26 मार्च, 2017
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देवदास को यहीं मिली थी पारो..माँ के बाद बेटी अपनाती है जिस्मफरोशी का…

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newsofbihar.com डेस्क

मुजफ्फरपुर, 11 जनवरी।

हम आपको बिहार के एक ऐसे जिले की अनसुनी कहानी बताने जा रहे हैं जहां खानदानी परम्परा के तौर पर मां के बाद बेटी उसे बखुबी निभाया करती है। जी हां, मुजफ्फरपुर के चतुर्भज स्थान की कहानी तो पुरानी है लेकिन अनसुनी है। यहाँ न सिर्फ मां बल्कि बेटी भी स्वेच्छा से अपनाती है वैश्यावृति। यहाँ आज से नहीं बल्कि वर्षाें से चला आ रहा वैश्यावृति।

वैश्यावृति या जिस्मफरोशी को लेकर दुनिया के प्रत्येक देश में अलग-अलग कानून है। भारत में इस धंधे को लेकर कानून काफी सख्त है, इसके बावजूद यहां चोरी-छिपे वैश्यावृति काफी होती है। ऐसी ही एक जगह है बिहार में जहां यह धंधा पारवारिक है, यानी कि मां के बाद बेटी को अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है।
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कौन-कौन करती है ये कामः-
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ‘‘चतुर्भुज स्थान’’ नामक जगह पर स्थित वैश्यालय का इतिहास मुगलकालीन है। यह जगह भारत-नेपाल सीमा के करीब है और यहां की आबादी लगभग 10 हजार है। पुराने समय में यहां पर ढोलक, घुंघरुओं और हारमोनियम की आवाज ही पहचान हुआ करती थी। हालांकि पहले यह कला, संगीत और नृत्य का केंद्र हुआ करता था, लेकिन अब यहां जिस्म का गंदा खेल होता है, यहां जिस्म को खरीदा जाता है।
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सबसे खास बात यह है कि वेश्यावृत्ति यहां पर पारिवारिक व पारंपरिक पेशा मानी जाती है। मां के बाद उसकी बेटी को यहां अपने जिस्म का धंधा करना पड़ता है।
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कैसे मनोरंजन के केन्द्र से बना वैश्यालय
इतिहास पर नजर डालें तो पन्नाबाई, भ्रमर, गौहरखान और चंदाबाई जैसे नगीने मुजफ्फरपुर के इस बाजार में आकर लोगों को नृत्य दिखाकर मनोरंजन किया करते थे। लेकिन अब यहां मुजरा बीते कल की बात हो गई और नए गानों की धुन पर नाचने वाली वो तवायफ अब प्रॉस्टीट्यूट बन गई। इस आधुनिकता ने जीने और कला-प्रदर्शन के तरीकों को ही बदल दिया। इस बाजार में कला, कला न रह कर एक बाजारू वस्तु बन गई।
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इतिहास से चली आ रही है यह परम्परा
यह जगह काफी ऐतिहासिक भी है। शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की पारो के रूप में सरस्वती से भी यहीं मुलाकात हुई थी और यहां से लौटने के बाद ही उन्होंने ’’देवदास’’ की रचना की थी।
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यूं तो चतुर्भुज स्थान का नामकरण चतुर्भुज भगवान के मंदिर के कारण हुआ था, लेकिन लोकमानस में इसकी पहचान वहां की तंग, बंद और बदनाम गलियों के कारण है। बिहार के 38 जिलों में 50 रेड लाइट एरियाज हैं, जहां दो लाख से अधिक आबादी बसती है। ऐसे में यहां पर वैश्यावृति का धंधा काफी बड़े पैमाने पर पैर पसारे हुए है।
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