसी साधु ने सबकी जान बचाई। अतः साधु का मान-सम्मान बढ़ गया। जिससे उसमें अहंकार की भावना विकसित हो गई।

राजा के महल में एक गणेश जी की प्रतिमा थी। एक दिन साधु ने वह प्रतिमा यह कह कर वहां से हटवा दी कि यह प्रतिमा देखने में बिल्‍कुल अच्छी नहीं है। साधु के इस कार्य से गणेश जी रुष्ठ हो गए। उसी दिन से उस मंत्री बने साधु की बुद्धि बिगड़ गई वह उल्टा पुल्टा करने लगा। तभी राजा ने उस साधू से नाराज होकर उसे कारागार में डाल दिया। साधू जेल में पुनः लक्ष्मीजी की आराधना करने लगा। लक्ष्मी जी ने दर्शन दे कर उससे कहा कि तुमने गणेश जी का अपमान किया है। अतः गणेश जी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न करो। लक्ष्मीजी का आदेश पाकर वह गणेश जी की आराधना करने लगा। इससे गणेश जी का क्रोध शान्त हो गया। गणेश जी ने राजा के स्वप्न में आ कर कहा कि साधु को पुनः मंत्री बनाया जाए। राजा ने गणेश जी के आदेश का पालन किया और साधु को मंत्री पद देकर सुशोभित किया। इस प्रकार लक्ष्मीजी और गणेश जी की पूजा साथ-साथ होने लगी। बुद्धि के देवता गणेश जी की भी उपासना लक्ष्मीजी के साथ अवश्य करनी चाहिए क्योंकि यदि लक्ष्मीजी आ भी जाये तो बुद्धि के उपयोग के बिना उन्हें रोक पाना मुश्किल है। इस प्रकार दीपावली की रात्रि में लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की भी आराधना की जाती है।
एक महत्वपूर्ण बात लक्ष्मी जी के साथ गणेश पूजन में इस बात का विशेष ध्यान रखे कि लक्ष्मी जी सदा गणेश जी के दाहिने हो ओर ही रहें, तभी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

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