01 मई, 2017
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डॉक्टर के इंतजार में बीमार है बिहार का यह “मॉडल अस्पताल”

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संतोष कुमार की रिपोर्ट
औरंगाबाद , 31 जुलाई। यदि आप गंभीर रूप से बीमार हैं और आपको इलाज की सख्त जरुरत है तो आप किसी नीम हकीम के पास चले जाएं मगर भूल कर भी औरंगाबाद सदर अस्पताल ना जाएं। क्यूंकि वो कहावत है ‘ऊंची दुकान फीकी पकवान’। ठीक ऐसा ही कुछ हाल औरंगाबाद के इस बड़े से अस्पताल का है। जो कहने को तो शहर के सबसे बड़े और मॉडल अस्पताल है लेकिन जितना बड़ा नाम है, उतनी ही घटिया यहां के मरीजों की स्थिति है। ऐसा हम नहीं यहां की व्यवस्था चीख-चीख कर लोगों को बता रही है। कुछ ऐसा ही रविवार को इस अस्पताल में देखने को मिला जब आईएसओ प्रमाणित इस अस्पताल में अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित एक महिला गंभीर हालत में सुबह आठ बजे अपना इलाज कराने अस्पताल पहुंची। मगर उसका इलाज केवल इसलिए शुरू नहीं हो सका क्योंकि ना तो अस्पताल में डाॅक्टर मौजूद थे ना ही चिकित्सक महाशय ड्यूटी पर पहुंचे थे और ना ही किसी नर्स का कोई अता-पता था। बेचारी महिला दर्द से तड़पती रही, छटपटाती रही। लेकिन सूचना के बावजूद कोई भी डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आया। इस बात की जानकारी जब मीडिया को हुई तब मीडियाकर्मियों ने अस्पताल उपाधीक्षक को इसकी सूचना दी। मौके पर उपाधीक्षक ने जब लेडी डॉक्टर से संपर्क साधा और उन्हें ड्यूटी पर आने को कहा तो खुलासा हुआ कि बिना किसी सूचना के डॉक्टर मणि पटना चली गई हैं। महिला की हालत बिगड़ती देख आनन-फानन में पीड़िता को गया अस्पताल रेफर कर दिया गया और इस तरह से रेफरल अस्पताल में तब्दील हो चुके इस बड़े अस्पताल ने अपनी ड्यूटी निभा कर बड़े शान से खुद की इज्जत बचा ली।

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