बिहार में विकास चुनावी मुद्दा बने, इसके लिए जेएनयू-डीयू के पूर्व छात्र आए साथ

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जेएनयू, नयी दिल्ली। 21 जुलाई। बिहार में अब तक चुनाव में जाति और संप्रदाय ही चुनावी मुद्दा बनते  रहे हैं। इसे बदलने के लिए और विकास को चुनावी मसला बनाने के लिए जेएनयू के कई पूर्व छात्रों और डीयू के छात्रों ने मिलकर ‘मिथिला म्यूजिंग्स’ नामक संस्था का गठन किया है। इनमें से अधिकांश फिलहाल लेक्चररार, मीडियाकर्मी या कॉरपोरेट संस्थानों में बड़े पद पर कार्यरत हैं।

संस्थान दो स्तरों पर काम करेगी। थिंक टैंक के तौर पर जहां वह बौद्धिकों को अपने साथ जोड़कर समाज को बौद्धिक आलोड़न देगी, वहीं बिहार में जमीनी स्तर पर भी काम करेगी। इसी क्रम में आज जेएनयू के भाषा अध्ययन संस्थान के समिति-कक्ष में एक विचार-गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें मुख्य अतिथि श्री निखिल कुमार थे, जो नगालैंड और केरल के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं।

इस सत्र का मॉडरेशन नगेंद्र श्रीनिवास ने किया, जो जेएनयू में रूसी भाषा के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बिहार की हालत एक के बाद एक सरकारों के समय बिगड़ती ही चली गयी है। किसी भी स्वस्थ समाज की बुनियादी जरूरत शिक्षा और स्वास्थ्य है। यदि बिहार को विकास के मानक पर खरा उतरना है, तो इसमें कम से कम उसे सामान्य प्रगति करनी ही होगी। उन्होंन मिथिला म्यूजिंग्स का परिचय देते हुए कहा कि आप्रवासी बिहारियों के बीच इस संस्था को एक थिंक-टैंक के तौर पर उभारने की कोशिश होगी।

जेएनयू के प्रोफेसर और जाने-माने समाजविज्ञानी मणींद्र ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना बिहार का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहारी या बिहार की स्वयंसेवी संस्थाएं चाहे जितना भी चाह लें, पॉलिटिकल विल के बिना बिहार में शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास की बात सोचना दरअसल प्रयासों को व्यर्थ करना होगा।

हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार और शोधकर्ता अजीत झा जी के मुताबिक बिहार के हालात काफी सुधरे हैं और निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बिहार में काफी सुधार हुआ है, हालांकि अब भी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। साथ ही, उन्होंने कहा कि गरीबी के सूचकांक पर भी काफी सुधार हुआ है और कई राज्यों के मुकाबले बिहार ने प्रगति की है।

वहीं, मुख्य अतिथि और नगालैंड के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत पर काफी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग जितने उद्यमी हैं, उन्हें बस गिव बैक टू सोसायटी के बारे में सोचने की जरूरत है, बाकी प्रतिभा और मेहनत के सहारे बिहार को फिर से प्रगति की राह पर दौड़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत में ही आमंत्रित अतिथियों का स्वागत पीतल के फ्लास्ट और मिथिला पेंटिंग के साथ किया गया। मिथिला म्यूजिंग्स के दिल्ली चैप्टर के महासचिव मयंक पाठक ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि हम दरअसल कुछ ऐसा उपहार देना चाहते थे,  जो अतिथियों के साथ लंबे समय तक रहे औऱ वे इस संस्था और उसके उद्देश्य को याद करते रहें।