23 अगस्त, 2017
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गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज का वो फरिश्ता जिसे लोग डॉक्टर कफील अहमद के नाम से जानते हैं

12 अगस्त गोरखपुर : Newsofbihar.com डेस्क

गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चों की की मौत की खबर के बीच आज सोशल मीडिया में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त जा रही है। एक नाम जो इस हादसे के बीच सुर्खियां बटोरक रहा है। वो नाम है डॉक्टर कफील अहमद का, डॉ. कफील अहमद ऑक्सीजन की कमी के कारण एक के एक दम तोड़ रहे बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर सामने आये। गुरूवार की रात दो बजे जब अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी का पता इंसेपेलाइटिस वार्ड के प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डा कफील अहमद को चला। पता चलते ही डॉक्टर कफील की नींद उड़ गई और ऑक्सीजन के बंदोबस्त में फौरन वह अपने एक मित्र के पास पहुंचे। ऑक्सीजन के तीन बड़े सिलेंडर लेकर अपनी गाड़ी से वह शुक्रवार की रात तीन बजे सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंचे। बालरोग विभाग में ऑक्सीजन के ये तीन सिलेंडर करीब 15 मिनट ही चल पाए।

लेकिन सिर्फ रात भर के ही लायक इन सिलेंडरों से किसी तरह काम चल पाया। सुबह सात बजे डॉक्टर कफील को सूचना मिली की ऑक्सीजन खत्म हो चुका है। जिसके कारण इन मासूम बच्चों की जान पर फिर खतरा मंडराने लगा। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों के होश फाक्ता हो गए जब उन्हें पता चला की वे कुछ कर पाने की स्थिति मे नहीं है। किसी आपात स्थिति को घबराने लगे। उधर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचने में काफी देरी थी। कर्मचारियों ने लगातार गैस सप्लायर व बड़े अधिकारियों को फोन लगाया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। डॉ. कफील अहमद ने एक बार फिर सिलेंडर के जुगाड़ के लिए ज़ोर आज़माइश की, और एख बार फिर अपने चिकित्सक मित्रों के पास पहुंच गये और अपने परिचित मित्रों के माध्यम से नज़दीक के कुछ प्राइवेट अस्पतालों से करीब एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति करवाई। बच्चों की जान के लिए फिक्रमंद डॉक्टर कफील मामले की गंभीरता से अच्छी तरह से वाकिफ थे। डॉ. कफील ने शहर के करीब छह ऑक्सीजन सप्लॉयरों को फोन लगाकर उनसे मदद की मांग की लेकिन सभी सप्लायरों ने तुरंत पैसे की मांग करते हुए तत्काल भुगतान के बिना सिलेंडर रिफिल करने की बात से इनकार कर दिया। ऐसे में डॉक्टर कफील अहमद ने अपने फर्ज़ से भी ऊपर जाकर अपने अधीनस्थ कर्मचारी को अपना एटीएम देकर के तुरंत ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को कहा

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उधर डॉ. कफील अहमद को इस काम के लिए सोशल मीडिया में लोगों की वाहवाही और काफी सराहा जा रहा है। रूबी अरुण लिखती है, इससे बड़ी देशभक्ति क्या होगी, क्या फर्क पड़ता है कि डा. कफील वंदे मातरम गायें न गायें। गौरतलब है कि दो दिन पहले सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा था कि सरकारी मदरसों में वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया गया है। यूपी में योगी सरकार की मदरसा काउंसिल ने सभी सरकारी मदरसों में 15 अगस्त का कार्यक्रम मनाने का नोटिस भेजा है। जिसमें राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाने का भी आदेश दिया गया है।

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